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इस बार ट्रीट पानी के सैंपल में पाई गई खामी

Sun, 06 May 2018 10:56 PM IST
Updated Sun, 06 May 2018 10:56 PM IST
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इस बार ट्रीट पानी के सैंपल में पाई गई खामी
- फोटो : अमर उजाला

विनीत कुमार

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सोलन।
कहते हैं कि दूध का जला बच्चा भी लस्सी को फूंक-फूंक कर पीता है। ऐसा ही कुछ स्वास्थ्य विभाग और आईपीएच महकमे के साथ हो रहा है। प्रदेश की राजधानी सहित सोलन में फैले पीलिया के बाद हर पखवाड़े लिए जा रहे पानी के सैंपल में कभी न कभी कहीं कोई खामी नजर आ ही जाती है। दिसंबर में लिए पानी के सैंपल में रॉ वॉटर के सैंपल में हैपेटाईटिस-ए की मात्रा पाई गई। इस बार लिए सैंपल में रॉ वॉटर में नहीं, अपितु ट्रीट वॉटर में हैपेटाईटिस-ए की मात्रा पाई गई। इस रिपोर्ट के आने के बाद शहर में तीन दिनों तक जलापूर्ति को बंद रखा गया। इससे लोगों को पेयजल के लिए अन्य विकल्पों पर निर्भर होना पड़ा है। पुणे की लैब ने दोबारा पानी का सैंपल मांगा, जो दूसरी बार सही पाया गया।

दो ही जिले जहां भरे जाते हैं सैंपल
दो साल पहले सोलन और शिमला में पीलिया फैलने से जहां कुछ लोग काल का ग्रास बने थे, वहीं कई लोग बीमार हो गए थे। इस मामले ने तत्कालीन सरकार को जमकर घेरा और इस प्रकरण के बाद आदेश जारी हुए है कि मुख्य स्रोत अश्वनी खड्ड से माह में दो बार सैंपल भरे जाएं। इसकी रिपोर्ट समय-समय पर आती रहती है। प्रदेश भर में दो ही जिले हैं जहां पर पानी के सैंपल हर पखवाड़े भरे जाते हैं। शनिवार को भी हर पखवाड़े का सैंपल भरा गया है, जबकि इससे पहले भरे सैंपल में ट्रीट वॉटर में समस्या आई है।
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दिसंबर में फेल हुआ रॉ वॉटर सैंपल
बीते वर्ष दिसंबर में रॉ वॉटर का सैंपल फेल हो चुका है। इस पर स्वास्थ्य और आईपीएच विभागों ने पानी के ट्रीटमेंट प्रक्रिया को और दुरुस्त किया है। इस बार भी सैंपल पुणे लैब भेजे थे। वहां रॉ वॉटर नहीं, अपितु ट्रीट वॉटर में समस्या पाई गई। वहां से दोबारा सैंपल भरने के आदेश हुए। दूसरी बार सैंपल दुरुस्त पाया गया। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद आईपीएच ने पानी की सप्लाई बंद की और मरम्मत शुरू की।
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रॉ वॉटर सैंपल फैल होने के ज्यादा चांस
भूमिगत पानी में कई प्रकार के तत्व होते हैं। इससे पानी के दूषित होने का अंदेशा ज्यादा रहता है। इसीलिए पानी को ट्रीट किया जाता है, ताकि लोगों को सही स्वच्छ पानी मुहैया हो सके। स्वच्छ पानी के लिए स्वास्थ्य और आईपीएच विभाग की जिम्मेवारी सुनिश्चित की गई है।

यह भरे थे विभाग ने सैंपल
21 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग ने अश्वनी खड्ड से पानी के सैंपल भरकर जांच के लिए पुणे की वायरोलॉजी लैब भेजा था। यहां से आईपीएच को फोन पर सूचना दी गई कि पानी के सैंपल का रॉ वाटर की रिपोर्ट ठीक है, लेकिन ट्रीट वॉटर में हैपेटाईटिस-ए की मात्रा है। यह सूचना मिलने के बाद अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई को बंद कर दिया गया। विभाग ने 23 अप्रैल को एक और सैंपल को जांच के लिए पुणे भेजा। शनिवार को पुणे से आई रिपोर्ट में सैंपल पास पाए गए। विभाग ने फिर 5 मई को अश्वनी खड्ड से सैंपल पुणे भेजे हैं।

तीन दिनों तक अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई न आने से शहर में पेयजल संकट बढ़ गया। पानी की पर्याप्त सप्लाई न आने के चलते लोगों को इधर उधर भटकना पड़ा। रविवार से शहर में पानी की सप्लाई को सुचारू कर दिया गया है।

नगर परिषद के अध्यक्ष देंवेद्र ठाकुर ने बताया कि अश्वनी खड्ड के पानी के सैंपल को फैल बताया गया था। इसके चलते सप्लाई को बंद किया गया। सैंपल पास होने के बाद रविवार से पानी की सप्लाई सुचारू कर दी गई है।

जिला चिकित्सा अधिकारी एनके गुप्ता ने कहा कि रिपोर्ट के तहत रॉ वॉटर की समस्या नहीं थी, अपितु ट्रीट वॉटर में परेशानी आई थी। दोबारा भेजे सैंपल में रिपोर्ट सही है।

अधीक्षण अभियंता आईपीएच संजीव कौल ने कहा कि शिमला और सोलन जिले ऐसे हैं जहां हर पखवाड़े पानी के सैंपल को जांच के लिए पुणे भेजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सही है।

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