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चायल में फाईटो फिथोरिया बीमारी से सूखने लगे देवदार के हरे पेड़
Updated Fri, 23 Feb 2018 10:24 PM IST
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बीमारी से धीरे-धीरे सूखते जा रहे हैं देवदार के हरे पेड़, लोगों ने विभाग से किया अन्य पेड़ों को बचाने का आग्रह
बीस साल पहले भी फैली था पेड़ों पर यह बीमारी
संजय आजाद
चायल (सोलन)।
पर्यटक स्थल चायल की सुंदरता में चार चांद लगाने वाले देवदार के पेड़ रोगी हो गए हैं। समय रहते देवदारों की इस बीमारी का इलाज नहीं किया गया तो जंगल सूख जाएगा। लोग देवदार की शांत और शीतल छांव को तरस जाएंगे। चायल के चारों ओर देवदार के घने पेड़ हैं और यही इसकी सुंदरता का राज है। लोग देवदारों की शीतल छांव में टहलने के लिए दूर-दूर से आते हैं। सैलानियों का भी यहां अक्सर जमघट लगा रहता है। लेकिन कुछ सालों से देवदार यह हरे भरे वृक्ष सूखना शुरू हो गए हैं। देवदार के पेड़ों की यह हालत फाईटोफिथोरिया बीमारी की चपेट में आने से हुई है। लोगों का कहना है कि इस बीमारी का समय रहते इलाज करना होगा नहीं तो अन्य पेड़ भी इसकी गिरफ्त में आ सकते हैं।
चायल से स्टे जंगलों में कुछ देवदार के वृक्ष धीरे-धीरे सूखते जा रहे हैं। इसी प्रकार पैलेस होटल चायल रेस्ट हाउस गलुआ सकोडी शिव मंदिर के पास सिद्ध बाबा मंदिर के नजदीक मिहाणी गांव के पास स्थित कुटिया में और अन्य जगहों में देवदार के वृक्षों के सूखने का क्रम जारी है। बीस साल पूर्व भी इसी तरह देवदार के वृक्षों के सूखने की बीमारी फाईटोफिथोरिया इन जगहों पर फैली तब वन विभाग ने इन जगहों को कंटीली तार से घेर लिया था। साथ ही सूखे वृक्षों वाली जगहों पर गहरी ड्रेंचे बनाकर इस बीमारी को आगे फैलने से रोका था। लेकिन इसके बाद न तो विभाग ने इस ओर ध्यान दिया और न ही इस क्षेत्र में जाकर इसके परिणाम देखने की जहमत उठाई। इस वजह से यहां पेड़ों के सूखने का क्रम दोबारा शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों प्रेम कुमार, देवराज, अनिल कुमार, हरिदत्त, विनोद कुमार, सुनील कुमार, चंद्र सिंह और देविंद्र ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह इस ओर ध्यान देकर वृक्षों के सूखने की बीमारी को रोकने बारे कोई उपाय करें।
प्रयासरत है वन विभाग : राजेश शर्मा
वन मंडल अधिकारी राजेश शर्मा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। लेकिन वन संरक्षित क्षेत्र होने के कारण यहां पेड़ काटे नहीं जा सकते। इसके बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया है। बीमारी से निपटने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
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बीस साल पहले भी फैली था पेड़ों पर यह बीमारी
संजय आजाद
चायल (सोलन)।
पर्यटक स्थल चायल की सुंदरता में चार चांद लगाने वाले देवदार के पेड़ रोगी हो गए हैं। समय रहते देवदारों की इस बीमारी का इलाज नहीं किया गया तो जंगल सूख जाएगा। लोग देवदार की शांत और शीतल छांव को तरस जाएंगे। चायल के चारों ओर देवदार के घने पेड़ हैं और यही इसकी सुंदरता का राज है। लोग देवदारों की शीतल छांव में टहलने के लिए दूर-दूर से आते हैं। सैलानियों का भी यहां अक्सर जमघट लगा रहता है। लेकिन कुछ सालों से देवदार यह हरे भरे वृक्ष सूखना शुरू हो गए हैं। देवदार के पेड़ों की यह हालत फाईटोफिथोरिया बीमारी की चपेट में आने से हुई है। लोगों का कहना है कि इस बीमारी का समय रहते इलाज करना होगा नहीं तो अन्य पेड़ भी इसकी गिरफ्त में आ सकते हैं।
चायल से स्टे जंगलों में कुछ देवदार के वृक्ष धीरे-धीरे सूखते जा रहे हैं। इसी प्रकार पैलेस होटल चायल रेस्ट हाउस गलुआ सकोडी शिव मंदिर के पास सिद्ध बाबा मंदिर के नजदीक मिहाणी गांव के पास स्थित कुटिया में और अन्य जगहों में देवदार के वृक्षों के सूखने का क्रम जारी है। बीस साल पूर्व भी इसी तरह देवदार के वृक्षों के सूखने की बीमारी फाईटोफिथोरिया इन जगहों पर फैली तब वन विभाग ने इन जगहों को कंटीली तार से घेर लिया था। साथ ही सूखे वृक्षों वाली जगहों पर गहरी ड्रेंचे बनाकर इस बीमारी को आगे फैलने से रोका था। लेकिन इसके बाद न तो विभाग ने इस ओर ध्यान दिया और न ही इस क्षेत्र में जाकर इसके परिणाम देखने की जहमत उठाई। इस वजह से यहां पेड़ों के सूखने का क्रम दोबारा शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों प्रेम कुमार, देवराज, अनिल कुमार, हरिदत्त, विनोद कुमार, सुनील कुमार, चंद्र सिंह और देविंद्र ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह इस ओर ध्यान देकर वृक्षों के सूखने की बीमारी को रोकने बारे कोई उपाय करें।
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प्रयासरत है वन विभाग : राजेश शर्मा
वन मंडल अधिकारी राजेश शर्मा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। लेकिन वन संरक्षित क्षेत्र होने के कारण यहां पेड़ काटे नहीं जा सकते। इसके बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया है। बीमारी से निपटने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
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