{"_id":"5c925d2ebdec2213eb737bcf","slug":"71553095982-solan-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूल में वर्दी बेचने पर हंगामा, अभिभावकों को नहीं मिला पक्का बिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूल में वर्दी बेचने पर हंगामा, अभिभावकों को नहीं मिला पक्का बिल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दाड़लाघाट (सोलन)। अंबुजा विद्या निकेतन दाड़लाघाट में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल के एक वेंडर के खिलाफ उपायुक्त केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयोग कार्यालय शिमला को लिखित शिकायत भेजी है।
अभिभावकों अमित शर्मा, चंदन शर्मा, संगीता सोनी, ललित कुमार, योगेश कुमार, अरुण कुमार ने वेंडर पर खरीदे समान का पक्का बिल न देने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने शिकायत में लिखा है कि उनके बच्चे डीएवी अंबुजा विद्या निकेतन में पढ़ते हैं। स्कूल ने ड्रेस विक्रेता को बुलाकर स्टाल लगाया। बच्चों के लिए समान खरीदने के बाद जब पक्का बिल मांगा गया तो वेंडर ने पक्के बिल की जगह अभिभावकों को कैश मेमो थमा दिए। कहा कि वह बिल ऐसे ही देता है, उसका बहुत बड़ा कारोबार है सभी जगह यही बिल चलता है। यही पक्का बिल होता है। उन्होंने बताया कि स्कूल में 800 के आसपास बच्चे पढ़ते हैं। प्रत्येक बच्चे की ड्रेस पर अभिभावकों ने 3000 रुपये खर्च किए हैं। मांगने पर भी वेंडर ने पक्का बिल नहीं दिया। अभिभावक कैश मेमो और पक्के बिल में भेद जानते हैं। इस तरह के विक्रेता सरकार को तो लाखों का चूना लगा रहे हैं, साथ ही उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन भी करते हैं। समान का पक्का बिल न मिलने पर अभिभावक भड़के गए हैं। उन्होंने उपायुक्त केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयोग कार्यालय शिमला को एक लिखित शिकायत भेजकर मामले की जांच कर वेंडर पर कार्रवाई करने की मांग की है।
विज्ञापन
अभिभावकों अमित शर्मा, चंदन शर्मा, संगीता सोनी, ललित कुमार, योगेश कुमार, अरुण कुमार ने वेंडर पर खरीदे समान का पक्का बिल न देने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने शिकायत में लिखा है कि उनके बच्चे डीएवी अंबुजा विद्या निकेतन में पढ़ते हैं। स्कूल ने ड्रेस विक्रेता को बुलाकर स्टाल लगाया। बच्चों के लिए समान खरीदने के बाद जब पक्का बिल मांगा गया तो वेंडर ने पक्के बिल की जगह अभिभावकों को कैश मेमो थमा दिए। कहा कि वह बिल ऐसे ही देता है, उसका बहुत बड़ा कारोबार है सभी जगह यही बिल चलता है। यही पक्का बिल होता है। उन्होंने बताया कि स्कूल में 800 के आसपास बच्चे पढ़ते हैं। प्रत्येक बच्चे की ड्रेस पर अभिभावकों ने 3000 रुपये खर्च किए हैं। मांगने पर भी वेंडर ने पक्का बिल नहीं दिया। अभिभावक कैश मेमो और पक्के बिल में भेद जानते हैं। इस तरह के विक्रेता सरकार को तो लाखों का चूना लगा रहे हैं, साथ ही उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन भी करते हैं। समान का पक्का बिल न मिलने पर अभिभावक भड़के गए हैं। उन्होंने उपायुक्त केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयोग कार्यालय शिमला को एक लिखित शिकायत भेजकर मामले की जांच कर वेंडर पर कार्रवाई करने की मांग की है।
विज्ञापन