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हाइटेंशन तारों के जंजाल में जकड़ा शहर
Updated Wed, 28 Feb 2018 10:26 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
सोलन। बिजली की हाइटेंशन तारों के जंजाल से सोलन शहर और ग्रामीण दोनों इलाके महफूज नहीं हैं। बढ़ती आबादी के साथ मकानों की फेहरिस्त में जहां बढ़ोत्तरी हुई वहीं बिजली के तारों के जंजाल ने लोगों की सुरक्षा को भी ताक पर रख दिया है। घरों से सटकर गुजरते बिजली के तार कभी भी बड़े हादसे को अंजाम दे सकती हैं। अर्की में ऐसे ही एक हादसे में हाइटेंशन तार की चपेट में आने से एक दस साल की बच्ची को अपना दाहिना हाथ गंवाना पड़ा है। लेकिन इसके बावजूद बिजली बोर्ड नहीं जाग पाया है।
शहर में चुनिंदा जगहों को छोड़ दिया जाए तो बाकी जगह भारी वोल्टेज लेकर गुजरती तारें लगभग खुली पड़ी हैं। कुछेक जगहों पर बिजली बोर्ड ने लोहे की पुरानी तारों को नई केबल में बदला है। इससे हादसे की संभावना कम हुई है। लेकिन महंगी होने की वजह से बोर्ड पूरी तरह से इन तारों को बदल पाने में सक्षम नहीं है। तारों को बदलने के लिए बोर्ड को लाखों रुपये के बजट की जरूरत है और पैसा न होने की वजह से यह काम पूरा नहीं हो पा रहा है। फिलहाल, अर्की उपमंडल में हादसे के बाद घरों से सटी तारों को बदलने की आवाज उठने लगी है। सोलन शहर में मालरोड और अप्पर बाजार का क्षेत्र, शहर के कई अन्य वार्ड, हाउसिंग बोर्ड के अलावा आसपास के ग्रामीण इलाके में बिजली की तार पुरानी है। इससे करंट लगने का खतरा हर समय बना रहता है। अर्की में पिछले दिनों छत पर खेल रही एक बच्ची को हाइटेंशन लाइन से करेंट लग गया था। इस वजह से डॉक्टरों को बच्ची की जान बचाने के लिए उसका हाथ काटना पड़ा है। इस हादसे के बाद बिजली बोर्ड ने जांच बैठाई है और उसमें घर की ऊंचाई अधिक होने को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
बोर्ड कर रहा है तार बदलने का प्रयास : एससी
बिजली बोर्ड के अधीक्षण अभियंता सुदेश सेन ने बताया कि आबादी बढ़ने के बाद घर बिजली की लाइन के पास बन गए हैं। इससे हादसे का खतरा बढ़ा है। बोर्ड पुरानी तारों को आधुनिक बायर में बदलने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इसमें भारी-भरकम बजट की जरूरत है। लाखों रुपये खर्च करके ही इन पुरानी तारों को बदला जा सकता है। यदि एक बार तारें बदल दी जाती हैं तो हादसे का खतरा नहीं रहेगा।
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शहर में चुनिंदा जगहों को छोड़ दिया जाए तो बाकी जगह भारी वोल्टेज लेकर गुजरती तारें लगभग खुली पड़ी हैं। कुछेक जगहों पर बिजली बोर्ड ने लोहे की पुरानी तारों को नई केबल में बदला है। इससे हादसे की संभावना कम हुई है। लेकिन महंगी होने की वजह से बोर्ड पूरी तरह से इन तारों को बदल पाने में सक्षम नहीं है। तारों को बदलने के लिए बोर्ड को लाखों रुपये के बजट की जरूरत है और पैसा न होने की वजह से यह काम पूरा नहीं हो पा रहा है। फिलहाल, अर्की उपमंडल में हादसे के बाद घरों से सटी तारों को बदलने की आवाज उठने लगी है। सोलन शहर में मालरोड और अप्पर बाजार का क्षेत्र, शहर के कई अन्य वार्ड, हाउसिंग बोर्ड के अलावा आसपास के ग्रामीण इलाके में बिजली की तार पुरानी है। इससे करंट लगने का खतरा हर समय बना रहता है। अर्की में पिछले दिनों छत पर खेल रही एक बच्ची को हाइटेंशन लाइन से करेंट लग गया था। इस वजह से डॉक्टरों को बच्ची की जान बचाने के लिए उसका हाथ काटना पड़ा है। इस हादसे के बाद बिजली बोर्ड ने जांच बैठाई है और उसमें घर की ऊंचाई अधिक होने को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
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बोर्ड कर रहा है तार बदलने का प्रयास : एससी
बिजली बोर्ड के अधीक्षण अभियंता सुदेश सेन ने बताया कि आबादी बढ़ने के बाद घर बिजली की लाइन के पास बन गए हैं। इससे हादसे का खतरा बढ़ा है। बोर्ड पुरानी तारों को आधुनिक बायर में बदलने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इसमें भारी-भरकम बजट की जरूरत है। लाखों रुपये खर्च करके ही इन पुरानी तारों को बदला जा सकता है। यदि एक बार तारें बदल दी जाती हैं तो हादसे का खतरा नहीं रहेगा।
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