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नौणी विवि प्रबंधन और एबीवीपी संगठन में तनाव बढ़ा
Updated Fri, 14 Dec 2018 10:11 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय प्रबंधन और एबीवीपी छात्र संगठन में तनाव बढ़ गया है। छात्रों के आक्रोशित होने पर प्रबंधन भी अब मैदान में उतर आया है। विवि प्रबंधन का दावा है कि उन्होंने अध्यापकों की भर्ती या फीस बढ़ोतरी में नियमों की अनदेखी नहीं की है। नौणी विश्वविद्यालय में कुछ समय पूर्व अध्यापकों की भर्ती भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निर्देशों के अंतर्गत की गई है। विवि प्रवक्ता ने बताया कि सत्र 2018-19 के लिए विश्वविद्यालय की फीस सत्र 2017-18 के समान है। इसमें कोई वृद्धि नहीं की गई है। सत्र 2018-19 में स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में तो सत्र 2017-18 की तुलना में फीस लगभग 7000 रुपये प्रति सेमेस्टर की कटौती की गई है। इसके अलावा छात्रों को विश्वविद्यालय से दिए जाने स्कॉलर्शिप में काफी वृद्धि की गई है। विश्वविद्यालय ने बीएससी की मेरिट स्कॉलर्शिप को 350 से बढ़ाकर 1000, एमएससी में 2500 से बढ़ाकर 3000 और पीएचडी में 4000 से बढ़ाकर 5000 किया है। विश्वविद्यालय ने हिमाचल के छात्रों को दिए जाने वाला वजीफे में भी बढ़ोतरी की है। एमएससी में यह 1200 से बढ़ाकर 2000 और पीएचडी में 1800 से बढ़ाकर 2500 किया है। पिछले दो वर्षों में विश्वविद्यालय ने 15.14 करोड़ रुपये, छात्रों को दी जाने वाली सुविधाओं जैसे आधुनिक जिम, खेल मैदान, लैब व कक्षाएं, हॉस्टल आदि को बेहतर बनाने पर खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि कैंटीन मालिक को एक साल के अनुबंध के पूरा होने के बाद संपदा अधिकारी ने एक निष्कासन नोटिस दिया था। लेकिन कैंटीन मालिक नोटिस के बाद कोर्ट गए और कोर्ट से फैसला आना बाकी है।
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सोलन। डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय प्रबंधन और एबीवीपी छात्र संगठन में तनाव बढ़ गया है। छात्रों के आक्रोशित होने पर प्रबंधन भी अब मैदान में उतर आया है। विवि प्रबंधन का दावा है कि उन्होंने अध्यापकों की भर्ती या फीस बढ़ोतरी में नियमों की अनदेखी नहीं की है। नौणी विश्वविद्यालय में कुछ समय पूर्व अध्यापकों की भर्ती भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निर्देशों के अंतर्गत की गई है। विवि प्रवक्ता ने बताया कि सत्र 2018-19 के लिए विश्वविद्यालय की फीस सत्र 2017-18 के समान है। इसमें कोई वृद्धि नहीं की गई है। सत्र 2018-19 में स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में तो सत्र 2017-18 की तुलना में फीस लगभग 7000 रुपये प्रति सेमेस्टर की कटौती की गई है। इसके अलावा छात्रों को विश्वविद्यालय से दिए जाने स्कॉलर्शिप में काफी वृद्धि की गई है। विश्वविद्यालय ने बीएससी की मेरिट स्कॉलर्शिप को 350 से बढ़ाकर 1000, एमएससी में 2500 से बढ़ाकर 3000 और पीएचडी में 4000 से बढ़ाकर 5000 किया है। विश्वविद्यालय ने हिमाचल के छात्रों को दिए जाने वाला वजीफे में भी बढ़ोतरी की है। एमएससी में यह 1200 से बढ़ाकर 2000 और पीएचडी में 1800 से बढ़ाकर 2500 किया है। पिछले दो वर्षों में विश्वविद्यालय ने 15.14 करोड़ रुपये, छात्रों को दी जाने वाली सुविधाओं जैसे आधुनिक जिम, खेल मैदान, लैब व कक्षाएं, हॉस्टल आदि को बेहतर बनाने पर खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि कैंटीन मालिक को एक साल के अनुबंध के पूरा होने के बाद संपदा अधिकारी ने एक निष्कासन नोटिस दिया था। लेकिन कैंटीन मालिक नोटिस के बाद कोर्ट गए और कोर्ट से फैसला आना बाकी है।