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धूप धूल मिटटी धुंआ, यह है दाड़लाघाट का हाल

Mon, 05 Mar 2018 10:53 PM IST
Updated Mon, 05 Mar 2018 10:53 PM IST
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बारिश न होने से धूल और धुएं से कारोबारी पर भी झेल रहे हैं परेशानी, अस्पताल में हर रोज पहुंच रहे हैं ढाई सौ मरीज
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प्रशासन से किया समाधान का आग्रह
आरके शर्मा
दाड़लाघाट (सोलन)। धूल और धुएं से दाड़लाघाट के लोग परेशान हो गए हैं। लोग इस कारण बीमारियों की चपेट में भी आ रहे हैं। बारिश न होने से सड़कों से उठ रही धूल के कारण कारोबारी भी दिक्कतें झेलने को मजबूर हैं। यातायात के भारी दबाव के कारण सड़कों की धूल उड़कर सड़क से सटे घरों और दुकानों में पहुंच जाती है। भारी धूल के बीच यदि कोई गाड़ी को कुुुछ देर के लिए सड़क किनारे पार्क करना पड़े तो उस पर धूल की मोटी परत जम जाती है।
धूल मिट्टी और गाड़ियों से निकलने वाले जहरीले धुएं के बीच स्थानीय लोगों का दम घुटने लगा है। लोगों को अपने परिवार खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की चिंता सताने लगी है। धूल के कारण लोगों में खारिश, त्वचा का फटना, खुश्की, जलन, खांसी जुकाम के अलावा दमा तथा टीबी जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। अर्की सरकारी अस्पताल में रोजाना विभिन्न बीमारियों से ग्रसित 250 से 300 मरीज रोजाना उपचार के लिए आते हैं। कई लोग निजी चिकित्सालयों का भी सहारा लेने को लाचार है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक वर्ष में ही अर्की स्वास्थ्य खंड में 3000 लोग श्वास संबंधी रोगों का उपचार करवा चुके हैं। 100 के आसपास दमा के मरीजों ने इलाज करवाया है। वर्ष 2016 में 128 मामले टीबी के आए थे। वर्ष 2017 में टीबी के 6 नए मामले जुड़े हैं जिनमें से 3 मामलेे टीबी के बिगड़े रूप एमडीआर यानि मल्टी ड्रग रेजीसटेंस तथा तीन मामले मोनो एच के हैैं।
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बीडीसी चेयरमैन जगदीश ठाकुर, दुकानदार केके गुप्ता, किसान सभा के संयोजक जगदीश शर्मा और नरेंद्र चौधरी ने कहा कि व्यापारी सारा दिन समान पर बैठी धूल साफ करते थक जाते हैं। प्रदूषण फैलाने के लिए स्थानीय सीमेंट उद्योग भी जिम्मेदार हैं। चिमनी में विषैले तत्वों को सोखने के लिए लगाए यंत्र खर्चा बचाने के लिए नहीं चलाए जाते। इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को गंभीर बीमारियों के रूप में चुकाना पड़ रहा है। यहां तक कि कंपनी टैंकर से भी पानी का छिड़काव सड़कों पर नहीं करती। प्रदूषण से किसानों के मवेशी भी अछूते नहीं हैं। दूषित हवा और चारे की वजह से मवेशी बीमारियों से ग्रसित होकर मर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मौके पर आते है और सैंपल लेकर जाते है और बाद में सैंपल का परिणाम हमेशा नेगेटिव ही निकलता है। स्थानीय सीमेंट उद्योग की खदानों में कार्यरत मजदूरों और खदानों के आसपास रहने वाले लोगों में से फिलहाल कोई मामला सामने नहीं आया है।
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घर से मुंह पर मास्क बांधकर निकलें : नेगी
खंड चिकित्साधिकारी अर्की तारा चंद नेगी ने कहा कि घर से बाहर निकलने पर मुंह पर मास्क या कपड़ा बांध लें। दो हफ्तों से ज्यादा खासी होने पर तुरंत बलगम की जांच करवाएं। टीबी की बीमारी भारी धूल, धुएं और खदानों में काम करने वाले मजदूरों तथा खदानों के आसपास रहने वाले लोगों में ज्यादा संभावना रहती है।
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