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सोलन जिले में पहले दिन दस हजार में से 4766 विद्यार्थी पहुंचे स्कूल
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कक्षा में कोविड एसओपी के तहत बैठे विद्यार्थी।
- फोटो : SOLAN
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सोलन। कोविड के बीच सोमवार से स्कूल खुल गए। दसवीं और जमा दो तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं लगीं। पहले दिन 10 हजार विद्यार्थियों में से 4766 ने स्कूलों में उपस्थिति दर्ज की जबकि घर पर रह रहे विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाया गया।
कोविड के बीच शहरी स्कूलों में अधिक और ग्रामीण स्कूलों में बहुत कम विद्यार्थी पहुंच रहे हैं। जिले में कुल 189 स्कूल हैं जिनमें 59 मिडिल और 130 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल हैं। सभी स्कूलों में प्रबंधकों और शिक्षा विभाग ने कोविड सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
जिला स्तर की टीमों समेत शिक्षा उपनिदेशक उच्च शिक्षा जगदीश नेगी ने भी स्कूलों में इंतजामों का निरीक्षण किया। उन्होंने स्कूल प्रबंधकों को कोविड एसओपी की सख्ती से पालन के निर्देश दिए। उन्होंने अर्की क्षेत्र के डुमैहर, भूमती, बलेरा और सौर स्कूल का निरीक्षण किया। यहां की सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गई हैं।
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कोविड एसओपी के रहे पूरे इंतजाम
अर्की (सोलन)। रोज दो कक्षाओं के लिए खुले स्कूलों में जाने के लिए बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चों को कहना है कि कई महीनों से खुद को घरों में कैद सा महसूस कर रहे थे। हालांकि विद्यालय उन्हें हर घर पाठशाला के अंतर्गत पढ़ाई करवा रहा है। स्कूल प्रबंधन ने भी कोविड एसओपी का पूरा ध्यान रखा। प्रधानाचार्य मीना गुप्ता ने बताया कि कोविड के नियमों का पालन किया जा रहा है।
20 से 33 फीसदी बच्चे पहुंचे स्कूल
नालागढ़ (सोलन)। सरकार के स्कूल खोले जाने के निर्णय के चलते सोमवार को बीबीएन के सभी स्कूल खुले रहे। पहले दिन उपस्थिति मिली जुली रही। नालागढ़ में 12वीं में 33 फीसदी उपस्थिति रही जबकि दसवीं में केवल 20 फीसदी बच्चे स्कूल आए।
नंड स्कूल में उपस्थित 50 प्रतिशत रही। यहां दसवीं में 54 में से 27 तथा 12वीं में भी 52 में से 27 बच्चे उपस्थित थे। बघेरी स्कूल में 33 प्रतिशत रही। मित्तियां में लगभग 70 प्रतिशत उपस्थिति रही। रामशहर में 49 फीसदी बच्चे स्कूल आए। बच्चों के स्कूल जाने से जहां स्कूलों में रौनक लौटने लगी है। अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली है।
मित्तियां के जगदेव चंद ने बताया कि डेढ़ साल तक बच्चों की पढ़ाई का काफी नुकसान हो चुका है। ऑनलाइन और क्लास की पढ़ाई में बहुत अंतर है। बुद्धराम ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की आदतें खराब हो गई है। अब स्कूल खुलने से माता-पिता को राहत मिलेगी।
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कोविड के बीच शहरी स्कूलों में अधिक और ग्रामीण स्कूलों में बहुत कम विद्यार्थी पहुंच रहे हैं। जिले में कुल 189 स्कूल हैं जिनमें 59 मिडिल और 130 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल हैं। सभी स्कूलों में प्रबंधकों और शिक्षा विभाग ने कोविड सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
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जिला स्तर की टीमों समेत शिक्षा उपनिदेशक उच्च शिक्षा जगदीश नेगी ने भी स्कूलों में इंतजामों का निरीक्षण किया। उन्होंने स्कूल प्रबंधकों को कोविड एसओपी की सख्ती से पालन के निर्देश दिए। उन्होंने अर्की क्षेत्र के डुमैहर, भूमती, बलेरा और सौर स्कूल का निरीक्षण किया। यहां की सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गई हैं।
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कोविड एसओपी के रहे पूरे इंतजाम
अर्की (सोलन)। रोज दो कक्षाओं के लिए खुले स्कूलों में जाने के लिए बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चों को कहना है कि कई महीनों से खुद को घरों में कैद सा महसूस कर रहे थे। हालांकि विद्यालय उन्हें हर घर पाठशाला के अंतर्गत पढ़ाई करवा रहा है। स्कूल प्रबंधन ने भी कोविड एसओपी का पूरा ध्यान रखा। प्रधानाचार्य मीना गुप्ता ने बताया कि कोविड के नियमों का पालन किया जा रहा है।
20 से 33 फीसदी बच्चे पहुंचे स्कूल
नालागढ़ (सोलन)। सरकार के स्कूल खोले जाने के निर्णय के चलते सोमवार को बीबीएन के सभी स्कूल खुले रहे। पहले दिन उपस्थिति मिली जुली रही। नालागढ़ में 12वीं में 33 फीसदी उपस्थिति रही जबकि दसवीं में केवल 20 फीसदी बच्चे स्कूल आए।
नंड स्कूल में उपस्थित 50 प्रतिशत रही। यहां दसवीं में 54 में से 27 तथा 12वीं में भी 52 में से 27 बच्चे उपस्थित थे। बघेरी स्कूल में 33 प्रतिशत रही। मित्तियां में लगभग 70 प्रतिशत उपस्थिति रही। रामशहर में 49 फीसदी बच्चे स्कूल आए। बच्चों के स्कूल जाने से जहां स्कूलों में रौनक लौटने लगी है। अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली है।
मित्तियां के जगदेव चंद ने बताया कि डेढ़ साल तक बच्चों की पढ़ाई का काफी नुकसान हो चुका है। ऑनलाइन और क्लास की पढ़ाई में बहुत अंतर है। बुद्धराम ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की आदतें खराब हो गई है। अब स्कूल खुलने से माता-पिता को राहत मिलेगी।