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बिना ऑक्सीजन मरीज की मौत पर अस्पताल में हंगामा

Thu, 16 Nov 2017 11:16 PM IST
Updated Thu, 16 Nov 2017 11:16 PM IST
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बिना ऑक्सीजन मरीज की मौत पर अस्पताल में हंगामा
सोलन अस्पताल में मरीज की मौत पर घेराव करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में ऑक्सीजन सिलेंडर न मिलने से हुई बुजुर्ग की मौत का मामला तूल पकड़ गया है। मौत से गुस्साए शहरवासियों ने वीरवार को अस्पताल परिसर में खूब हंगामा किया। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक का घेराव किया और मामले की जांच की मांग की। लोगों ने अस्पताल में बरती जा रही लापरवाही के खिलाफ भविष्य में उग्र आंदोलन चलाने की धमकी भी दी है।
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क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में मंगलवार रात को एक बुजुर्ग को समय पर ऑक्सीजन का सिलेंडर नहीं मिल पाया था। बुजुर्ग के परिजनों का आरोप है कि गंभीर रूप से बीमार होने के बाद बुजुर्ग को रेफर कर दिया गया। मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत थी। लेकिन परिजनों के पास सिक्योरिटी राशि के रूप में जमा करवाने के लिए पांच हजार रुपये नहीं थे। इसके चलते उन्हें सिलेंडर नहीं दिया गया। बुजुर्ग के दूसरे अस्पताल न पहुंच पाने की वजह से मौत हो गई। परिजनों ने इसके बात अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया था। लेकिन वीरवार को व्यापार मंडल समेत अन्य स्वयंसेवी संस्थाएं भी पीड़ित पक्ष के समक्ष में उतर आईं। लोगों ने कहा कि सिर्फ एक सिलेंडर के लिए पांच हजार की सिक्योरिटी न होने पर लोग अगर मरने के लिए मजबूर हो जाएं तो यह समाज के लिए शर्मनाक है। अस्पताल प्रशासन क्या एक व्यक्ति की जान बचाने के लिए बिना सिक्योरिटी के सिलेंडर नहीं दे सकता? बताया कि युवती अपने दादा के लिए रोती बिलखती अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाती रही कि उसके पैसे नहीं हैं दादा की तबीयत खराब हो रही है। सिलेंडर उपलब्ध करवाएं। लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। इसी जद्दोजहद में दो घंटे बीत गए और वृद्ध की मौत हो गई। लोगों ने कहा कि यदि समय पर सिलेंडर मिल जाता तो शायद बुजुर्ग की मौत नहीं होती।
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बिना इलाज के लौटाए जा रहे बच्चे : गुप्ता
व्यापार मंडल अध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं अब राम भरोसे हैं। अस्पताल में चिल्ड्रन विशेषज्ञ न होने से रोजाना लोग अपने बच्चों का बिना इलाज किए वापस जा रहे हैं। यहीं नहीं कुछ एक गंभीर रोगियों को तो सीधे आईजीएसी या फिर चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया जा रहा है। यहीं नहीं अस्पताल के पुरुष मेडिकल वार्ड की छत से पानी टपक रहा है। इसे भी अभी तक दुरुस्त नहीं किया है।
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युवती की फरियाद पर नहीं किया गया कोई गौर
सोलन। मृतक के परिजन रिचा, मनीष, अमन, अजय, अभय, निखिल और शिवम ने बताया कि जिस दिन रिचा के दादा की तबीयत खराब हुई वह भी उनके साथ अस्पताल में थे। इस बीच डॉक्टर सहित अन्य स्टाफ भी उनसे अच्छे से बात तक नहीं कर रहा था। अस्पताल में पहले तो चिकित्सकों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया और वार्ड में शिफ्ट कर दिया। काफी समय तक उनकी तरफ गौर नहीं किया। इसी बीच बुजुर्ग की सांसें जवाब देने लगी तो चिकित्सक को बुलाया गया।
डॉक्टर ने उन्हें यहां से पीजीआई रेफर कर दिया। इसके लिए 108 एंबुलेंस को कॉल किया लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। निजी गाड़ी में बुजुर्ग को ले जाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत थी। युवती ने अस्पताल प्रशासन से सिलेंडर की मांग की तो उन्होंने पांच हजार रुपये सिक्योरिटी की मांग कर डाली जो युवती के पास नहीं थे। युवती रोती बिलखती अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाती रही कि उसके पैसे नहीं हैं, लेकिन सिलेंडर नहीं दिया। इसी बीच बुजुर्ग देगी राम की मौत हो गई।

अब पैसों की कमी में नहीं
जाएगी किसी गरीब जान
व्यापारमंडल ने करेगा संभव मदद का भरोसा
अस्पताल प्रशासन से संपर्क करने का किया आग्रह
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। व्यापार मंडल के प्रधान मुकेश गुप्ता, उपप्रधान रमेश बंसल, जोगिंद्र सेठी, पंजाबी महासभा सेक्रेटरी भरत साहनी, मुकेश वर्मा, मनोज और अन्य ने स्वास्थ्य विभाग से कहा कि यदि अस्पताल में इस तरह कोई मामला आता है और वह जरूरतमंद है तो वह उनसे या उनकी संस्था से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोबारा इस कभी भी किसी के परिजनों के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए जोकि आज इस युवति के साथ हुआ है। युवति रोती बिलखाती रही लेकिन उसके रोने की भी किसी को थोड़ी सी दया तक नहीं आई। उन्होंने प्रशासन को चेताया कि यदि दूसरी बार इस तरह का कोई मामला होता है तो वह इसके लिए सख्त रुख अपनाएंगे।


घटना की होगी जांच : एमएस
एमएस का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे डॉ. राजन उप्पल ने कहा कि अस्पताल के पास सिर्फ 30 से 35 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं। इसके चलते इसकी जरूरत यहां भी बहुत अधिक रहती है। कई बार बिना सिक्योरिटी पर दिए ऑक्सीजन सिलेंडर वापस नहीं आते। इसके चलते सिलेंडर की सिक्योरिटी लेना आवश्यक है। लेकिन इस तरह की आपातकाल स्थिति में सिक्योरिटी का नियम कोई मायने नहीं रखता। यह घटना कैसे हुई इसकी जांच करेंगे।
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