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Solan News: कक्षाओं में 20 की जगह 40-40 बच्चे, पांच निजी स्कूलों को नोटिस
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विभाग की टीम के औचक निरीक्षण में खुली पोल
माल रोड और राजगढ़ रोड क्षेत्र के बड़े स्कूल शामिल
15 अप्रैल तक जवाब तलब
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। शहर के निजी स्कूलों की ओर से नियमों को ताक पर रखकर प्री-प्राइमरी कक्षाओं में क्षमता से अधिक बच्चों को दाखिला देने का मामला सामने आया है। इस अनियमितता पर कड़ा संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग ने शहर के पांच नामी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें माल रोड, राजगढ़ रोड समेत आसपास के क्षेत्रों के बड़े निजी स्कूल शामिल हैं।
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार प्री-प्राइमरी स्तर पर बच्चों की बेहतर देखभाल और शिक्षा के लिए प्रति 20 बच्चों पर एक शिक्षक और एक आया (हेल्पर) का होना अनिवार्य है। विभाग के औचक निरीक्षण में पाया गया कि इन स्कूलों में एक-एक कक्षा में 40-40 बच्चों को बैठाया गया था, जो निर्धारित मानक से दोगुना है।
विभाग की विशेष टीम ने पिछले सप्ताह शहर के निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने कक्षाओं में बच्चों की संख्या, उपलब्ध शिक्षकों की संख्या और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की। जांच में सामने आया कि स्कूलों ने दाखिले तो धड़ल्ले से दे दिए, लेकिन बच्चों की संख्या के अनुपात में अतिरिक्त शिक्षकों या आया की नियुक्ति नहीं की। विभाग ने इन स्कूलों से जवाब मांगा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई क्यों न की जाए।
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बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। स्कूलों को जल्द से जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके लिए उन्हें 15 अप्रैल तक का समय दिया गया है।
-एचआर चंदेल, खंड शिक्षा अधिकारी
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माल रोड और राजगढ़ रोड क्षेत्र के बड़े स्कूल शामिल
15 अप्रैल तक जवाब तलब
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। शहर के निजी स्कूलों की ओर से नियमों को ताक पर रखकर प्री-प्राइमरी कक्षाओं में क्षमता से अधिक बच्चों को दाखिला देने का मामला सामने आया है। इस अनियमितता पर कड़ा संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग ने शहर के पांच नामी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें माल रोड, राजगढ़ रोड समेत आसपास के क्षेत्रों के बड़े निजी स्कूल शामिल हैं।
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार प्री-प्राइमरी स्तर पर बच्चों की बेहतर देखभाल और शिक्षा के लिए प्रति 20 बच्चों पर एक शिक्षक और एक आया (हेल्पर) का होना अनिवार्य है। विभाग के औचक निरीक्षण में पाया गया कि इन स्कूलों में एक-एक कक्षा में 40-40 बच्चों को बैठाया गया था, जो निर्धारित मानक से दोगुना है।
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विभाग की विशेष टीम ने पिछले सप्ताह शहर के निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने कक्षाओं में बच्चों की संख्या, उपलब्ध शिक्षकों की संख्या और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की। जांच में सामने आया कि स्कूलों ने दाखिले तो धड़ल्ले से दे दिए, लेकिन बच्चों की संख्या के अनुपात में अतिरिक्त शिक्षकों या आया की नियुक्ति नहीं की। विभाग ने इन स्कूलों से जवाब मांगा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई क्यों न की जाए।
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बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। स्कूलों को जल्द से जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके लिए उन्हें 15 अप्रैल तक का समय दिया गया है।
-एचआर चंदेल, खंड शिक्षा अधिकारी