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लंपी रोग से 255 पशुओं की मौत, 6,362 संक्रमित
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। पशुओं में लंपी रोग के मामले और मौत का आंकड़ा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। जिला में अभी तक 255 पशुओं की मौत हो चुकी है। जबकि 6,362 संक्रमित हुए है। जबकि 3225 संक्रमित पशु रिकवर भी हुए हैं। रोजाना 15 से 20 पशुओं की मौत हो रही है।
इसमें सबसे अधिक संक्रमित मौत के मामले नालागढ़ और धर्मपुर उपमंडल से आ रहे हैं। पशुपालन विभाग ने स्वस्थ पशुओं की वैक्सीन कार्य को भी युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। इसके तहत तीन दिनों में पशुपालन खंड धर्मपुर, कुनिहार, कंडाघाट और नालागढ़ में 12,010 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
जानकारी के अनुसार लंपी रोग कमजोर और पहले से किसी अन्य बीमारी से ग्रसित पशु इस रोग की चपेट में जल्दी आ रहे हैं। इसमें बहुत कमजोर पशुओं की मौत भी हो रही है। उपमंडल नालागढ़ और धर्मपुर के काबा, धारगुड़ा क्षेत्र से अधिक मामले आ रहे हैं।
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ये रोग सिर्फ गो प्रजाति के पशुओं में ही लग रहा है। इस रोग से भैंसों को कोई नुकसान पहुंचा है। विभाग की गठित टीमें संक्रमित पशुओं का इलाज करने में लगी हुई है। इसके अलावा गांव-गांव जाकर पशुपालन विभाग की टीमें लोगों को इसके प्रति जागरूक भी कर रही हैं।
वीरवार को कुमारहट्टी के साथ लगते क्षेत्र अन्हेच में विभाग की टीम ने पशुपालकों को लंपी के प्रति जागरूक किया। जिले में पशुपालन विभाग के पास गो प्रजाति के 1.60 लाख और 40,000 भैंसें पंजीकृत हैं।
उधर, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. बीबी गुप्ता ने बताया कि गांव-गांव जाकर स्वस्थ पशुओं की वैक्सीन के साथ पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है। 12,000 से अधिक पशुओं का टीकारण किया जा चुका है। विभाग ने 5,000 वैक्सीन की मांग दोबारा भेज दी है।
ये हैं लंपी रोग के लक्षण
- पशुओं को बहुत तेज बुखार आना
- आंख से लगातार पानी चलना
- भूख न लगना, दूध कम देना
- शरीर पर गांठें और जख्म बनना
ये हैं बचाव और रोकथाम के तरीके
- लंपी रोग से संक्रमित पशुओं को अलग कर दें
- पशुओं की समय-समय पर साफ करते रहें
- गोशाला में मक्खी, मच्छर न पनपने दें
- 106-107 तक बुखार आने पर डॉक्टर को सूचना दें
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सोलन। पशुओं में लंपी रोग के मामले और मौत का आंकड़ा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। जिला में अभी तक 255 पशुओं की मौत हो चुकी है। जबकि 6,362 संक्रमित हुए है। जबकि 3225 संक्रमित पशु रिकवर भी हुए हैं। रोजाना 15 से 20 पशुओं की मौत हो रही है।
इसमें सबसे अधिक संक्रमित मौत के मामले नालागढ़ और धर्मपुर उपमंडल से आ रहे हैं। पशुपालन विभाग ने स्वस्थ पशुओं की वैक्सीन कार्य को भी युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। इसके तहत तीन दिनों में पशुपालन खंड धर्मपुर, कुनिहार, कंडाघाट और नालागढ़ में 12,010 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
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जानकारी के अनुसार लंपी रोग कमजोर और पहले से किसी अन्य बीमारी से ग्रसित पशु इस रोग की चपेट में जल्दी आ रहे हैं। इसमें बहुत कमजोर पशुओं की मौत भी हो रही है। उपमंडल नालागढ़ और धर्मपुर के काबा, धारगुड़ा क्षेत्र से अधिक मामले आ रहे हैं।
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ये रोग सिर्फ गो प्रजाति के पशुओं में ही लग रहा है। इस रोग से भैंसों को कोई नुकसान पहुंचा है। विभाग की गठित टीमें संक्रमित पशुओं का इलाज करने में लगी हुई है। इसके अलावा गांव-गांव जाकर पशुपालन विभाग की टीमें लोगों को इसके प्रति जागरूक भी कर रही हैं।
वीरवार को कुमारहट्टी के साथ लगते क्षेत्र अन्हेच में विभाग की टीम ने पशुपालकों को लंपी के प्रति जागरूक किया। जिले में पशुपालन विभाग के पास गो प्रजाति के 1.60 लाख और 40,000 भैंसें पंजीकृत हैं।
उधर, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. बीबी गुप्ता ने बताया कि गांव-गांव जाकर स्वस्थ पशुओं की वैक्सीन के साथ पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है। 12,000 से अधिक पशुओं का टीकारण किया जा चुका है। विभाग ने 5,000 वैक्सीन की मांग दोबारा भेज दी है।
ये हैं लंपी रोग के लक्षण
- पशुओं को बहुत तेज बुखार आना
- आंख से लगातार पानी चलना
- भूख न लगना, दूध कम देना
- शरीर पर गांठें और जख्म बनना
ये हैं बचाव और रोकथाम के तरीके
- लंपी रोग से संक्रमित पशुओं को अलग कर दें
- पशुओं की समय-समय पर साफ करते रहें
- गोशाला में मक्खी, मच्छर न पनपने दें
- 106-107 तक बुखार आने पर डॉक्टर को सूचना दें