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मां की मृत्यु के बाद परिजनों ने की उनकी आंखे दान
Updated Fri, 12 Jan 2018 10:26 PM IST
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आंखें
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सुबाथू (सोलन)। दादी मां की कहानियां किसे नहीं गुदगुदातीं। बचपन में दादी के आंचल में सिमटकर कहानियां सुनना हर किसी को अच्छा लगता है। शाम ढली नहीं कि घुस आए दादी के आंचल में कहानियां सुनने। दादी की पोटली भी हर वक्त कहानियों से भरी रहती थीं। हालांकि इन कहानियां का कोई आधार नहीं होता था लेकिन एक दादी सच में ऐसी कहानी गढ़ गई जिसे कोई झुठला नहीं सकता। दादी इस संसार को अलविदा कहने से पहले एक ऐसा काम कर गई कि जिसे पूरा समाज उनकी दलेरी और समाजसेवा के लिए जानेगा। अब समाज में बाकी दादियां अपने पोते को इस दादी की कहानी भी सुना सकती हैं जो हकीकत में है।
यह दादी हैं सुबाथू क्षेत्र की रहने वाले सुलोचना देवी। संसार को इन्होंने शुक्रवार को अलविदा कह दिया लेकिन इस दुनिया से रुखसत होने से पहले अपनी दोनों आंखें दान कर गईं। सुलोचना देवी के पोते मनीष गुप्ता को फक्र है कि उनकी दादी की आंखें अब किसी की दुनिया रोशन करेंगी। आंखें निकाल ली गई हैं जल्द ही जरूरतमंद को ट्रांसप्लांट हो जाएंगी। सुबाथू क्षेत्र की सुलोचना देवी ने अपने जीते जी यह इच्छा जाहिर की थी कि उनके मरने के बाद उनकी आंखें दान कर दी जाएं। मरने के बाद उनके परिजनों ने उनकी यह आखिरी इच्छा पूरी की।
पीजीआई चंडीगढ़ के चिकित्सकों की मदद से उनकी आंखों को निकालकर सुरक्षित रख लिया है। सुलोचना (75) कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। शुक्रवार को चंडीगढ़ अस्पताल में अपने अंतिम पलों के दौरान सुलोचना देवी ने अपनी अंतिम इच्छा से दुनिया को मानव कल्याण का संदेश दिया है। सुलोचना के परिवार के सदस्य मनीष गुप्ता नेे बताया कि उनकी दादी कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं। शुक्रवार को ही चंडीगढ़ के अस्पताल में उनका निधन हो गया। बताया कि दादी की इच्छा अनुसार उनके निधन के बाद शुक्रवार को पीजीआई की विशेष टीम से संपर्क कर उन्हें दादी की अंतिम इच्छा बारे बताया गया। इसके बाद चिकित्सकों ने सुलोचना की दोनों आंखों को निकालकर सुरक्षित रख लिया है। अब यह आंखें किसी जरूरतमंद व्यक्ति को लगाई जाएंगी। मनीष ने कहा कि उन्हें खुशी होगी कि उनकी दादी की आंखों से कोई संसार देख पाएगा। दादी भले ही दुनिया से चली गई हों लेकिन किसी आंखें रोशन होने से वह हमेशा हमारे जहन में जिंदा रहेंगी। सुबाथू निवासी कैलाश चंद्र, किशन सहगल, रामेश्वर शर्मा और विनोद मारवाह ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए। उन्होंने सुलोचना देवी के नेत्रदान के फैसले को मानव कल्याण के हित में बताया।
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यह दादी हैं सुबाथू क्षेत्र की रहने वाले सुलोचना देवी। संसार को इन्होंने शुक्रवार को अलविदा कह दिया लेकिन इस दुनिया से रुखसत होने से पहले अपनी दोनों आंखें दान कर गईं। सुलोचना देवी के पोते मनीष गुप्ता को फक्र है कि उनकी दादी की आंखें अब किसी की दुनिया रोशन करेंगी। आंखें निकाल ली गई हैं जल्द ही जरूरतमंद को ट्रांसप्लांट हो जाएंगी। सुबाथू क्षेत्र की सुलोचना देवी ने अपने जीते जी यह इच्छा जाहिर की थी कि उनके मरने के बाद उनकी आंखें दान कर दी जाएं। मरने के बाद उनके परिजनों ने उनकी यह आखिरी इच्छा पूरी की।
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पीजीआई चंडीगढ़ के चिकित्सकों की मदद से उनकी आंखों को निकालकर सुरक्षित रख लिया है। सुलोचना (75) कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। शुक्रवार को चंडीगढ़ अस्पताल में अपने अंतिम पलों के दौरान सुलोचना देवी ने अपनी अंतिम इच्छा से दुनिया को मानव कल्याण का संदेश दिया है। सुलोचना के परिवार के सदस्य मनीष गुप्ता नेे बताया कि उनकी दादी कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं। शुक्रवार को ही चंडीगढ़ के अस्पताल में उनका निधन हो गया। बताया कि दादी की इच्छा अनुसार उनके निधन के बाद शुक्रवार को पीजीआई की विशेष टीम से संपर्क कर उन्हें दादी की अंतिम इच्छा बारे बताया गया। इसके बाद चिकित्सकों ने सुलोचना की दोनों आंखों को निकालकर सुरक्षित रख लिया है। अब यह आंखें किसी जरूरतमंद व्यक्ति को लगाई जाएंगी। मनीष ने कहा कि उन्हें खुशी होगी कि उनकी दादी की आंखों से कोई संसार देख पाएगा। दादी भले ही दुनिया से चली गई हों लेकिन किसी आंखें रोशन होने से वह हमेशा हमारे जहन में जिंदा रहेंगी। सुबाथू निवासी कैलाश चंद्र, किशन सहगल, रामेश्वर शर्मा और विनोद मारवाह ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए। उन्होंने सुलोचना देवी के नेत्रदान के फैसले को मानव कल्याण के हित में बताया।
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