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बारिश के बाद प्याज की पनीरी लगाएं किसान
Updated Tue, 12 Dec 2017 10:26 PM IST
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- फोटो : Getty Images
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नौणी (सोलन)। बारिश के बाद अब किसान प्याज की पनीरी खेतों में लगा सकते हैं। यह सलाह नौणी विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्याज की पनीरी अभी लगाने से इसमें पानी की पूर्ति बारिश से हो जाएगी। किसानों को एक खेत का पानी दूसरे खेत में न जाने देने की भी सलाह दी है।
नौणी विवि के डॉ. मोहन सिंह जॉगड़ा और डॉ. सतीश भारद्वाज ने बताया कि एक खेत का पानी दूसरे खेत में चले जाने से प्याज के पौधे बीमारी का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने फसलों में तेले की रोकथाम के लिए रोगोर या मैटासिस्टॉक्स 15 मिलीलीटर/15 लीटर पानी का छिड़काव करने की बात कही। कहा कि पौधों को पाले से बचाने के लिये सिंचाई करें तथा छोटे पौधों को पाले से बचाने के लिए घास और बोरी आदि से ढक लें। रोग और कीट ग्रस्त शाखाओं की काटछांट कर नष्ट कर दें।
मशरूम लगाने वाले किसान को वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि केसिंग परत पर कवक जाल पूरी तरह से फैल जाए तो कंपोस्ट का तापमान 16-18 डिग्री सेल्सियस तक ले आएं। कमरे में ताजी हवा का प्रवेश दिन में 3-4 बार 30-60 मिनट के लिए करवाएं। कमरे में आर्द्रता 80-90 प्रतिशत बनाए रखें। 7-10 दिन के बाद छोटे-छोटे पिन हैड बनने लगते हैं जो कि 4-5 दिनों में तोड़ने योग्य हो जाते हैं।
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पशुओं के थनों को गुनगुने पानी से धोएं
वैज्ञानिकों ने पशुपालकों को सलाह दी कि सर्दी के मौसम में पशुओं के थनों को दोहन से पूर्व गुनगुने पानी से धोकर साफ कपड़े से सुखाएं। थनैला रोग से बचाव के लिए दोहन के उपरांत पशु के थनों को आयडोफोर घोल में डुबोएं। पशुओं के इस्तेमाल के लिए बिछावन सामग्री को प्रतिदिन बदलें। दिन के समय में गौशाला का दरवाजा तथा खिड़कियां उचित वेंटिलेशन तथा फर्श के सुखाने के लिए खुला छोड़ दें।
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नौणी विवि के डॉ. मोहन सिंह जॉगड़ा और डॉ. सतीश भारद्वाज ने बताया कि एक खेत का पानी दूसरे खेत में चले जाने से प्याज के पौधे बीमारी का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने फसलों में तेले की रोकथाम के लिए रोगोर या मैटासिस्टॉक्स 15 मिलीलीटर/15 लीटर पानी का छिड़काव करने की बात कही। कहा कि पौधों को पाले से बचाने के लिये सिंचाई करें तथा छोटे पौधों को पाले से बचाने के लिए घास और बोरी आदि से ढक लें। रोग और कीट ग्रस्त शाखाओं की काटछांट कर नष्ट कर दें।
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मशरूम लगाने वाले किसान को वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि केसिंग परत पर कवक जाल पूरी तरह से फैल जाए तो कंपोस्ट का तापमान 16-18 डिग्री सेल्सियस तक ले आएं। कमरे में ताजी हवा का प्रवेश दिन में 3-4 बार 30-60 मिनट के लिए करवाएं। कमरे में आर्द्रता 80-90 प्रतिशत बनाए रखें। 7-10 दिन के बाद छोटे-छोटे पिन हैड बनने लगते हैं जो कि 4-5 दिनों में तोड़ने योग्य हो जाते हैं।
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पशुओं के थनों को गुनगुने पानी से धोएं
वैज्ञानिकों ने पशुपालकों को सलाह दी कि सर्दी के मौसम में पशुओं के थनों को दोहन से पूर्व गुनगुने पानी से धोकर साफ कपड़े से सुखाएं। थनैला रोग से बचाव के लिए दोहन के उपरांत पशु के थनों को आयडोफोर घोल में डुबोएं। पशुओं के इस्तेमाल के लिए बिछावन सामग्री को प्रतिदिन बदलें। दिन के समय में गौशाला का दरवाजा तथा खिड़कियां उचित वेंटिलेशन तथा फर्श के सुखाने के लिए खुला छोड़ दें।