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मां का बुरा हाल, बहन हो गई है बेसुध
Updated Thu, 21 Dec 2017 10:21 PM IST
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मां का बुरा हाल, बहन हो गई है बेसुध
फोटो सहित
इकलौता पुत्र हुआ देश के लिए कुर्बान
घर पर अब रह गए मां व बेटी
संतोष कुमार
नालागढ़ (सोलन)।
देश सेवा करते हुए नालागढ़ का एक लाल शहीद हो गया है। परिवार के इकलौते बेटे की शहादत के बाद मां का बुरा हाल है। बहन बेसुध हो गई है। शहीद शिव सिंह अविवाहित थे और घर के इकलौते पुत्र थे। वह अपने पीछे अपनी मां और दो बहनों को छोड़ गए हैं, जिसमें से एक बहन की शादी हो चुकी है, जबकि एक छोटी बहन घर में मां के साथ रहती है। उनके पिता गुरदयाल सिंह का पहले ही निधन हो गया है और घर में माता जसबीर कौर व बहन बिंदू अकेले ही रह गए हैं। शहीद शिव सिंह वर्ष 2009 में सेना में भर्ती हुए थे और वह 36 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे। जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम बनाने के लिए प्रयासरत सेना की ऑपरेशनल टीम के हिस्सा थे, जहां पर बीते मंगलवार को तीन सदस्यीय सैन्य टुकड़ी के गश्त के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आने से शहादत को प्राप्त हुए। आठ दिनों तक चले रेस्क्यू आपरेशन में उनका शव बर्फ में दबा मिला।
शहीद की याद में बने स्मारक
गुल्लरवाला करसौली पंचायत के प्रधान प्रेम सिंह ने कहा कि शहीद के परिवार को सभी सुविधाएं सरकार की ओर से मिले, वहीं शहीद के नाम पर पंचायत में कोई स्मारक बनाया जाए और इस क्षेत्र के स्कूल के नाम को भी उनके नाम पर रखकर उन्हें शहादत दी जाए।
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फोटो सहित
इकलौता पुत्र हुआ देश के लिए कुर्बान
घर पर अब रह गए मां व बेटी
संतोष कुमार
नालागढ़ (सोलन)।
देश सेवा करते हुए नालागढ़ का एक लाल शहीद हो गया है। परिवार के इकलौते बेटे की शहादत के बाद मां का बुरा हाल है। बहन बेसुध हो गई है। शहीद शिव सिंह अविवाहित थे और घर के इकलौते पुत्र थे। वह अपने पीछे अपनी मां और दो बहनों को छोड़ गए हैं, जिसमें से एक बहन की शादी हो चुकी है, जबकि एक छोटी बहन घर में मां के साथ रहती है। उनके पिता गुरदयाल सिंह का पहले ही निधन हो गया है और घर में माता जसबीर कौर व बहन बिंदू अकेले ही रह गए हैं। शहीद शिव सिंह वर्ष 2009 में सेना में भर्ती हुए थे और वह 36 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे। जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम बनाने के लिए प्रयासरत सेना की ऑपरेशनल टीम के हिस्सा थे, जहां पर बीते मंगलवार को तीन सदस्यीय सैन्य टुकड़ी के गश्त के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आने से शहादत को प्राप्त हुए। आठ दिनों तक चले रेस्क्यू आपरेशन में उनका शव बर्फ में दबा मिला।
शहीद की याद में बने स्मारक
गुल्लरवाला करसौली पंचायत के प्रधान प्रेम सिंह ने कहा कि शहीद के परिवार को सभी सुविधाएं सरकार की ओर से मिले, वहीं शहीद के नाम पर पंचायत में कोई स्मारक बनाया जाए और इस क्षेत्र के स्कूल के नाम को भी उनके नाम पर रखकर उन्हें शहादत दी जाए।
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