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जिला में फलदार फसलों पर कहर बरपा रहा है कोहरा
Updated Mon, 29 Jan 2018 10:49 PM IST
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कड़ाके की ठंड के बीच पड़ रहे कोहरे से सूखने लगे फलदार पौधे, गेहूं और मटर की फसल पड़ने लगी पीली
7000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है बागवानी
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन।
कड़ाके की ठंड के बीच कोहरे के कहर ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। कोहरे के कारण फलदार पौधे जहां सूख रहे हैं वहीं मटर और गेहूं की फसल पीली पड़ना शुरू हो गई है। जिले में कृषि और बागवानी से हजारों परिवार सीधे रूप से जुड़े हैं। यहां अरबों रुपये का नकदी फसलों और फलों का कारोबार होता है। लेकिन कोहरे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
कोहरे से सबसे अधिक नुकसान नालागढ़, कुनिहार, धर्मपुर और कंडाघाट ब्लॉक में हो रहा है। बागवानों को आशंका है कि उनके पौधे इस बार कोहरे से बर्बाद हो जाएंगे। आलम यह है कि पॉली हाउस के अंदर भी नकदी फसलें कोहरे के प्रकोप से बचाना किसानों के लिए मुश्किल हो गई हैं। कोहरा पॉलीहाउस के भीतर लगी फसलों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। कोहरे के कारण जिले के कुनिहार विकास खंड के पिपलूघाट, दाड़लाघाट, नवगांव, डूमैहर, भूमति, पलोग, अर्की, मांझू में कोहरा ज्यादा नुकसान कर रहा है। धर्मपुर के पट्टा महलोग, गोयला, दिग्गल, जोघों, रामशहर, मानपुर, ढांग नंदपुर व नालागढ़, सोलन के कक्कड़हट्टी व सुबाथू और कंडाघाट ब्लॉक के सायरी, ममलीग, छौशा क्षेत्र में भी कोहरा ज्यादा कहर बरपाता है।
सोलन जिले में बागवानी फसलों के अधीन 7000 हेक्टेयर भूमि आती है। जिले में हर साल 5000 मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है। वर्ष 2016-17 में कोहरे से जिले में अमरूद, आंवला, केला और नींबू प्रजाति के पौधों सहित आम तथा पपीते के पौधे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। यहां 500 मीट्रिक टन फल कोहरे से बर्बाद हुए थे। इससे यहां 25 लाख का नुकसान हुआ था। यही नहीं कोहरे से फलों की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। जिले में आम की फसलों को कोहरे से सबसे ज्यादा नुकसान होता है। यहां 200 हेक्टेयर भूमि पर आम की फसल होती है। बागवानी विभाग ने इस बार बरसात के सीजन में 50 हजार फलदार पौधे लगाए हैं। इन पौधों को कोहरे से बचाना किसानों और बागवानों के लिए अब चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार जिले में कोहरा दिसंबर से पड़ना शुरू हो जाता है। कोहरा तब पड़ता है, जब आसमान बिल्कुल साफ हो।
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बागवान ऐसे करें पौधों का बचाव
हॉर्टीकल्चर विभाग के को डिप्टी डायरेक्टर डॉ. बीएस गुलेरिया ने बागवानों को सलाह दी है कि वर्षाकालीन फलदार छोटे पौधों को पाले से बचाकर रखें। इसके लिए घास सरकंडों या सूखी मक्की के डंठल का पौधों के ऊपर छप्पर बनाएं। यह छप्पर दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर खुला रखें ताकि पौधों को पर्याप्त धूप मिलती रहे। आम की नर्सरी कोहरे से बुरी तरह प्रभावित होती है। इसके अलावा पौधशाला को नाईलोन की छायादार जाली (50 फीसदी छाया वाली) से 15 फरवरी तक ढक कर रखें। सभी फलदार पौधों की हल्की सिंचाई करते रहें और सूखी घास जलाकर धुआं करते रहें।
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7000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है बागवानी
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन।
कड़ाके की ठंड के बीच कोहरे के कहर ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। कोहरे के कारण फलदार पौधे जहां सूख रहे हैं वहीं मटर और गेहूं की फसल पीली पड़ना शुरू हो गई है। जिले में कृषि और बागवानी से हजारों परिवार सीधे रूप से जुड़े हैं। यहां अरबों रुपये का नकदी फसलों और फलों का कारोबार होता है। लेकिन कोहरे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
कोहरे से सबसे अधिक नुकसान नालागढ़, कुनिहार, धर्मपुर और कंडाघाट ब्लॉक में हो रहा है। बागवानों को आशंका है कि उनके पौधे इस बार कोहरे से बर्बाद हो जाएंगे। आलम यह है कि पॉली हाउस के अंदर भी नकदी फसलें कोहरे के प्रकोप से बचाना किसानों के लिए मुश्किल हो गई हैं। कोहरा पॉलीहाउस के भीतर लगी फसलों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। कोहरे के कारण जिले के कुनिहार विकास खंड के पिपलूघाट, दाड़लाघाट, नवगांव, डूमैहर, भूमति, पलोग, अर्की, मांझू में कोहरा ज्यादा नुकसान कर रहा है। धर्मपुर के पट्टा महलोग, गोयला, दिग्गल, जोघों, रामशहर, मानपुर, ढांग नंदपुर व नालागढ़, सोलन के कक्कड़हट्टी व सुबाथू और कंडाघाट ब्लॉक के सायरी, ममलीग, छौशा क्षेत्र में भी कोहरा ज्यादा कहर बरपाता है।
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सोलन जिले में बागवानी फसलों के अधीन 7000 हेक्टेयर भूमि आती है। जिले में हर साल 5000 मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है। वर्ष 2016-17 में कोहरे से जिले में अमरूद, आंवला, केला और नींबू प्रजाति के पौधों सहित आम तथा पपीते के पौधे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। यहां 500 मीट्रिक टन फल कोहरे से बर्बाद हुए थे। इससे यहां 25 लाख का नुकसान हुआ था। यही नहीं कोहरे से फलों की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। जिले में आम की फसलों को कोहरे से सबसे ज्यादा नुकसान होता है। यहां 200 हेक्टेयर भूमि पर आम की फसल होती है। बागवानी विभाग ने इस बार बरसात के सीजन में 50 हजार फलदार पौधे लगाए हैं। इन पौधों को कोहरे से बचाना किसानों और बागवानों के लिए अब चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार जिले में कोहरा दिसंबर से पड़ना शुरू हो जाता है। कोहरा तब पड़ता है, जब आसमान बिल्कुल साफ हो।
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बागवान ऐसे करें पौधों का बचाव
हॉर्टीकल्चर विभाग के को डिप्टी डायरेक्टर डॉ. बीएस गुलेरिया ने बागवानों को सलाह दी है कि वर्षाकालीन फलदार छोटे पौधों को पाले से बचाकर रखें। इसके लिए घास सरकंडों या सूखी मक्की के डंठल का पौधों के ऊपर छप्पर बनाएं। यह छप्पर दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर खुला रखें ताकि पौधों को पर्याप्त धूप मिलती रहे। आम की नर्सरी कोहरे से बुरी तरह प्रभावित होती है। इसके अलावा पौधशाला को नाईलोन की छायादार जाली (50 फीसदी छाया वाली) से 15 फरवरी तक ढक कर रखें। सभी फलदार पौधों की हल्की सिंचाई करते रहें और सूखी घास जलाकर धुआं करते रहें।