{"_id":"5a79daf44f1c1b514a8b7c76","slug":"131517935348-solan-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ससुर ने करवाए बहू के सात फेरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ससुर ने करवाए बहू के सात फेरे
Updated Tue, 06 Feb 2018 10:27 PM IST
विज्ञापन
कानपुर में निकाह और विवाह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दाड़लाघाट (सोलन)। सामाजिक कुरीतियों की बेड़ियां जागरूकता और शिक्षा की लौ से पिघलने लगी हैं। समाज को बदलने में युवा ही नहीं बल्कि बुजुर्ग भी साहसी कदम उठा रहे हैं। ऐसे ही बुजुर्ग हैं मांगल पंचायत के बागा गांव के सुखराम। उन्होंने अपनी बहू का दोबारा विवाह करवाकर समाज के बीच एक मिसाल कायम की है। बेटे की मौत के बाद जवान बहू का न केवल दोबारा विवाह करवाया बल्कि उसके दूल्हे को भी गोद ले लिया। सुखराम ने समाज को संदेश दिया है कि हर किसी को अपनी जिंदगी अपने अंदाज में जीने का हक है।
जानकारी के अनुसार मांगल पंचायत के बागा गांव के वार्ड नंबर एक के सुखराम चंदेल ने अपने बेटे की शादी बड़े धूमधाम से तारादेवी (22) से करवाई थी। लेकिन लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। शादी के कुछ साल बाद ही उनके बेटे की एक दुर्घटना में मौत हो गई। तारादेवी का हालांकि एक दो साल बेटा कार्तिक भी है। लेकिन सुखराम का तारादेवी का सहन नहीं हो पाया। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों को बंदिश की परवाह न करते हुए बहू की शादी दोबारा करवाने का फैसला लिया तथा वर की तलाश शुरू की। इसी बीच उन्होंने बहू का रिश्ता संतोष कुमार (32) से तय कर दिया। संतोष को सुखराम ने जब बहू की पूरी कहानी सुनाई तो वह शादी के लिए तैयार हो गया। सुखराम चंदेल ने अपनी पुत्र की मारकंड में दोबारा शादी करवा दी। इस शादी से जहां तारादेवी को सहारा मिल गया वहीं कार्तिक को पिता की छांव तथा सुखराम को संतोष के रूप में दोबारा अपना बेटा वापस मिल गया। संतोष अब सुखराम के घर ही रहेगा। सुखराम के घर से बहू विदा हुई लेकिन सात फेरे लेकर फिर घर लौट आई है अपने दूल्हे के संग। इससे घर में दोबारा से खुशी का माहौल है।
सुखराम ने बताया कि परिवार को जितना दु:ख पुत्र के खोने का था उतना ही कम उम्र में ही बहु के विधवा होने का भी था। परिजनों ने बहू को अपनी बेटी से बढ़कर चाहा। उन्होंने कहा कि बेटे की मौत के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि वह बहू की दोबारा शादी करवाएंगे। अब बहू की शादी होने से वह सुखी हैं तथा उन्हें किसी प्रकार की चिंता नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार मांगल पंचायत के बागा गांव के वार्ड नंबर एक के सुखराम चंदेल ने अपने बेटे की शादी बड़े धूमधाम से तारादेवी (22) से करवाई थी। लेकिन लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। शादी के कुछ साल बाद ही उनके बेटे की एक दुर्घटना में मौत हो गई। तारादेवी का हालांकि एक दो साल बेटा कार्तिक भी है। लेकिन सुखराम का तारादेवी का सहन नहीं हो पाया। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों को बंदिश की परवाह न करते हुए बहू की शादी दोबारा करवाने का फैसला लिया तथा वर की तलाश शुरू की। इसी बीच उन्होंने बहू का रिश्ता संतोष कुमार (32) से तय कर दिया। संतोष को सुखराम ने जब बहू की पूरी कहानी सुनाई तो वह शादी के लिए तैयार हो गया। सुखराम चंदेल ने अपनी पुत्र की मारकंड में दोबारा शादी करवा दी। इस शादी से जहां तारादेवी को सहारा मिल गया वहीं कार्तिक को पिता की छांव तथा सुखराम को संतोष के रूप में दोबारा अपना बेटा वापस मिल गया। संतोष अब सुखराम के घर ही रहेगा। सुखराम के घर से बहू विदा हुई लेकिन सात फेरे लेकर फिर घर लौट आई है अपने दूल्हे के संग। इससे घर में दोबारा से खुशी का माहौल है।
विज्ञापन
सुखराम ने बताया कि परिवार को जितना दु:ख पुत्र के खोने का था उतना ही कम उम्र में ही बहु के विधवा होने का भी था। परिजनों ने बहू को अपनी बेटी से बढ़कर चाहा। उन्होंने कहा कि बेटे की मौत के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि वह बहू की दोबारा शादी करवाएंगे। अब बहू की शादी होने से वह सुखी हैं तथा उन्हें किसी प्रकार की चिंता नहीं है।
विज्ञापन