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क्षेत्रीय अस्पताल में बच्चों का नहीं हो रहा इलाज
Updated Sat, 04 Nov 2017 10:38 PM IST
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सोलन। स्वास्थ्य विभाग के फैसले से क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में बच्चों का इलाज बंद हो गया है। ऊना से तबादला होने के बाद अस्पताल में ड्यूटी ज्वाइन करने वाले बाल रोग विशेषज्ञ वापस चले गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें डेपुटेशन पर ऊना लगा दिया है जबकि उनका वेतन सोलन से निकल रहा है। सोलन अस्पताल में इस समय एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। यहां तैनात दो बाल रोग विशेषज्ञ में से एक का शिमला तबादला हो चुका है। एक अन्य हादसे का शिकार होने के बाद पीजीआई चंडीगढ़ में दाखिल है। इसके चलते सोलन में इन दिनों बीमार बच्चों का उपचार नहीं हो रहा है। यही नहीं जो बच्चे अस्पताल लाए जा रहे हैं उन्हें चिकित्सक दूसरे अस्पताल में रेफर कर रहे हैं।
अन्य निजी अस्पताल में बच्चों का उपचार करवाने के लिए विवश हैं। सोलन अस्पताल में शिशु रोग वार्ड पूरी तरह से खाली पड़ा है। दूरदराज से आने वाले लोगों को मायूस होकर घरों को लौटना पड़ रहा है। आचार संहिता से पूर्व ऊना से बाल रोग विशेषज्ञ को क्षेत्रीय अस्पताल सोलन भेजा था। यहां ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद संबंधित चिकित्सक डेपुटेशन पर वापस ऊना चले गए। उनके जाने से यहां बाल रोग विशेषज्ञ का पद पूरी तरह से खाली हो गया और अब चुनावी बेला में लोगों को गंभीर संकट झेलना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि विशेषज्ञ को ऊना भेजने का फैसला ऊपरी स्तर पर हुआ है। इसके सिर्फ लिखित आदेश ही सोलन अस्पताल भेजे थे। इन्हें स्वीकार करते हुए सोलन अस्पताल प्रबंधन ने विशेषज्ञ को ऊना जाने की इजाजत दे दी। अब यह विशेषज्ञ पिछले एक माह का वेतन सोलन स्वास्थ्य विभाग से ले चुके हैं।
आदेश मिले थे उन पर अमल किया : एमएस
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. महेश गुप्ता ने कहा कि सोलन अस्पताल में ऊना से आए बाल रोग विशेषज्ञ डेपोटेशन पर चल रहे हैं। ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद उन्हें ऊना भेजने के लिए आदेश मिले थे। इस पर अमल करते हुए अस्पताल प्रबंधन ने निर्णय लिया है। भविष्य में जो भी दूसरे आदेश मिलेंगे उन पर अमल किया जाएगा।
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घर लौट रहे मायूस परिजन
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में बच्चे सिर्फ ओपीडी में देखे जा रहे हैं। कोई गंभीर बीमारी पाए जाने पर उन्हें तुरंत दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ न होने की वजह से वार्ड भी खाली पड़े हैं। बच्चों को दूरदराज से उपचार के लिए ला रहे परिजन मायूस होकर घरों को लौट रहे हैं।
पहले थे दो अब एक भी नहीं
सोलन अस्पताल में चुनाव आचार संहिता से कुछ माह पूर्व तक दो बाल रोग विशेषज्ञ थे। इनमें से एक हादसे का शिकार होने की वजह से पीजीआई में हैं। दूसरा का शिमला ट्रांसफर हो चुका है और जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी थी वे ऊना डेपुटेशन पर चले गए हैं।
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अन्य निजी अस्पताल में बच्चों का उपचार करवाने के लिए विवश हैं। सोलन अस्पताल में शिशु रोग वार्ड पूरी तरह से खाली पड़ा है। दूरदराज से आने वाले लोगों को मायूस होकर घरों को लौटना पड़ रहा है। आचार संहिता से पूर्व ऊना से बाल रोग विशेषज्ञ को क्षेत्रीय अस्पताल सोलन भेजा था। यहां ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद संबंधित चिकित्सक डेपुटेशन पर वापस ऊना चले गए। उनके जाने से यहां बाल रोग विशेषज्ञ का पद पूरी तरह से खाली हो गया और अब चुनावी बेला में लोगों को गंभीर संकट झेलना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि विशेषज्ञ को ऊना भेजने का फैसला ऊपरी स्तर पर हुआ है। इसके सिर्फ लिखित आदेश ही सोलन अस्पताल भेजे थे। इन्हें स्वीकार करते हुए सोलन अस्पताल प्रबंधन ने विशेषज्ञ को ऊना जाने की इजाजत दे दी। अब यह विशेषज्ञ पिछले एक माह का वेतन सोलन स्वास्थ्य विभाग से ले चुके हैं।
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आदेश मिले थे उन पर अमल किया : एमएस
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. महेश गुप्ता ने कहा कि सोलन अस्पताल में ऊना से आए बाल रोग विशेषज्ञ डेपोटेशन पर चल रहे हैं। ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद उन्हें ऊना भेजने के लिए आदेश मिले थे। इस पर अमल करते हुए अस्पताल प्रबंधन ने निर्णय लिया है। भविष्य में जो भी दूसरे आदेश मिलेंगे उन पर अमल किया जाएगा।
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घर लौट रहे मायूस परिजन
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में बच्चे सिर्फ ओपीडी में देखे जा रहे हैं। कोई गंभीर बीमारी पाए जाने पर उन्हें तुरंत दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ न होने की वजह से वार्ड भी खाली पड़े हैं। बच्चों को दूरदराज से उपचार के लिए ला रहे परिजन मायूस होकर घरों को लौट रहे हैं।
पहले थे दो अब एक भी नहीं
सोलन अस्पताल में चुनाव आचार संहिता से कुछ माह पूर्व तक दो बाल रोग विशेषज्ञ थे। इनमें से एक हादसे का शिकार होने की वजह से पीजीआई में हैं। दूसरा का शिमला ट्रांसफर हो चुका है और जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी थी वे ऊना डेपुटेशन पर चले गए हैं।