फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   मुद्दा : राजनीतिक पेज लोकल के लिए

500 मीटर पर दो अस्पताल बनाए, सुविधाएं दी नहीं

Sat, 21 Oct 2017 02:56 PM IST
Updated Sat, 21 Oct 2017 02:56 PM IST
विज्ञापन
सतवीर सिंह
विज्ञापन

कंडाघाट(सोलन)। राजनीति में रसूख का असर देखिए, पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में बना अस्पताल पसंद नहीं आया तो नवनिर्माण छेड़ दिया गया। करोड़ों की बेजान इमारत से कुछ ही दूरी पर दूसरा भवन बना दिया। हालांकि पहले से बने अस्पताल में न पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही स्टाफ। कांग्रेस सरकार ने सुविधाएं देने की बजाय नए अस्पताल के निर्माण को तरजीह दी।
भाजपा सरकार ने 2012 में कंडाघाट में तीन करोड़ 68 लाख से बने दस बिस्तर के अस्पताल का उद्घाटन किया। चुनाव के बाद भाजपा की सरकार चली गई। लोग अस्पताल का स्तर बढ़ाने और सुविधाएं देने की मांग करते रहे। इस के बाद आई कांग्रेस सरकार ने महज पांच साल पहले बने अस्पताल को दरकिनार कर करीब सात करोड़ से बनने वाले 50 बिस्तरों के अस्पताल की आधारशिला रख दी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने खुद इसका शिलान्यास किया है।
विज्ञापन

कंडाघाट के इस राजनीतिक खेल में नए भवन को पुराने भवन के साथ जोड़कर नहीं बनाया गया। बल्कि दोनों भवनों के बीच करीब आधे किलोमीटर का फासला है। लोग अस्पताल में सुविधा की मांग कर रहे थे जबकि सरकार ने नया अस्पताल ही बना दिया। अब नया अस्पताल तो बन गया है लेकिन मरीजों को सुविधाएं न होने के कारण फिर सोलन और शिमला जाना पड़ रहा हैं। हालांकि दोनों अस्पताल भवनों में 60 बिस्तरों का बंदोबस्त होगा। मजेदार बात ये है कि दोनों अस्पतालों को चलाने के लिए अलग-अलग स्टाफ की जरूरत पड़ेगी। आधे किलोमीटर के फासले को मरीज आसानी से पूरा नहीं कर पाएंगे। ये तमाम बातें हैं जिन्हें नए भवन के शिलान्यास मौके पर नजरअंदाज किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

राजनीति की भेंट चढ़ा अस्पताल
स्थानीय निवासी रमेश ठाकुर ने बताया कि जहां पर इस समय अस्पताल है। उसको अधिक बिस्तर वाला बनाया जा सकता था। इसके बावजूद अस्पताल राजनीति की भेंट चढ़ गया। नए अस्पताल को बनाना जनता के पैसे का दुरुपयोग है। पुराने कोर्ट रोड पर जहां पर पहले अस्पताल हुआ करता था। वहां पर न तो रोगी वाहन के जाने का सही रास्ता है, साथ ही यहां पर हर समय जाम की समस्या बनी रहती है। यही नहीं ये स्थान ठंड भी है।
सरकारी और लोगों के पैसों की हो रही बर्बादी
कारोबारी योगेश ने कहा कि मिनी सचिवालय के नजदीक ही अस्पताल को बड़ा बनाया जा सकता था। स्टाफ की भर्ती की जाना जरूरी था। लेकिन ओल्ड कोर्ट रोड पर करोड़ों की लागत से बनाए जा रहे अस्पताल पर पैसा लगाना जनता के पैसे की सरासर बर्बादी है। जो अस्पताल बना है वहीं पर ईएनटी ओपीडी बनाई जाती। डिजिटल एक्स रे जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती, स्पेशलिस्ट उपलब्ध करवाए जाते तो बेहतर होता।
एक ही छत के नीचे दे सकते थे स्वास्थ्य सुविधा
वरिष्ठ नागरिक जय सिंह भारद्वाज ने बताया कि पहले से ही अस्पताल के होते हुए नए अस्पताल को बनाने का कोई भी औचित्य नहीं था। करोड़ो अस्पताल के निर्माण पर लगाए जा रहे हैं। जबकि वहीं पर इस पैसे से बने हुए अस्पताल को बढ़ाया जा सकता था। इसमें लोगों को एक ही छत के नीचे बेहतर सुविधाएं दी जा सकती थी।
50 बिस्तरों की सुविधा मिलेगी : शांडिल
मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल का कहना है कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए यह निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। भविष्य में कंडाघाट में एक साथ 50 मरीजों को रखने की व्यवस्था होगी। बिस्तर बढ़ेंगे तो जाहिर है डॉक्टर और दूसरा स्टाफ भी तैनात होगा।

फिजूलखर्ची कर रही कांग्रेस : पवन गुप्ता
भाजपा के जिलाध्यक्ष पवन गुप्ता का कहना है कि कांग्रेस फिजूलखर्ची पर ध्यान दे रही है। बेहतर होता कंडाघाट के अस्पताल को ही सुविधा संपन्न किया जाता। ताकि लोगों को शिमला या सोलन जाने के लिए मजबूर न होना पड़ता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed