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तारादेवी मंदिर मार्ग निर्माण लटका
Updated Sun, 07 Jan 2018 10:58 PM IST
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धन के अभाव में नहीं हो पा रही मेटलिंग और टारिंग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
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नालागढ़ (सोलन)।
मां तारादेवी मंदिर का मार्ग आज भी कच्चा है। मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को आज भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तारादेवी मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग का कार्य लोनिवि ने एमएनपी फंड से करवाना शुरू किया, जिसके तहत मात्र कलवर्ट और सोलिंग ही हो सकी है और उसके बाद इस मार्ग का कार्य अधर में लटक गया है।
नालागढ़-बारियां मार्ग से मंदिर के लिए जाने वाला मार्ग धन के अभाव में आज भी कच्चा है। लोगों को आज भी धूल मिट्टी के गुबारों से जूझते हुए मंदिर तक पहुंचना पड़ता है। 600 मीटर के कच्चे मार्ग की मेटलिंग और टारिंग का काम नहीं हो सका है। नालागढ़ शहर से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित तारादेवी मंदिर में श्रद्धालु सड़क और पगडंडी के रास्ते से मां तारा देवी के दर शीश नवाने पहुंचते हैं। तारादेवी मंदिर के आसपास एकांत वातावरण है। यहां से नालागढ़ नगर के विहंगम दृश्य के साथ-साथ कसौली, ऊंची चोटी पर स्थित माता नयना देवी तथा पड़ोसी राज्य पंजाब के मैदानी भाग साफ दिखाई देते हैं। वाहन योग्य बनाए मार्ग की हालत खस्ता होने के कारण इस पर वाहन चलाना किसी मुसीबत से कम नहीं है। मार्ग आज भी कच्चा है। इससे धूल मिट्टी के उड़ते गुबार मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं की परेशानी का सबब बने हुए हैं। मंदिर में वैसे तो प्रतिदिन लोगों की आवाजाही लगी रहती है, लेकिन यहां पर नवरात्रों और नववर्ष के आगाज पर महामाई का जागरण का भव्य आयोजन होता है, जिसमें भारी तादात में श्रद्धालु मंदिर का रुख करते हैं।
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प्रथम चरण का कार्य पूरा : विभाग
लोक निर्माण विभाग नालागढ़ मंडल के एसडीओ आरएस कटवाल ने कहा कि तारादेवी मंदिर मार्ग का एमएनपी फंड से मिली धनराशि से प्रथम चरण का कार्य कर लिया है। बजट का प्रावधान होते ही दूसरे चरण में मेटलिंग और टारिंग करवाई जाएगी।
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प्रावधान करेंगे : राणा
हलके के नवनिर्वाचित विधायक लखविंदर राणा ने कहा कि तारादेवी मंदिर ऐतिहासिक और प्राचीन है। मंदिर तक जाने वाले मार्ग को पक्का करवाने के लिए बजट का प्रावधान करवाया जाएगा।
1645 में हुई मां तारादेवी मंदिर की स्थापना
धरोहरों के जानकार सुरजीत डंडोरा के मुताबिक नालागढ़ राजघराने से ताल्लुक रखने वाले तत्कालीन बिलासपुर के राजा ताराचंद ने 1645 में नालागढ़ में तारा देवी मंदिर की स्थापना की थी, जो रियासत के पूर्व राजा विजयेंद्र सिंह के पूर्वज राजा शिशुपाल के वंशज थे। उन्होंने चंदेरी से आकर नालागढ़ पर शासन किया और मां तारा देवी की मूर्ति स्थापित की। लगभग दो सौ वर्ष पूर्व नालागढ़ की महारानी ने इस जगह मंदिर भवन का निर्माण कराया था।