{"_id":"5cbca2c7bdec22141d1a01ee","slug":"111555866311-solan-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेताओं के भाषण तक ही सीमित रहा टमाटर के समर्थन मूल्य का मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नेताओं के भाषण तक ही सीमित रहा टमाटर के समर्थन मूल्य का मामला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। हर साल करोड़ो रुपये का टमाटर कारोबार करने वाले जिले के किसानों को कई दशक बीतने के बाद भी अभी तक टमाटर का समर्थन मूल्य नहीं मिल पाया है। विधान सभा या लोकसभा चुनाव आने से पहले राजनैतिक पार्टियां किसानों को अपने भाषण यह आश्वासन जरूर दिया जाता है।
हालांकि, उन्हें संबंधित पार्टी का सत्ता में आने के बाद सेब की तर्ज पर टमाटर का समर्थन मूल्य दिया जाएगा। लेकिन सरकार के सत्ता में आने के बाद ही यह बात सिर्फ नेताओं के भाषण तक ही सीमित रह जाती है। इस कारण कई दफा किसानों को अपनी टमाटर की फसल एक रुपये किलो के हिसाब से बेचनी पड़ती है।
इससे किसानों को उनकी मजदूरी सहित अन्य गाड़ियों का किराया भी पूरा नहीं हो पाता। सोलन के किसानों ने कई दफा टमाटर के समर्थन मूल्य की मांग सत्ता में आने वाली सरकारों के समक्ष रखी है, इसके बावजूद वह आज तक पूरी नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
सोलन में होता है करोड़ो रुपये का कारोबार
जिले में करीब 90 प्रतिशत किसान की आय का मुख्य साधन टमाटर की फसल है। अब जरूरत के हिसाब से सोलन में टमाटर की फसल का उत्पादन भी बढ़ा है। सोलन सब्जी मंडी अकेले सोलन के टमाटर से करोड़ों रुपये का कारोबार होता है जबकि पूरे हिमाचल में यह संख्या अरबों में पहुंच जाती है। किसानों को उनकी फसल का समर्थन मूल्य ही नहीं मिलता। मजबूरन उन्हें बिचौलियों के पास कौड़ियों के दाम अपनी फसल को बेचना पड़ता है।
4500 हेक्टेयर भूमि पर होती है टमाटर की खेती
सोलन में करीब 4500 हेक्टेयर भूमि पर टमाटर की खेती की जाती है। सोलन के किसानों टमाटर बाहरी राज्यों जैसे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, करनाल में भी जाता है जहां हर साल सोलन के टमाटर की काफी अधिक मांग भी रहती है। सोलन का टमाटर पाकिस्तान तक भी पहुंचते रहे हैं। वहीं सोलन के कई किसान टमाटर की फसल पर ही निर्भर है जिससे वह अपना और अपने परिवार का लालन-पोषण कर रहे हैं।
टमाटर को नहीं मिल सकता समर्थन मूल्य
कांग्रेस जिला अध्यक्ष शिव कुमार ने बताया कि उनकी सरकार जब सता में थी तो किसानों को टमाटर के समर्थन मूल्य मिलने पर विचार-विमर्श किया था। टमाटर से संबंधित विशेषज्ञों से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि टमाटर तीन से चार दिन तक ही टिक सकता है। इसे लेकर समर्थन मूल्य नहीं मिल सकता है। किसानों को टमाटर के सही दाम देने के लिए टमाटर से संबधित उद्योग को स्थापित करने का निर्णय लिया था। इसमें टमाटर को एक ही दाम पर खरीदा जाना था।
समर्थन मूल्य को लेकर सरकार दिया है आश्वासन
भाजपा जिला किसान मोर्चा के अध्यक्ष सुंदरम ठाकुर ने बताया कि किसानों को टमाटर के समर्थन मूल्य मिलने को लेकर प्रदेश सरकार से मांग की गई है। इसे लेकर सरकार ने आश्वासन भी दिया है। इसके अलावा किसानों के टमाटर को उचित दाम मिलने के लिए सोलन के धर्मपुर क्षेत्र में एक टमाटर से संबंधित यूनिट भी लगाई जा रही है। इसमें टमाटर से सॉस, जैम सहित अन्य वस्तुएं तैयार की जाएंगी। इसके लिए प्रदेश सरकार काम कर रही है।
विज्ञापन
सोलन। हर साल करोड़ो रुपये का टमाटर कारोबार करने वाले जिले के किसानों को कई दशक बीतने के बाद भी अभी तक टमाटर का समर्थन मूल्य नहीं मिल पाया है। विधान सभा या लोकसभा चुनाव आने से पहले राजनैतिक पार्टियां किसानों को अपने भाषण यह आश्वासन जरूर दिया जाता है।
हालांकि, उन्हें संबंधित पार्टी का सत्ता में आने के बाद सेब की तर्ज पर टमाटर का समर्थन मूल्य दिया जाएगा। लेकिन सरकार के सत्ता में आने के बाद ही यह बात सिर्फ नेताओं के भाषण तक ही सीमित रह जाती है। इस कारण कई दफा किसानों को अपनी टमाटर की फसल एक रुपये किलो के हिसाब से बेचनी पड़ती है।
विज्ञापन
इससे किसानों को उनकी मजदूरी सहित अन्य गाड़ियों का किराया भी पूरा नहीं हो पाता। सोलन के किसानों ने कई दफा टमाटर के समर्थन मूल्य की मांग सत्ता में आने वाली सरकारों के समक्ष रखी है, इसके बावजूद वह आज तक पूरी नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
सोलन में होता है करोड़ो रुपये का कारोबार
जिले में करीब 90 प्रतिशत किसान की आय का मुख्य साधन टमाटर की फसल है। अब जरूरत के हिसाब से सोलन में टमाटर की फसल का उत्पादन भी बढ़ा है। सोलन सब्जी मंडी अकेले सोलन के टमाटर से करोड़ों रुपये का कारोबार होता है जबकि पूरे हिमाचल में यह संख्या अरबों में पहुंच जाती है। किसानों को उनकी फसल का समर्थन मूल्य ही नहीं मिलता। मजबूरन उन्हें बिचौलियों के पास कौड़ियों के दाम अपनी फसल को बेचना पड़ता है।
4500 हेक्टेयर भूमि पर होती है टमाटर की खेती
सोलन में करीब 4500 हेक्टेयर भूमि पर टमाटर की खेती की जाती है। सोलन के किसानों टमाटर बाहरी राज्यों जैसे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, करनाल में भी जाता है जहां हर साल सोलन के टमाटर की काफी अधिक मांग भी रहती है। सोलन का टमाटर पाकिस्तान तक भी पहुंचते रहे हैं। वहीं सोलन के कई किसान टमाटर की फसल पर ही निर्भर है जिससे वह अपना और अपने परिवार का लालन-पोषण कर रहे हैं।
टमाटर को नहीं मिल सकता समर्थन मूल्य
कांग्रेस जिला अध्यक्ष शिव कुमार ने बताया कि उनकी सरकार जब सता में थी तो किसानों को टमाटर के समर्थन मूल्य मिलने पर विचार-विमर्श किया था। टमाटर से संबंधित विशेषज्ञों से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि टमाटर तीन से चार दिन तक ही टिक सकता है। इसे लेकर समर्थन मूल्य नहीं मिल सकता है। किसानों को टमाटर के सही दाम देने के लिए टमाटर से संबधित उद्योग को स्थापित करने का निर्णय लिया था। इसमें टमाटर को एक ही दाम पर खरीदा जाना था।
समर्थन मूल्य को लेकर सरकार दिया है आश्वासन
भाजपा जिला किसान मोर्चा के अध्यक्ष सुंदरम ठाकुर ने बताया कि किसानों को टमाटर के समर्थन मूल्य मिलने को लेकर प्रदेश सरकार से मांग की गई है। इसे लेकर सरकार ने आश्वासन भी दिया है। इसके अलावा किसानों के टमाटर को उचित दाम मिलने के लिए सोलन के धर्मपुर क्षेत्र में एक टमाटर से संबंधित यूनिट भी लगाई जा रही है। इसमें टमाटर से सॉस, जैम सहित अन्य वस्तुएं तैयार की जाएंगी। इसके लिए प्रदेश सरकार काम कर रही है।