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Himachal Pradesh: लाहौल स्पीति में कड़ाके की ठंड से जमी सिसु झील, तापमान -15 डिग्री सेल्सियस गिरा
Tue, 09 Jan 2024 11:01 AM IST
अनुज कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लाहौल और स्पीति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लाहौल और स्पीति
Published by: अनुज कुमार
Updated Tue, 09 Jan 2024 11:01 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश समेत देश में शीतलहर का सितम जारी है। वहीं लाहौल घाटी की सिसु झील एक बार फिर जम गई है। वहीं लाहौल स्पीति में तापमान माइन्स 15 डिग्री सेल्सियस गिर गया है।
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सिसु झील का पानी जमा
- फोटो : एएनआई
विस्तार
हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी की सिसु झील बर्फ की चादर से ढक गई है। वहीं सिसु अभी भी बर्फ की सफेद चादर में लिपटी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिसु झील जम गई है। लाहौल स्पीति में तापमान माइन्स 15 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। जिसके बाद नदियां का पानी भी जम गया है।
हिमाचल प्रदेश में 17 साल बाद जनवरी में बारिश और बर्फबारी के आसार बहुत कम हैं। प्रदेश में पूरे महीने मौसम शुष्क बना रहने का पूर्वानुमान है। किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चंबा, कुल्लू और शिमला के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी के आसार हैं।
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मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, उत्तरी ध्रुव और भूमध्य सागरीय क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बनने से पश्चिमी विक्षोभ कमजोर हो गया है। मैदानी जिलों में कुछ और दिन कोहरा पड़ना जारी रहेगा। ऊना, बिलासपुर, कांगड़ा, हमीरपुर सहित सोलन, सिरमौर और मंडी के कई क्षेत्रों में कोहरा पड़ने से सुबह और शाम के समय विजिबिलिटी (दृश्यता) कम रहेगी। जनवरी में तापमान भी सामान्य या उससे अधिक रहने की संभावना है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में 2007 की जनवरी जैसे हालात बन रहे हैं। ग्लोबल पैटर्न भी इसका बड़ा कारण है। जनवरी में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की बहुत कम संभावना है। उन्होंने कहा कि सर्दियों के मौसम में बर्फबारी के लिए अटलांटिक सागर से हवाएं आती हैं। उत्तरी ध्रुव की ओर से ठंडी और भूमध्य सागरीय क्षेत्र की ओर से गर्म हवा आने पर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है।
इस बार उत्तरी ध्रुव में हवा बेहद कम है और कम दबाव का क्षेत्रफल भी हावी है। कम दबाव के क्षेत्रफल के हावी रहने की वजह से हवाएं आगे की तरफ नहीं आ रही है। इसी वजह से प्रशांत सागर में भी तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किया जा रहे है। उन्होंने कहा कि बर्फबारी मानसून का एक कारक है। मानसून सीजन के दौरान बारिश अधिक या कम होने को लेकर अभी संभावना जताना जल्दबाजी होगी।
सिसु लेक
लाहौल स्पीति में स्थित ये सिसु लेक बेहद खूबसूरत है। यहां जाकर आपको सुकून मिल सकता है। चारों और से पहाड़ों से घिरी ये जगह मन को अलग शांति प्रदान करती है। यहां सर्दियों में काफी बर्फबारी पड़ती है, जिसकी वजह से सिसु गांव समेत पूरी लाहौल घाटी दुनिया के बाकी हिस्सों से कट जाती है। सर्दियों में प्रशासन लोगों को हेलीकॉप्टर द्वारा आसपास की जगहों पर ले जाता है। सर्दियों में ये जगह पूरी तरह से बर्फ से ढक जाती है।
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हिमाचल प्रदेश में 17 साल बाद जनवरी में बारिश और बर्फबारी के आसार बहुत कम हैं। प्रदेश में पूरे महीने मौसम शुष्क बना रहने का पूर्वानुमान है। किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चंबा, कुल्लू और शिमला के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी के आसार हैं।
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मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, उत्तरी ध्रुव और भूमध्य सागरीय क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बनने से पश्चिमी विक्षोभ कमजोर हो गया है। मैदानी जिलों में कुछ और दिन कोहरा पड़ना जारी रहेगा। ऊना, बिलासपुर, कांगड़ा, हमीरपुर सहित सोलन, सिरमौर और मंडी के कई क्षेत्रों में कोहरा पड़ने से सुबह और शाम के समय विजिबिलिटी (दृश्यता) कम रहेगी। जनवरी में तापमान भी सामान्य या उससे अधिक रहने की संभावना है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में 2007 की जनवरी जैसे हालात बन रहे हैं। ग्लोबल पैटर्न भी इसका बड़ा कारण है। जनवरी में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की बहुत कम संभावना है। उन्होंने कहा कि सर्दियों के मौसम में बर्फबारी के लिए अटलांटिक सागर से हवाएं आती हैं। उत्तरी ध्रुव की ओर से ठंडी और भूमध्य सागरीय क्षेत्र की ओर से गर्म हवा आने पर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है।
इस बार उत्तरी ध्रुव में हवा बेहद कम है और कम दबाव का क्षेत्रफल भी हावी है। कम दबाव के क्षेत्रफल के हावी रहने की वजह से हवाएं आगे की तरफ नहीं आ रही है। इसी वजह से प्रशांत सागर में भी तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किया जा रहे है। उन्होंने कहा कि बर्फबारी मानसून का एक कारक है। मानसून सीजन के दौरान बारिश अधिक या कम होने को लेकर अभी संभावना जताना जल्दबाजी होगी।
सिसु लेक
लाहौल स्पीति में स्थित ये सिसु लेक बेहद खूबसूरत है। यहां जाकर आपको सुकून मिल सकता है। चारों और से पहाड़ों से घिरी ये जगह मन को अलग शांति प्रदान करती है। यहां सर्दियों में काफी बर्फबारी पड़ती है, जिसकी वजह से सिसु गांव समेत पूरी लाहौल घाटी दुनिया के बाकी हिस्सों से कट जाती है। सर्दियों में प्रशासन लोगों को हेलीकॉप्टर द्वारा आसपास की जगहों पर ले जाता है। सर्दियों में ये जगह पूरी तरह से बर्फ से ढक जाती है।