{"_id":"67ab41910c4638ed7e083cbd","slug":"yamuna-bridge-maintaince-work-nahan-news-c-177-1-ssml1030-143225-2025-02-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: एनएच-07 पर पांवटा यमुना पुल की मरम्मत योजना नहीं चढ़ पा रही सिरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: एनएच-07 पर पांवटा यमुना पुल की मरम्मत योजना नहीं चढ़ पा रही सिरे
विज्ञापन
आवाजाही को वैकल्पिक व्यवस्था नही हो पाने पर लटका एनएच-07 के दशकों पुराने यमुना पुल मरम्मत कार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एनएच-07 पर पांवटा यमुना पुल की मरम्मत योजना नहीं चढ़ पा रही सिरे
पुल के मरम्मत को तीन वर्ष पहले हुआ है करीब सवा करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। उत्तराखंड व हिमाचल को जोड़ने वाले करीब साढ़े पांच दशकों पहले बने यमुना पुल के मरम्मत कार्य की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। इस पुल की हालत जर्जर हो चुकी है। रोज पुल पर हजारों भारी व हल्के वाहन गुजरते हैं। पुल की हालत सुधारने को तीन वर्ष पहले 1.25 करोड़ बजट का प्रावधान भी हो चुका है। उत्तराखंड-हिमाचल प्रशासनिक अधिकारियों की कई बैठकें भी हो चुकी हैं लेकिन कोई बेहतर वैकल्पिक मार्ग नहीं होने से मरम्मत कार्य अधर में लटकता जा रहा है।
बता दें कि वर्ष 1970 में यमुना नदी पर 750 मीटर लंबा पुल बना है। देहरादून को पांवटा साहिब से सीधे जोड़ने वाले पुल की हालत पिछले कुछ सालों से जर्जर हो चुकी है। इस पुल पर रोज हजारों भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। ज्यादा संख्या में भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान तो कई बार पुल कंपन करने लगता है। अधिकारियों के अनुसार पुल पर मरम्मत के रूप में बियरिंग संबंधी कार्य किए जाने हैं। पुल को थर्मल स्ट्रेस झेलने (गर्मी वी सर्दी में सिकुड़ने और फैलने की प्रक्रिया के मुताबिक बनाना) लायक बनाना है। इसके लिए पुल के पिलर के ऊपर के पैड और वाहन चलने वाली सतह के बीच में मरम्मत की जानी है। इस काम में लंबा समय भी लग सकता है। इसी के मुताबिक क्लोजर और वैकल्पिक इंतजाम की जरूरत पड़ेगी।
देहरादून और सिरमौर के प्रशासनिक अधिकारियों के इस योजना को सिरे चढ़ाने को कई बार बैठकें भी होती रहीं हैं। मरम्मत के लिए पुल को लंबे समय तक के लिए बंद करने की जरूरत रहेगी। फिलहाल, कोई वैकल्पिक इंतजाम की कार्ययोजना बनती नजर नहीं आ रही है। कुछ माह पहले हिमाचल प्रदेश के लोनिवि मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिल कर नए बन रहे नावघाट पुल व पांवटा यमुना पुल के विषय पर भी चर्चा की थी। इसके बाद यमुना पुल की मरम्मत की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद बंधी थी।
विज्ञापन
एनएच के अधिशाषी अभियंता राकेश खंडूजा ने कहा कि कोई भी आवाजाही के लिए वैकल्पिक इंतजाम नहीं हो सका है। इसके चलते यमुना पुल मरम्मत का बजट भी सेक्शन हो गया है।
बाक्स...
नए पुल तैयार होने के बाद ही मरम्मत संभव : एसडीएम
- एसडीएम पांवटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा ने कहा कि उत्तराखंड व हिमाचल को जोड़ने वाले यमुना पुल से काफी वाहन गुजरते हैं। आसपास से कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है। अब राज्य सीमा पर तैयार हो रहे नावघाट-भगानी पुल या एनएच-07 पर यमुना नदी पर तैयार हो रहे नए पुल के शुरू हो जाने पर ही यमुना पुल मरम्मत कार्य संभव हो सकेेगा।
संवाद
विज्ञापन
पुल के मरम्मत को तीन वर्ष पहले हुआ है करीब सवा करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। उत्तराखंड व हिमाचल को जोड़ने वाले करीब साढ़े पांच दशकों पहले बने यमुना पुल के मरम्मत कार्य की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। इस पुल की हालत जर्जर हो चुकी है। रोज पुल पर हजारों भारी व हल्के वाहन गुजरते हैं। पुल की हालत सुधारने को तीन वर्ष पहले 1.25 करोड़ बजट का प्रावधान भी हो चुका है। उत्तराखंड-हिमाचल प्रशासनिक अधिकारियों की कई बैठकें भी हो चुकी हैं लेकिन कोई बेहतर वैकल्पिक मार्ग नहीं होने से मरम्मत कार्य अधर में लटकता जा रहा है।
बता दें कि वर्ष 1970 में यमुना नदी पर 750 मीटर लंबा पुल बना है। देहरादून को पांवटा साहिब से सीधे जोड़ने वाले पुल की हालत पिछले कुछ सालों से जर्जर हो चुकी है। इस पुल पर रोज हजारों भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। ज्यादा संख्या में भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान तो कई बार पुल कंपन करने लगता है। अधिकारियों के अनुसार पुल पर मरम्मत के रूप में बियरिंग संबंधी कार्य किए जाने हैं। पुल को थर्मल स्ट्रेस झेलने (गर्मी वी सर्दी में सिकुड़ने और फैलने की प्रक्रिया के मुताबिक बनाना) लायक बनाना है। इसके लिए पुल के पिलर के ऊपर के पैड और वाहन चलने वाली सतह के बीच में मरम्मत की जानी है। इस काम में लंबा समय भी लग सकता है। इसी के मुताबिक क्लोजर और वैकल्पिक इंतजाम की जरूरत पड़ेगी।
विज्ञापन
देहरादून और सिरमौर के प्रशासनिक अधिकारियों के इस योजना को सिरे चढ़ाने को कई बार बैठकें भी होती रहीं हैं। मरम्मत के लिए पुल को लंबे समय तक के लिए बंद करने की जरूरत रहेगी। फिलहाल, कोई वैकल्पिक इंतजाम की कार्ययोजना बनती नजर नहीं आ रही है। कुछ माह पहले हिमाचल प्रदेश के लोनिवि मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिल कर नए बन रहे नावघाट पुल व पांवटा यमुना पुल के विषय पर भी चर्चा की थी। इसके बाद यमुना पुल की मरम्मत की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद बंधी थी।
विज्ञापन
एनएच के अधिशाषी अभियंता राकेश खंडूजा ने कहा कि कोई भी आवाजाही के लिए वैकल्पिक इंतजाम नहीं हो सका है। इसके चलते यमुना पुल मरम्मत का बजट भी सेक्शन हो गया है।
बाक्स...
नए पुल तैयार होने के बाद ही मरम्मत संभव : एसडीएम
- एसडीएम पांवटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा ने कहा कि उत्तराखंड व हिमाचल को जोड़ने वाले यमुना पुल से काफी वाहन गुजरते हैं। आसपास से कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है। अब राज्य सीमा पर तैयार हो रहे नावघाट-भगानी पुल या एनएच-07 पर यमुना नदी पर तैयार हो रहे नए पुल के शुरू हो जाने पर ही यमुना पुल मरम्मत कार्य संभव हो सकेेगा।
संवाद