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अब नदी नालों में नहीं बहेगा उद्योगों का रसायनयुक्त पानी

Thu, 03 Mar 2022 07:04 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 07:04 PM IST
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will no longer flow in rivers and streams
अब नदी-नालों में नहीं बहेगा
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उद्योगों का रसायन युक्त पानी
खास खबर...
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में स्थापित हुआ कॉमन एफ्फुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट
7.80 करोड़ की लागत से तैयार हुआ 25 लाख लीटर क्षमता का प्लांट
उद्योगों का पानी नदी में छोड़ने पर तय की जाएगी जुर्माना राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में तहत आने वाले नदी-नालों में अब उद्योगों का रसायनयुक्त पानी नहीं बहेगा। दरअसल, पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर कालाअंब में कॉमन एफ्फुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) स्थापित किया गया है। इसका व्यावहारिक परीक्षण भी किया गया है। अब औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रसायन युक्त अथवा किसी भी प्रकार का दूषित पानी नदी-नालों में न बहकर इस सीईटीपी प्लांट में संशोधित होगा, ताकि नदियों को दूषित होने से बचाया जा सके। यहां बहने वाली मारकंडा नदी प्रदेश की सात सबसे दूषित नदियों में शुमार है, लेकिन इस प्लांट के स्थापित होने से मारकंडा नदी भी दूषित होने से बच जाएगी।

नदियों में रसायनयुक्त पानी का प्रवाह न हो, इसकी निगरानी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा। यदि कोई उद्योग फिर भी नदियों में रसायन युक्त पानी छोड़ेगा तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। जल्द ही जुर्माना राशि भी तय की जाएगी। बता दें कि उद्योगों से निकलने वाला दूषित जल नदी-नालों के माध्यम से हरियाणा क्षेत्र में पहुंच रहा है। इस पर हरियाणा की पर्यावरण संरक्षण संस्थाएं भी अरसे से आपत्ति जता रही हैं। क्षेत्र में बहने वाली मारकंडा नदी पहले ही प्रदूषित नदियों में शुमार है। एनजीटी भी समय-समय पर मारकंडा नदी और इसके सहायक नदी-नालों के पानी की सैंपलिंग करता आ रहा है। बहरहाल, 25 लाख लीटर क्षमता वाले इस सीईटीपी प्लांट को एनजीटी के निर्देशानुसार कालाअंब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी ने 7.80 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया है। केंद्र और प्रदेश सरकार तथा उद्यमियों के योगदान से इस परियोजना को क्रियान्वित किया गया है। जिला उद्योग केंद्र नाहन के महाप्रबंधक जीएस चौहान ने बताया कि कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों से निकलने वाला रसायन युक्त या दूषित पानी टैंकरों के माध्यम से ट्रीटमेंट प्लांट में लाया जाएगा। फिर इसे संशोधित किया जाएगा। इसकी निगरानी का जिम्मा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपा गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समय-समय पर यह सुनिश्चित करेगा कि इस प्लांट के उपकरण सही तरीके से कार्य कर रहे हैं या नहीं। फिलहाल इस ट्रीटमेंट प्लांट का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के दौरान जो भी खामियां सामने आएंगी, उनको दूर किया जाएगा।
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