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Sirmour News: शादी समारोह में मारपीट के मामले में दोनों आरोपी बरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। शादी समारोह में कथित मारपीट, रास्ता रोकने, गाली-गलौज और धमकी के मामले में न्यायालय ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायिक दंडाधिकारी विकास कपूर की अदालत ने आदेश पारित करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
मामला 24 अप्रैल 2022 को शिलाई क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, एक शादी समारोह के दौरान योगेश शर्मा और नितिन शर्मा के साथ आरोपी चमेल सिंह और रिंकू ने पहले अभद्र व्यवहार किया, फिर रास्ता रोककर मारपीट की। आरोप था कि मारपीट में नितिन शर्मा को गंभीर चोटें आईं और दोनों को धमकी भी दी गई। इस पर शिलाई थाना में आईपीसी की धारा 341, 323, 325, 504, 506 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटना के प्रत्यक्षदर्शी बताए गए दो गवाह अभियोजन के पक्ष में नहीं आए और उन्हें शत्रुतापूर्ण घोषित करना पड़ा। वहीं, शिकायतकर्ता और घायल के बयानों में भी घटना के स्थान, मारपीट के तरीके और घटनाक्रम को लेकर कई महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आए।
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अदालत ने यह भी माना कि चिकित्सकों की रिपोर्ट में पीड़ितों की चोटें गिरने से भी संभव हैं। ऐसे में अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि चोटें आरोपियों की ओर से की गई मारपीट का ही परिणाम थीं। इन परिस्थितियों में न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य विश्वसनीय और पर्याप्त नहीं हैं। संदेह का लाभ देते हुए चमेल सिंह और रिंकू को सभी आरोपों से बरी कर दिया।-- -- -- -- -
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नाहन (सिरमौर)। शादी समारोह में कथित मारपीट, रास्ता रोकने, गाली-गलौज और धमकी के मामले में न्यायालय ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायिक दंडाधिकारी विकास कपूर की अदालत ने आदेश पारित करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
मामला 24 अप्रैल 2022 को शिलाई क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, एक शादी समारोह के दौरान योगेश शर्मा और नितिन शर्मा के साथ आरोपी चमेल सिंह और रिंकू ने पहले अभद्र व्यवहार किया, फिर रास्ता रोककर मारपीट की। आरोप था कि मारपीट में नितिन शर्मा को गंभीर चोटें आईं और दोनों को धमकी भी दी गई। इस पर शिलाई थाना में आईपीसी की धारा 341, 323, 325, 504, 506 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटना के प्रत्यक्षदर्शी बताए गए दो गवाह अभियोजन के पक्ष में नहीं आए और उन्हें शत्रुतापूर्ण घोषित करना पड़ा। वहीं, शिकायतकर्ता और घायल के बयानों में भी घटना के स्थान, मारपीट के तरीके और घटनाक्रम को लेकर कई महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आए।
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अदालत ने यह भी माना कि चिकित्सकों की रिपोर्ट में पीड़ितों की चोटें गिरने से भी संभव हैं। ऐसे में अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि चोटें आरोपियों की ओर से की गई मारपीट का ही परिणाम थीं। इन परिस्थितियों में न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य विश्वसनीय और पर्याप्त नहीं हैं। संदेह का लाभ देते हुए चमेल सिंह और रिंकू को सभी आरोपों से बरी कर दिया।