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Sirmour News: सराहां के प्राथमिक बालिका विद्यालय में शुरू हुआ ऑयस्टर मशरूम उत्पादन
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राजकीय प्राथमिक पाठशाला सराहां स्कूल की छात्राएं डिंगरी ऑयेस्टर मशरूम का उत्पादन की बारीकियां
-बच्चों को मिलेगा पोषण के साथ कौशल प्रशिक्षण, एमडीएम में होगा मशरूम का उपयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
सराहां (सिरमौर)। राजकीय प्राथमिक बालिका विद्यालय सराहां में विद्यार्थियों को पोषण और व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में अभिनव पहल की गई है। उपनिदेशक, स्कूल शिक्षा (प्रारंभिक), जिला सिरमौर राजीव ठाकुर के निरीक्षण में विद्यालय में जेबीटी शिक्षक शिशु पाल की ओर से ढींगरी (ऑयस्टर) मशरूम उत्पादन एवं लर्निंग सेंटर स्थापित किया गया है।
इस पहल के तहत विद्यालय के एक कक्ष में ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन शुरू किया गया है। विद्यालय के शिक्षक शिशु पाल ने बताया कि यहां तैयार होने वाले मशरूम का उपयोग मिड-डे मील (एमडीएम) में किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को पौष्टिक एवं प्रोटीन युक्त भोजन उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही बच्चों को मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि उनमें स्वरोजगार, उद्यमिता और व्यावसायिक कौशल विकसित हो सके।
उन्होंने बताया कि ऑयस्टर मशरूम की खेती कम लागत, कम स्थान और लगभग 40 से 50 दिनों में तैयार होने वाली लाभदायक कृषि गतिविधि है। यह प्रोटीन, विटामिन-बी और एंटीऑक्सीडेंट्स का उत्कृष्ट स्रोत होने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है।
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शिशु पाल ने बताया कि ऑयस्टर मशरूम उत्पादन के लिए महंगे एयर कंडीशनर या विशेष कम्पोस्ट की आवश्यकता नहीं होती। इसे गेहूं के भूसे अथवा धान के पुआल पर आसानी से उगाया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी खेती सरल और किफायती बन जाती है।-- -- -
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संवाद न्यूज एजेंसी
सराहां (सिरमौर)। राजकीय प्राथमिक बालिका विद्यालय सराहां में विद्यार्थियों को पोषण और व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में अभिनव पहल की गई है। उपनिदेशक, स्कूल शिक्षा (प्रारंभिक), जिला सिरमौर राजीव ठाकुर के निरीक्षण में विद्यालय में जेबीटी शिक्षक शिशु पाल की ओर से ढींगरी (ऑयस्टर) मशरूम उत्पादन एवं लर्निंग सेंटर स्थापित किया गया है।
इस पहल के तहत विद्यालय के एक कक्ष में ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन शुरू किया गया है। विद्यालय के शिक्षक शिशु पाल ने बताया कि यहां तैयार होने वाले मशरूम का उपयोग मिड-डे मील (एमडीएम) में किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को पौष्टिक एवं प्रोटीन युक्त भोजन उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही बच्चों को मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि उनमें स्वरोजगार, उद्यमिता और व्यावसायिक कौशल विकसित हो सके।
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उन्होंने बताया कि ऑयस्टर मशरूम की खेती कम लागत, कम स्थान और लगभग 40 से 50 दिनों में तैयार होने वाली लाभदायक कृषि गतिविधि है। यह प्रोटीन, विटामिन-बी और एंटीऑक्सीडेंट्स का उत्कृष्ट स्रोत होने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है।
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शिशु पाल ने बताया कि ऑयस्टर मशरूम उत्पादन के लिए महंगे एयर कंडीशनर या विशेष कम्पोस्ट की आवश्यकता नहीं होती। इसे गेहूं के भूसे अथवा धान के पुआल पर आसानी से उगाया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी खेती सरल और किफायती बन जाती है।