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टीजीटी भर्ती में रूसा प्रणाली बनी बाधा, अभ्यर्थी परेशान
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नाहन (सिरमौर)। टीजीटी भर्ती में कई हजारों अभ्यर्थियों के लिए रूसा प्रणाली से बाधा बन गई है। रूसा में लिए गए विषयों के कारण कई अभ्यर्थी टीजीटी भर्ती में अयोग्य करार किए जा रहे हैं, जिससे अभ्यर्थी परेशान हैं। इसको लेकर बेरोजगार अभ्यर्थी नाहन के विधायक डॉ. राजीव बिंदल से मिले, जहां अभ्यर्थियों ने मांग की प्रति सौंपकर समाधान मांगा।
अभ्यर्थी परम पुंडीर, राकेश, मनीष, काजल, विक्की, अजय, राकेश कुमार एवं पूनम आदि ने बताया कि 2013 से 15 तक स्नातक में रूसा प्रणाली रही। 2016 में इसे बंद कर दिया लेकिन इस बीच रूसा प्रणाली में मेडिकल एवं नॉन मेडिकल संकाय में एक विषय कला का भी रखा गया, जिसमें छात्रों ने भूगोल विषय को माइनर विषय के तौर पर रखा।
उस दौरान प्राध्यापकों ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई और न ही स्नातक के बाद बीएड कोर्स करने पर विश्वविद्यालय की कोई आपत्ति रही। अब जब टेट पास करने के बाद अभ्यर्थी कमीशन की तैयारियों में जुटे तो 2019 में कमीशन पास करने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बाहर का रास्ता दिखाया गया जिसमें कमीशन की ओर से आरएंडपी नियमों का हवाला देते हुए कहा गया कि मेडिकल संकाय में जियोलॉजी, बोटनी एवं रसायन विज्ञान, नॉन मेडिकल में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं गणित विषय पढ़ने वाले ही टीजीटी भर्ती के पात्र हैं।
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इस प्रक्रिया के बाद जब शिक्षा विभाग को गलती का पता चला तो विवि प्रशासन ने कमेटी गठित की। इस कमेटी ने शिक्षा निदेशालय को रिपोर्ट सौंपी जिसमें संकाय के दो विषय कॉलेज में और तीसरा विषय जमा दो में पढ़ा होना शामिल किया गया लेकिन सरकार को मंजूरी के लिए भेजा यह फैसला अब नहीं आया है जिससे 10 हजार छात्र प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में टीजीटी 2020 का रिजल्ट भी घोषित हुआ है, जिसमें अब साक्षात्कार लिए जाने हैं। लिहाजा, अभ्यर्थियों को डर सता रहा है कि कहीं दो साल पहले हुई गलती फिर से न दोहराई जाए क्योंकि सरकार के फैसले के बाद ही नियमों में बदलाव किया जाना है। इसको लेकर अभ्यर्थियों ने विधायक के माध्यम से सरकार से मांग की है कि इसका समाधान जल्द से जल्द किया जाए ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य खराब न हो।
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अभ्यर्थी परम पुंडीर, राकेश, मनीष, काजल, विक्की, अजय, राकेश कुमार एवं पूनम आदि ने बताया कि 2013 से 15 तक स्नातक में रूसा प्रणाली रही। 2016 में इसे बंद कर दिया लेकिन इस बीच रूसा प्रणाली में मेडिकल एवं नॉन मेडिकल संकाय में एक विषय कला का भी रखा गया, जिसमें छात्रों ने भूगोल विषय को माइनर विषय के तौर पर रखा।
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उस दौरान प्राध्यापकों ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई और न ही स्नातक के बाद बीएड कोर्स करने पर विश्वविद्यालय की कोई आपत्ति रही। अब जब टेट पास करने के बाद अभ्यर्थी कमीशन की तैयारियों में जुटे तो 2019 में कमीशन पास करने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बाहर का रास्ता दिखाया गया जिसमें कमीशन की ओर से आरएंडपी नियमों का हवाला देते हुए कहा गया कि मेडिकल संकाय में जियोलॉजी, बोटनी एवं रसायन विज्ञान, नॉन मेडिकल में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं गणित विषय पढ़ने वाले ही टीजीटी भर्ती के पात्र हैं।
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इस प्रक्रिया के बाद जब शिक्षा विभाग को गलती का पता चला तो विवि प्रशासन ने कमेटी गठित की। इस कमेटी ने शिक्षा निदेशालय को रिपोर्ट सौंपी जिसमें संकाय के दो विषय कॉलेज में और तीसरा विषय जमा दो में पढ़ा होना शामिल किया गया लेकिन सरकार को मंजूरी के लिए भेजा यह फैसला अब नहीं आया है जिससे 10 हजार छात्र प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में टीजीटी 2020 का रिजल्ट भी घोषित हुआ है, जिसमें अब साक्षात्कार लिए जाने हैं। लिहाजा, अभ्यर्थियों को डर सता रहा है कि कहीं दो साल पहले हुई गलती फिर से न दोहराई जाए क्योंकि सरकार के फैसले के बाद ही नियमों में बदलाव किया जाना है। इसको लेकर अभ्यर्थियों ने विधायक के माध्यम से सरकार से मांग की है कि इसका समाधान जल्द से जल्द किया जाए ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य खराब न हो।
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