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Sirmour News: श्रीकृष्ण ने अर्जुन का अहंकार कई बार तोड़ा
Thu, 07 Nov 2024 11:55 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
Updated Thu, 07 Nov 2024 11:55 PM IST
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कथा व्यास दीपक महाराज बहराल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथावृतांत सुनाते हुए : संवाद
बहराल में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा सहिब (सिरमौर)। श्री दूधलेश्वर गौ सेवा संस्थान एवं अध्यात्म उन्नति केंद्र बहराल में श्रीमद्भावत कथा आयोजन चल रहा है। जिसमें कथा व्यास दीपक महाराज ने तीसरे दिन श्रोताओं को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा राजा मोरध्वज की परीक्षा का वृतांत सुन कर भक्तों को भाव विह्वल कर दियाव
कथा व्यास ने कहा कि अर्जुन और श्रीकृष्ण का संबंध बहुत ही खास और गहरा रहा है। अर्जुन को इस बात का अहंकार हो जाता था कि उससे अधिक श्रीकृष्ण के प्रति भक्त नही हो सकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का यह अहंकार कई बार तोड़ा भी। कथा व्यास ने कहा कि जब महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ, तो पांडवों ने अश्वमेध यज्ञ किया। एक दिन वह घोड़ा राजा मोरध्वज के राज्य से गुजरा, जिसे उसके छोटे से पुत्र ने रोक दिया। अर्जुन को जब यह बात पता चली, तो वह अत्यंत क्रोधित हुआ और युद्ध करने निकल पडा। श्रीकृष्ण ने मोरध्वज के दानशीलता और महानता का परिचय देते हुए अर्जुन को युद्ध करने से मना किया और यह भी बताया कि वो नारायण के कितने बड़े भक्त हैं। लेकिन अर्जुन नहीं माना। राजा मोरध्वज के पुत्र ने अर्जुन को युद्ध में परास्त भी कर दिया। अर्जुन को इस बात पर यकीन नहीं हुआ कि उससे बड़ा और करीब कोई और श्रीकृष्ण का भक्त हो सकता है।
अर्जुन का अहंकार तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण और अर्जुन ने जोगियों का वेश बनाया और वन से एक शेर पकड़कर भगवान विष्णु के परम-भक्त राजा मोरध्वज के द्वार पर पहुंचे। मोरध्वज बहुत दानी माने जाते थे। साधुओं की आवभगत की। भगवान कृष्ण ने मोरध्वज से कहा कि हम तो ब्राह्मण हैं, कुछ भी खा लेंगे। लेकिन ये शेर नरभक्षी है। आपको इसका पेट भरने के लिए अपने पुत्र को आरी से चीरकर इसे खिलाना होगा। राजा-रानी ने अपने हाथों में आरी लेकर पुत्र के दो टुकड़े किये और सिंह को परोस दिया। श्रीकृष्ण के आगे राजा की भक्ति देख अर्जुन नतमस्तक हो गया। भगवान ने बालक ताम्रध्वज को पुनर्जीवित कर दिया।
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वेद प्रकाश व अनुराग गुप्ता ने कहा कि बहराल में कथा व्यास महाराज दीपक द्वारा पंच दिवसीय श्री मद भागवत कथा सकंद पुराण सुनायी जा रही हैं। 9 नवंबर को गोपाष्टमी के अवसर पर गोपूजन व भंडारा होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा सहिब (सिरमौर)। श्री दूधलेश्वर गौ सेवा संस्थान एवं अध्यात्म उन्नति केंद्र बहराल में श्रीमद्भावत कथा आयोजन चल रहा है। जिसमें कथा व्यास दीपक महाराज ने तीसरे दिन श्रोताओं को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा राजा मोरध्वज की परीक्षा का वृतांत सुन कर भक्तों को भाव विह्वल कर दियाव
कथा व्यास ने कहा कि अर्जुन और श्रीकृष्ण का संबंध बहुत ही खास और गहरा रहा है। अर्जुन को इस बात का अहंकार हो जाता था कि उससे अधिक श्रीकृष्ण के प्रति भक्त नही हो सकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का यह अहंकार कई बार तोड़ा भी। कथा व्यास ने कहा कि जब महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ, तो पांडवों ने अश्वमेध यज्ञ किया। एक दिन वह घोड़ा राजा मोरध्वज के राज्य से गुजरा, जिसे उसके छोटे से पुत्र ने रोक दिया। अर्जुन को जब यह बात पता चली, तो वह अत्यंत क्रोधित हुआ और युद्ध करने निकल पडा। श्रीकृष्ण ने मोरध्वज के दानशीलता और महानता का परिचय देते हुए अर्जुन को युद्ध करने से मना किया और यह भी बताया कि वो नारायण के कितने बड़े भक्त हैं। लेकिन अर्जुन नहीं माना। राजा मोरध्वज के पुत्र ने अर्जुन को युद्ध में परास्त भी कर दिया। अर्जुन को इस बात पर यकीन नहीं हुआ कि उससे बड़ा और करीब कोई और श्रीकृष्ण का भक्त हो सकता है।
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अर्जुन का अहंकार तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण और अर्जुन ने जोगियों का वेश बनाया और वन से एक शेर पकड़कर भगवान विष्णु के परम-भक्त राजा मोरध्वज के द्वार पर पहुंचे। मोरध्वज बहुत दानी माने जाते थे। साधुओं की आवभगत की। भगवान कृष्ण ने मोरध्वज से कहा कि हम तो ब्राह्मण हैं, कुछ भी खा लेंगे। लेकिन ये शेर नरभक्षी है। आपको इसका पेट भरने के लिए अपने पुत्र को आरी से चीरकर इसे खिलाना होगा। राजा-रानी ने अपने हाथों में आरी लेकर पुत्र के दो टुकड़े किये और सिंह को परोस दिया। श्रीकृष्ण के आगे राजा की भक्ति देख अर्जुन नतमस्तक हो गया। भगवान ने बालक ताम्रध्वज को पुनर्जीवित कर दिया।
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वेद प्रकाश व अनुराग गुप्ता ने कहा कि बहराल में कथा व्यास महाराज दीपक द्वारा पंच दिवसीय श्री मद भागवत कथा सकंद पुराण सुनायी जा रही हैं। 9 नवंबर को गोपाष्टमी के अवसर पर गोपूजन व भंडारा होगा।