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Sirmour News: पांवटा अस्पताल में पर्ची के लिए अब 10 रुपये शुल्क
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आरकेएस की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय, शुल्क की राशि अस्पताल की व्यवस्थाओं पर होगी खर्च
पर्ची काउंटर पर स्टाफ की कमी से मरीजों को घंटों कतार में खड़ा होना पड़ रहा
महिला शौचालय दो माह से बंद, पुरुष शौचालय की हालत भी खराब
शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं, गर्भवती महिलाओं को नियमित अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में अब ओपीडी में उपचार करवाने के लिए मरीजों को 10 रुपये पर्ची शुल्क देना होगा। पहले अस्पताल में ओपीडी पर्ची निशुल्क बनाई जाती थी, लेकिन रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की बैठक में लिए गए निर्णय के बाद शुल्क वसूली शुरू कर दी गई है। शुल्क लागू होने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
लोगों का कहना है कि 10 रुपये पर्ची शुल्क लेना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इसके बदले अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार होना चाहिए। विजेंद्र सिंह, पिंकू तोमर, अभय सिंह, विशाल, सीमा देवी, नीशा, विनिता और बबली ने कहा कि कई अस्पतालों में आरकेएस की आय बढ़ाने के लिए ओपीडी पर्ची शुल्क लिया जाता है और इससे प्राप्त राशि अस्पताल की व्यवस्थाओं पर खर्च होती है। पांवटा अस्पताल में भी अगर शुल्क लेने का उद्देश्य यही है तो मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।
दो-दो घंटे कतार, शौचालयों की हालत खराब
लोगों के अनुसार अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या ओपीडी पर्ची काउंटर पर स्टाफ की कमी है। इसके चलते मरीजों को दो-दो घंटे तक कतार में खड़े रहना पड़ता है। लोगों का कहना है कि जब पर्ची के लिए शुल्क लिया जा रहा है तो काउंटर पर पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि मरीजों को घंटों लाइन में न लगना पड़े। अस्पताल का महिला शौचालय करीब दो माह से बंद है, जबकि पुरुष शौचालय की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों के कई पद लंबे समय से खाली हैं। इसके कारण मरीजों को उपचार के लिए इंतजार करना पड़ता है और कई बार बिना उपचार लौटना पड़ता है।
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शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं
लोगों ने बताया कि अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण बीमार बच्चों को निजी क्लीनिकों में ले जाना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। लोगों ने मांग की है कि ओपीडी पर्ची शुल्क से प्राप्त राशि का उपयोग अस्पताल की मूलभूत सुविधाओं, स्टाफ व्यवस्था और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में किया जाए।
आरकेएस की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला
सिविल अस्पताल पांवटा साहिब के कार्यवाहक प्रभारी डॉ. एवी राघव ने बताया कि रोगी कल्याण समिति की बैठक में सर्वसम्मति से ओपीडी पर्ची पर 10 रुपये शुल्क लेने का निर्णय लिया गया था। यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि पर्ची शुल्क से प्राप्त राशि अस्पताल की व्यवस्थाओं और रोगी कल्याण के कार्यों पर ही खर्च की जाएगी।
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पर्ची काउंटर पर स्टाफ की कमी से मरीजों को घंटों कतार में खड़ा होना पड़ रहा
महिला शौचालय दो माह से बंद, पुरुष शौचालय की हालत भी खराब
शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं, गर्भवती महिलाओं को नियमित अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में अब ओपीडी में उपचार करवाने के लिए मरीजों को 10 रुपये पर्ची शुल्क देना होगा। पहले अस्पताल में ओपीडी पर्ची निशुल्क बनाई जाती थी, लेकिन रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की बैठक में लिए गए निर्णय के बाद शुल्क वसूली शुरू कर दी गई है। शुल्क लागू होने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
लोगों का कहना है कि 10 रुपये पर्ची शुल्क लेना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इसके बदले अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार होना चाहिए। विजेंद्र सिंह, पिंकू तोमर, अभय सिंह, विशाल, सीमा देवी, नीशा, विनिता और बबली ने कहा कि कई अस्पतालों में आरकेएस की आय बढ़ाने के लिए ओपीडी पर्ची शुल्क लिया जाता है और इससे प्राप्त राशि अस्पताल की व्यवस्थाओं पर खर्च होती है। पांवटा अस्पताल में भी अगर शुल्क लेने का उद्देश्य यही है तो मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।
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दो-दो घंटे कतार, शौचालयों की हालत खराब
लोगों के अनुसार अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या ओपीडी पर्ची काउंटर पर स्टाफ की कमी है। इसके चलते मरीजों को दो-दो घंटे तक कतार में खड़े रहना पड़ता है। लोगों का कहना है कि जब पर्ची के लिए शुल्क लिया जा रहा है तो काउंटर पर पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि मरीजों को घंटों लाइन में न लगना पड़े। अस्पताल का महिला शौचालय करीब दो माह से बंद है, जबकि पुरुष शौचालय की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों के कई पद लंबे समय से खाली हैं। इसके कारण मरीजों को उपचार के लिए इंतजार करना पड़ता है और कई बार बिना उपचार लौटना पड़ता है।
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शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं
लोगों ने बताया कि अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण बीमार बच्चों को निजी क्लीनिकों में ले जाना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। लोगों ने मांग की है कि ओपीडी पर्ची शुल्क से प्राप्त राशि का उपयोग अस्पताल की मूलभूत सुविधाओं, स्टाफ व्यवस्था और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में किया जाए।
आरकेएस की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला
सिविल अस्पताल पांवटा साहिब के कार्यवाहक प्रभारी डॉ. एवी राघव ने बताया कि रोगी कल्याण समिति की बैठक में सर्वसम्मति से ओपीडी पर्ची पर 10 रुपये शुल्क लेने का निर्णय लिया गया था। यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि पर्ची शुल्क से प्राप्त राशि अस्पताल की व्यवस्थाओं और रोगी कल्याण के कार्यों पर ही खर्च की जाएगी।