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Sirmour News: गरीब परिवार को राहत, कोर्ट ने बिना फीस 97.56 लाख के दावे की दी अनुमति
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इकलौते कमाने वाले की मौत के बाद विधवा को न्याय की राह आसान
अदालत बोली - गरीबी नहीं बनेगी न्याय में बाधा
सीमित जमीन के बावजूद परिवार को माना गया आर्थिक रूप से कमजोर
अंतिम निर्णय के बाद ही वसूली जाएगी कोर्ट फीस
सरकारी लापरवाही के आरोप में मुआवजे की तैयारी
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। घर के इकलौते कमाने वाले की मौत के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार को जिला अदालत से बड़ी राहत मिली है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कपिल शर्मा की अदालत ने विधवा और उसके परिवार को बिना कोर्ट फीस दिए करीब 97.56 लाख रुपये के मुआवजे का दावा दाखिल करने की अनुमति दे दी है।
मामला पांवटा साहिब तहसील से जुड़ा है। परिवार के मुखिया सनावर अली की 20 जुलाई 2025 को मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि उनकी मौत विभागों की लापरवाही का परिणाम है। मृतक ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। उनके निधन के बाद परिवार पूरी तरह असहाय हो गया। परिवार में युवा विधवा, बुजुर्ग महिला और नवजात बच्ची हैं। उनके पास आजीविका का स्थायी साधन नहीं है।
परिवार ने अदालत को बताया कि वे रोजमर्रा के खर्च के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं। वे भारी कोर्ट फीस जमा करने में सक्षम नहीं हैं। अदालत ने कहा कि केवल थोड़ी जमीन का मालिक होना किसी को आर्थिक रूप से सक्षम साबित नहीं करता, जब तक उससे नियमित आय न हो। अदालत ने परिवार को निर्धन व्यक्ति मानते हुए विशेष राहत दी और आदेश दिया कि कोर्ट फीस मामले के अंतिम परिणाम के आधार पर ही वसूली जाएगी।
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जांच में सामने आया कि परिवार के पास लगभग 4.20 लाख रुपये मूल्य की सीमित कृषि भूमि है, लेकिन उससे कोई नियमित आय नहीं हो रही। राजस्व विभाग की रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर अदालत ने माना कि परिवार वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर है। इस निर्णय के बाद अब परिवार के लिए न्याय की राह पहले से अधिक सुगम होती नजर आ रही है।
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अदालत बोली - गरीबी नहीं बनेगी न्याय में बाधा
सीमित जमीन के बावजूद परिवार को माना गया आर्थिक रूप से कमजोर
अंतिम निर्णय के बाद ही वसूली जाएगी कोर्ट फीस
सरकारी लापरवाही के आरोप में मुआवजे की तैयारी
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। घर के इकलौते कमाने वाले की मौत के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार को जिला अदालत से बड़ी राहत मिली है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कपिल शर्मा की अदालत ने विधवा और उसके परिवार को बिना कोर्ट फीस दिए करीब 97.56 लाख रुपये के मुआवजे का दावा दाखिल करने की अनुमति दे दी है।
मामला पांवटा साहिब तहसील से जुड़ा है। परिवार के मुखिया सनावर अली की 20 जुलाई 2025 को मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि उनकी मौत विभागों की लापरवाही का परिणाम है। मृतक ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। उनके निधन के बाद परिवार पूरी तरह असहाय हो गया। परिवार में युवा विधवा, बुजुर्ग महिला और नवजात बच्ची हैं। उनके पास आजीविका का स्थायी साधन नहीं है।
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परिवार ने अदालत को बताया कि वे रोजमर्रा के खर्च के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं। वे भारी कोर्ट फीस जमा करने में सक्षम नहीं हैं। अदालत ने कहा कि केवल थोड़ी जमीन का मालिक होना किसी को आर्थिक रूप से सक्षम साबित नहीं करता, जब तक उससे नियमित आय न हो। अदालत ने परिवार को निर्धन व्यक्ति मानते हुए विशेष राहत दी और आदेश दिया कि कोर्ट फीस मामले के अंतिम परिणाम के आधार पर ही वसूली जाएगी।
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जांच में सामने आया कि परिवार के पास लगभग 4.20 लाख रुपये मूल्य की सीमित कृषि भूमि है, लेकिन उससे कोई नियमित आय नहीं हो रही। राजस्व विभाग की रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर अदालत ने माना कि परिवार वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर है। इस निर्णय के बाद अब परिवार के लिए न्याय की राह पहले से अधिक सुगम होती नजर आ रही है।