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Sirmour News: पांवटा साहिब निवासी राजेश थापा ने अपनी मेहनत से लिखी सफलता की इबारत
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पांवटा साहिब के मूर्तिकार राजेश थापा भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, देहरादून की ओर से सम्मान प्राप्त
मूर्तिकार राजेश थापा भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, देहरादून उत्तराखंड ने किया सम्मानित
-पांवटा साहिब निवासी राजेश थापा ने अपनी मेहनत से लिखी सफलता की इबारत
-उत्तराखंड में ये सम्मान मिलना जीवन में खुशी और बेहद गर्व के पल है : राजेश थापा
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। देवभूमि हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब निवासी मूर्तिकार राजेश थापा को उत्तराखंड में सम्मानित किया गया। राजेश थापा ने जीवन गरीबी और संघर्षों को देखा है। इसके बावजूद अपनी कला के दम पर देशभर में एक प्रतिष्ठित कलाकार के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, देहरादून द्वारा सम्मानित किया गया है। यह मेरे लिए एक बहुत बड़ा अवसर और बेहद खास क्षण है।
बता दें कि पांवटा साहिब निवासी राजेश थापा का जन्म 1972 में देहरादून में हुआ था। बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में भर्ती होने का था। लेकिन उनका ये सपना पूरा नहीं हो पाया। राजेश थापा का एक सपना भले ही टूटा हो, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कुछ अलग करने की ठानी और एक बड़ा मूर्तिकार बनने का सपना देखा। राजेश को बचपन में ही पेंटिंग और मूर्तिकला में रुचि लेने वाले राजेश ने मिट्टी से मूर्तियां बनाना शुरू किया। ये रुचि ही कॅरिअर व आय का प्रमुख साधन बन गई।
आज वो पूरे देश भर में एक मूर्तिकार और चित्रकार के रूप में जाने जाते हैं। ये अपने हाथों से मूर्तियों में जान फूंक देते हैं। देशभर के चौक-चौराहों पर इनकी तैयार मूर्तियां नजर आती है। उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र और कई अन्य राज्यों में इस मूर्तिकार के हाथों से बनी महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, डॉ. भीमराव अंबेडकर, भगवान राम, शिव-पार्वती, हनुमान, बुद्ध और अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक मूर्तियां नजर आती हैं।
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राजेश थापा ने उत्तराखंड में सम्मान प्राप्त करने के बाद कहा कि इस सम्मान के लिए भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, देहरादून, पूरे उत्तराखंड का हृदय से धन्यवाद करता हूं। विशेष रूप से प्रभारी अधिकारी देहरादून डॉ. गौरव शर्मा, निदेशक डॉ. धृति बनर्जी के अमूल्य मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए सदैव आभारी रहूंगा।
बाक्स...
संघर्ष ने आगे बढ़ना सिखाया
पांवटा साहिब निवासी राजेश थापा ने बताया कि गरीबी और संघर्षों को नजदीक से देखा है। मूर्तिकार के रूप में पहचान के साथ रोजगार मिला। आज एक दर्जन से अधिक लोगों को रोजगार दे पा रहा हूं।
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सरस्वती की मूर्ति रहा जीवन का टर्निंग प्वाइंट
राजेश थापा ने कहा कि रोजी रोटी चलाने के लिए इलेक्ट्रिशियन का काम शुरू किया। लेकिन मूर्तिकला का काम ही रास आया। सबसे पहले एक मां सरस्वती की मूर्ति बनाई थी, लोगों ने काफी सराहना की। इसके बाद मूर्तियां और पेंटिंग्स बनाने शुरू किया तो, बहुत काम आने लगा।
संवाद-- -- -- -- -- --
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-पांवटा साहिब निवासी राजेश थापा ने अपनी मेहनत से लिखी सफलता की इबारत
-उत्तराखंड में ये सम्मान मिलना जीवन में खुशी और बेहद गर्व के पल है : राजेश थापा
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। देवभूमि हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब निवासी मूर्तिकार राजेश थापा को उत्तराखंड में सम्मानित किया गया। राजेश थापा ने जीवन गरीबी और संघर्षों को देखा है। इसके बावजूद अपनी कला के दम पर देशभर में एक प्रतिष्ठित कलाकार के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, देहरादून द्वारा सम्मानित किया गया है। यह मेरे लिए एक बहुत बड़ा अवसर और बेहद खास क्षण है।
बता दें कि पांवटा साहिब निवासी राजेश थापा का जन्म 1972 में देहरादून में हुआ था। बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में भर्ती होने का था। लेकिन उनका ये सपना पूरा नहीं हो पाया। राजेश थापा का एक सपना भले ही टूटा हो, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कुछ अलग करने की ठानी और एक बड़ा मूर्तिकार बनने का सपना देखा। राजेश को बचपन में ही पेंटिंग और मूर्तिकला में रुचि लेने वाले राजेश ने मिट्टी से मूर्तियां बनाना शुरू किया। ये रुचि ही कॅरिअर व आय का प्रमुख साधन बन गई।
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आज वो पूरे देश भर में एक मूर्तिकार और चित्रकार के रूप में जाने जाते हैं। ये अपने हाथों से मूर्तियों में जान फूंक देते हैं। देशभर के चौक-चौराहों पर इनकी तैयार मूर्तियां नजर आती है। उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र और कई अन्य राज्यों में इस मूर्तिकार के हाथों से बनी महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, डॉ. भीमराव अंबेडकर, भगवान राम, शिव-पार्वती, हनुमान, बुद्ध और अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक मूर्तियां नजर आती हैं।
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राजेश थापा ने उत्तराखंड में सम्मान प्राप्त करने के बाद कहा कि इस सम्मान के लिए भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, देहरादून, पूरे उत्तराखंड का हृदय से धन्यवाद करता हूं। विशेष रूप से प्रभारी अधिकारी देहरादून डॉ. गौरव शर्मा, निदेशक डॉ. धृति बनर्जी के अमूल्य मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए सदैव आभारी रहूंगा।
बाक्स...
संघर्ष ने आगे बढ़ना सिखाया
पांवटा साहिब निवासी राजेश थापा ने बताया कि गरीबी और संघर्षों को नजदीक से देखा है। मूर्तिकार के रूप में पहचान के साथ रोजगार मिला। आज एक दर्जन से अधिक लोगों को रोजगार दे पा रहा हूं।
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सरस्वती की मूर्ति रहा जीवन का टर्निंग प्वाइंट
राजेश थापा ने कहा कि रोजी रोटी चलाने के लिए इलेक्ट्रिशियन का काम शुरू किया। लेकिन मूर्तिकला का काम ही रास आया। सबसे पहले एक मां सरस्वती की मूर्ति बनाई थी, लोगों ने काफी सराहना की। इसके बाद मूर्तियां और पेंटिंग्स बनाने शुरू किया तो, बहुत काम आने लगा।
संवाद