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Sirmour News: शहर में थम नहीं रहा बंदरों का खौफ, घरों की छत्त पर जाना भी दुश्वार

Sun, 14 Jan 2024 11:25 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jan 2024 11:25 AM IST
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problem of monkey
हर चुनाव में बंदरों की समस्या से मुक्ति दिलाने का होता है वादा, बाद में नहीं होता पूरा
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गलियों में बंदरों के झुंड, शिक्षकों और बच्चों को स्कूल जाने में हो जाती है देरी
पंकज तन्हा

नाहन (सिरमौर)। शहर में बंदरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। सन 1621 में बसे नाहन शहर में लोग बंदरों की समस्या से परेशान हैं। हर दूसरे-तीसरे दिन शहर में कहीं न कहीं बंदर लोगों पर हमला कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि चुनावों के समय दोनों ही प्रमुख दलों के नेता बंदरों की समस्या से निजात दिलाने के वादे करते हैं लेकिन चुनाव जीत जाने के बाद समस्या की ज्यों की त्यों है।
अब आलम यह है कि लोगों का अपने घरों की छत जाना भी मुश्किल हो गया है। घर के बरामदे में लोहे की जाली लगाने के बाद भी उनको चैन नहीं मिल रही। गली और सड़क किनारे बंदरों के झुंड के कारण बच्चे अक्सर स्कूल जाने में लेट हो जाते हैं। लोगों की बंदरों के लिए सदन बनाने की मांग अब तक अधूरी है।
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घर से बाहर निकलना भी दूभर
बंदरों के कारण घर से बाहर निकलना भी दूभर हो गया है। लोग गलियों में कचरा और खाना फेंक रहे हैं, इस कारण बंदरों के झुंड खाने के चक्कर में वहां बैठे रहते हैं। इससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। -वेद प्रकाश निवासी कैंट क्षेत्र
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बंदरों की समस्या से परेशान

बंदरों ने जीना हराम कर रखा है, छत्त और गलियों में बंदरों के झुंड बैठे रहते हैं। कहीं जाना-जाना भी मुश्किल हो गया है। बंदरों के लिए सदन बनाए जाने चाहिए। बिशन तोमर, निवासी ढाबों मोहल्ला



. बरामदे में बैठना भी अब मुश्किल
घर के बरामदे में बैठना भी अब दूभर हो गया है। सर्दियों में धूप तक नहीं सेक पा रहे हैं। बंदरों के झुंड दिनभर घूमते रहते हैं। आस-पड़ोस में कहीं जाना हो तो किसी को साथ लेकर जाना पड़ रहा है। -सूर्या कांता ठाकुर, निवासी बों मोहल्ला



कॉलेज जाने के लिए हो जाती है देरी

अक्सर कॉलेज जाने में देरी हो जाती है। गलियों में बंदरों के झुंड बैठे रहते हैं। कई लोग जो खुले में भोजन फेंक देते हैं, उसके कारण वहां बंदर बैठे रहते हैं। -प्रियल ठाकुर, निवासी अमरपुर



----संवाद
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