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Sirmour News: शिलाई की कोटी उतरऊ पंचायत की प्रधान, तीन वार्ड सदस्य निलंबित
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विकास कार्यों में अनियमितताएं बरतने के आरोप, प्रशासन ने की कार्रवाई
पंचायत प्रधान ने निराधार ठहराए आरोप, बोलीं-नहीं हुई सही जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। विधानसभा क्षेत्र शिलाई की कोटी उतरऊ पंचायत की महिला प्रधान और तीन वार्ड सदस्यों को विकास कार्यों में अनियमितताएं पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई अमल में लाई है।
ऐसा पहली बार हुआ है कि जिले में किसी पंचायत की प्रधान के साथ एक साथ तीन वार्ड सदस्य भी
निलंबित हुए। अब तक पंचायत प्रधानों के निलंबन के कई मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन प्रधान के साथ वार्ड सदस्यों पर भी निलंबन की गाज गिरने का यह पहला मामला है।
उधर, निलंबित पंचायत प्रधान ने इस कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित करार दिया है। उन्होंने न केवल उन पर और वार्ड सदस्यों पर लगाए आरोपों को गलत ठहराया, बल्कि मामले की सही जांच न होने के भी जड़े हैं।
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जानकारी के अनुसार इन सभी जनप्रतिनिधियों को अगले आदेशों तक पंचायत के सभी कार्यों से बाहर कर दिया गया है। अगले आदेश तक चारों प्रतिनिधि पंचायत के किसी भी कार्य में भाग नहीं ले सकते हैं।
बताया जा रहा है कि पंचायत के लोगों ने विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे, जिनकी जांच प्रशासन की ओर से गठित टीम ने की। जानकारी मिली है कि पंचायत में छह विकास कार्यों में 11 लाख रुपये की अनियमितताएं बरती गई हैं। उसके बाद पंचायत प्रधान और वार्ड सदस्यों को नोटिस जारी किए गए थे। इसका संतोषजनक जवाब न मिलने पर अगले आदेश तक पंचायत प्रधान और तीनों वार्ड सदस्यों को निलंबित कर दिया है।
जिला पंचायत अधिकारी विक्रम ठाकुर ने मामले की पुष्टि की है। कहा कि अभी प्रारंभिक जांच के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इसके बाद मामले की नियमित जांच की जाएगी।
वहीं, निलंबित पंचायत प्रधान ऊषा चौहान ने बताया कि पंचायत में सारे कार्य प्रगति पर हैं। किसी भी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं बरती गईं है। सिर्फ जनप्रतिनिधियों पर जबरन दबाव बनाया जा रहा है। उन पर और वार्ड सदस्यों पर लगाए सारे आरोप निराधार हैं। इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी।
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पंचायत प्रधान ने निराधार ठहराए आरोप, बोलीं-नहीं हुई सही जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। विधानसभा क्षेत्र शिलाई की कोटी उतरऊ पंचायत की महिला प्रधान और तीन वार्ड सदस्यों को विकास कार्यों में अनियमितताएं पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई अमल में लाई है।
ऐसा पहली बार हुआ है कि जिले में किसी पंचायत की प्रधान के साथ एक साथ तीन वार्ड सदस्य भी
निलंबित हुए। अब तक पंचायत प्रधानों के निलंबन के कई मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन प्रधान के साथ वार्ड सदस्यों पर भी निलंबन की गाज गिरने का यह पहला मामला है।
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उधर, निलंबित पंचायत प्रधान ने इस कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित करार दिया है। उन्होंने न केवल उन पर और वार्ड सदस्यों पर लगाए आरोपों को गलत ठहराया, बल्कि मामले की सही जांच न होने के भी जड़े हैं।
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जानकारी के अनुसार इन सभी जनप्रतिनिधियों को अगले आदेशों तक पंचायत के सभी कार्यों से बाहर कर दिया गया है। अगले आदेश तक चारों प्रतिनिधि पंचायत के किसी भी कार्य में भाग नहीं ले सकते हैं।
बताया जा रहा है कि पंचायत के लोगों ने विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे, जिनकी जांच प्रशासन की ओर से गठित टीम ने की। जानकारी मिली है कि पंचायत में छह विकास कार्यों में 11 लाख रुपये की अनियमितताएं बरती गई हैं। उसके बाद पंचायत प्रधान और वार्ड सदस्यों को नोटिस जारी किए गए थे। इसका संतोषजनक जवाब न मिलने पर अगले आदेश तक पंचायत प्रधान और तीनों वार्ड सदस्यों को निलंबित कर दिया है।
जिला पंचायत अधिकारी विक्रम ठाकुर ने मामले की पुष्टि की है। कहा कि अभी प्रारंभिक जांच के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इसके बाद मामले की नियमित जांच की जाएगी।
वहीं, निलंबित पंचायत प्रधान ऊषा चौहान ने बताया कि पंचायत में सारे कार्य प्रगति पर हैं। किसी भी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं बरती गईं है। सिर्फ जनप्रतिनिधियों पर जबरन दबाव बनाया जा रहा है। उन पर और वार्ड सदस्यों पर लगाए सारे आरोप निराधार हैं। इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी।