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Sirmour News: सुबह-शाम कोहरे और सूखी ठंड से ठिठुर रहे लोग
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रविवार सुबह साढ़े छह बजे कोहरे के चलते पांवटा साहिब से भगानी जिला मुख्य मार्गपर छाया अंधेरा।
बारिश-बर्फबारी के लंबे इंतजार के बीच बिगड़ रहा स्वास्थ्य
डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीज का बढ़ रहा मर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। दिसंबर समाप्ति की ओर है, लेकिन अब तक न तो बारिश हुई है और न ही बर्फबारी। बीते कुछ दिनों से पांवटा दून सहित मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में हाड़ कंपा देने वाली सूखी ठंड पड़ रही है। खासकर मैदानी इलाकों में सुबह और रात के समय घना कोहरा छाया रहता है, जिससे वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ रही है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
सूखी ठंड के कारण लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। सर्दी, खांसी और सांस से संबंधित बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीजों को उपचार के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी भरत राणा, अनिल अत्री, सुभाष राणा, सलमान, यादवेंद्र सिंह, धर्मेंद्र ठाकुर, सुरेंद्र चौहान, पूजा शर्मा और रहमान ने बताया कि घने कोहरे के कारण आम लोगों की दिनचर्या और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। रविवार को दिन के समय आसमान कभी साफ तो कभी आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहा। पांवटा साहिब का अधिकतम तापमान करीब 21 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मैदानी और पर्वतीय, दोनों ही क्षेत्रों में लगातार सूखी ठंड बनी हुई है।
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घने कोहरे और ठंड को देखते हुए एसडीएम पांवटा जीएस चीमा सहित प्रशासन ने लोगों से वाहन चलाते समय सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की अपील की है।
कोहरा कर रहा लोगों को बीमार
प्रदीप शर्मा, सुनील चौधरी और रमन वर्मा ने बताया कि मैदानी क्षेत्रों में सुबह और रात के समय घना कोहरा छाया रहता है। इससे आम लोगों की दिनचर्या और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर बीमार पड़ रहे हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीजों को उपचार में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
व्यापारी और सैलानी मायूस
राधा शर्मा, बलविंद्र कौर, नीलम ठाकुर, कमलेश, तब्बसुम, मनीषा, तरन्नुम और प्रियंका शर्मा ने कहा कि दिसंबर का महीना खत्म होने जा रहा है, लेकिन अब तक बारिश और बर्फबारी नहीं हो सकी है। आमतौर पर दिसंबर तक पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ की सफेद चादर बिछ जाती थी। इस बार बर्फ नदारद है और केवल सूखी ठंड पड़ रही है। हर साल इस मौसम में सैलानी पहाड़ों की ओर रुख करते थे, जिससे कारोबार भी चलता था। इस बार सैलानी और स्थानीय व्यापारी दोनों मायूस हैं।
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डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीज का बढ़ रहा मर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। दिसंबर समाप्ति की ओर है, लेकिन अब तक न तो बारिश हुई है और न ही बर्फबारी। बीते कुछ दिनों से पांवटा दून सहित मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में हाड़ कंपा देने वाली सूखी ठंड पड़ रही है। खासकर मैदानी इलाकों में सुबह और रात के समय घना कोहरा छाया रहता है, जिससे वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ रही है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
सूखी ठंड के कारण लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। सर्दी, खांसी और सांस से संबंधित बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीजों को उपचार के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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स्थानीय निवासी भरत राणा, अनिल अत्री, सुभाष राणा, सलमान, यादवेंद्र सिंह, धर्मेंद्र ठाकुर, सुरेंद्र चौहान, पूजा शर्मा और रहमान ने बताया कि घने कोहरे के कारण आम लोगों की दिनचर्या और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। रविवार को दिन के समय आसमान कभी साफ तो कभी आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहा। पांवटा साहिब का अधिकतम तापमान करीब 21 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मैदानी और पर्वतीय, दोनों ही क्षेत्रों में लगातार सूखी ठंड बनी हुई है।
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घने कोहरे और ठंड को देखते हुए एसडीएम पांवटा जीएस चीमा सहित प्रशासन ने लोगों से वाहन चलाते समय सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की अपील की है।
कोहरा कर रहा लोगों को बीमार
प्रदीप शर्मा, सुनील चौधरी और रमन वर्मा ने बताया कि मैदानी क्षेत्रों में सुबह और रात के समय घना कोहरा छाया रहता है। इससे आम लोगों की दिनचर्या और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर बीमार पड़ रहे हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीजों को उपचार में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
व्यापारी और सैलानी मायूस
राधा शर्मा, बलविंद्र कौर, नीलम ठाकुर, कमलेश, तब्बसुम, मनीषा, तरन्नुम और प्रियंका शर्मा ने कहा कि दिसंबर का महीना खत्म होने जा रहा है, लेकिन अब तक बारिश और बर्फबारी नहीं हो सकी है। आमतौर पर दिसंबर तक पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ की सफेद चादर बिछ जाती थी। इस बार बर्फ नदारद है और केवल सूखी ठंड पड़ रही है। हर साल इस मौसम में सैलानी पहाड़ों की ओर रुख करते थे, जिससे कारोबार भी चलता था। इस बार सैलानी और स्थानीय व्यापारी दोनों मायूस हैं।