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ब्रह्म मुहूर्त में निकली देव प्रक्रिमा, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद
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परशुराम जयंती पर निर्वाण आश्रम रेणुकाजी में भंडारे का प्रसाद ग्रहण श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : NAHAN
ददाहू (सिरमौर)। भगवान श्री परशुराम की जन्मभूमि रेणुकाजी तीर्थ में परशुराम जयंती बड़ी श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाई गई। रेणुका विकास बोर्ड के सौजन्य से तीर्थ के मंदिर परिसर में हवन-यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। इसमें उपायुक्त सिरमौर राम कुमार गौतम, एसडीएम नाहन रजनेश कुमार, तहसीलदार ददाहू चेतन चौहान, ईटीओ सोमदत्त शर्मा, सीईओ दीपराम शर्मा और पूर्व सीईओ रवींद्र गुप्ता सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां डालीं।
इससे पूर्व रेणुका पहुंचे देवताओं को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र रेणुका झील की परिक्रमा करवा कर शाही स्नान के बाद मंदिरों मे पुन: स्थापित किया गया। यहां श्रद्धालुओं ने देवताओं के खुले मन से दर्शन करके उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। ढोल-नगाड़े और शंख-घंडीयाल की मधुर ध्वनि के साथ निकाली गई देव परिक्रमा के दौरान रेणुका घाटी भगवान परशुराम के जयघोष से गूंज उठी।
संत- महात्माओं सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने देव परिक्रमा मे भाग लिया।
परशुराम जयंती समारोह के अवसर पर रेणुकाजी तीर्थ स्थित निर्वाण आश्रम में अखंड रामायण पाठ के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गाया। गायत्री आश्रम में महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती ने परशुराम चालीसा के साथ ही भगवान परशुराम की महिमा का गुणगान भी किया।
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समारोह में ग्रामीण देवताओं ने भी भरी हाजिरी
भगवान परशुराम जयंती समारोह के उपलक्ष्य पर आसपास के ग्रामीण इलाकों के देवताओं ने भी रेणुकाजी में अपनी हाजिरी भरी। ग्रामीण पूरे उत्साह के साथ देवताओं को शाही स्नान के लिए रेणुका लेकर आए। यहां रात्रि जागरण के पश्चात सुबह शाही स्नान करके सभी देवताओं ने अपने मंदिरों की ओर प्रस्थान किया।
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भगवान परशुराम को लगाया सत्तू का भोग
भगवान परशुराम के प्रति गहरी आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं ने मंगलवार को अपने घरों मे विशेष तौर पर तैयार किए गए सत्तू का भगवान को भोग लगाया। वहीं किसानों ने अनाज की पंसेरी (पांच मुट्ठी अनाज) भगवान परशुराम के चरणों में अर्पित किया। कहा जाता है कि भगवान परशुराम को सत्तू बहुत ही प्रिय थे वह अक्सर सत्तू ही खाया करते हैं। ऐसे में श्रद्धालु उन्हें सत्तू का भोग लगा कर प्रसन्न करने का प्रयत्न करते हैं।
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भजन संध्या में सिमरन और प्रकाश ने किया मनोरंजन
भगवान परशुराम जयंती समारोह की पहली भजन संध्या सैनधार की बाल कलाकार सिमरन भारती व प्रकाश भारती के नाम रही। प्रकाश भारती ने भगवान परशुराम व माता रेणुका पर आधारित अनेकों भजन व गीत सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने रेणुका माई ऐ महामाइए, चदरिया झिनी रे झीनी व श्याम सपनों मे आता क्यों नहीं आदि अनेकों भजनों की प्रस्तुति से समां बांधा। बाल कलाकार सिमरन भारती ने जन्म तेरा बातों ही बीत गयो, एक राधा एक मीरा व दमा दम मस्त कलंदर प्रस्तुत किया।
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इससे पूर्व रेणुका पहुंचे देवताओं को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र रेणुका झील की परिक्रमा करवा कर शाही स्नान के बाद मंदिरों मे पुन: स्थापित किया गया। यहां श्रद्धालुओं ने देवताओं के खुले मन से दर्शन करके उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। ढोल-नगाड़े और शंख-घंडीयाल की मधुर ध्वनि के साथ निकाली गई देव परिक्रमा के दौरान रेणुका घाटी भगवान परशुराम के जयघोष से गूंज उठी।
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संत- महात्माओं सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने देव परिक्रमा मे भाग लिया।
परशुराम जयंती समारोह के अवसर पर रेणुकाजी तीर्थ स्थित निर्वाण आश्रम में अखंड रामायण पाठ के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गाया। गायत्री आश्रम में महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती ने परशुराम चालीसा के साथ ही भगवान परशुराम की महिमा का गुणगान भी किया।
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समारोह में ग्रामीण देवताओं ने भी भरी हाजिरी
भगवान परशुराम जयंती समारोह के उपलक्ष्य पर आसपास के ग्रामीण इलाकों के देवताओं ने भी रेणुकाजी में अपनी हाजिरी भरी। ग्रामीण पूरे उत्साह के साथ देवताओं को शाही स्नान के लिए रेणुका लेकर आए। यहां रात्रि जागरण के पश्चात सुबह शाही स्नान करके सभी देवताओं ने अपने मंदिरों की ओर प्रस्थान किया।
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भगवान परशुराम को लगाया सत्तू का भोग
भगवान परशुराम के प्रति गहरी आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं ने मंगलवार को अपने घरों मे विशेष तौर पर तैयार किए गए सत्तू का भगवान को भोग लगाया। वहीं किसानों ने अनाज की पंसेरी (पांच मुट्ठी अनाज) भगवान परशुराम के चरणों में अर्पित किया। कहा जाता है कि भगवान परशुराम को सत्तू बहुत ही प्रिय थे वह अक्सर सत्तू ही खाया करते हैं। ऐसे में श्रद्धालु उन्हें सत्तू का भोग लगा कर प्रसन्न करने का प्रयत्न करते हैं।
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भजन संध्या में सिमरन और प्रकाश ने किया मनोरंजन
भगवान परशुराम जयंती समारोह की पहली भजन संध्या सैनधार की बाल कलाकार सिमरन भारती व प्रकाश भारती के नाम रही। प्रकाश भारती ने भगवान परशुराम व माता रेणुका पर आधारित अनेकों भजन व गीत सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने रेणुका माई ऐ महामाइए, चदरिया झिनी रे झीनी व श्याम सपनों मे आता क्यों नहीं आदि अनेकों भजनों की प्रस्तुति से समां बांधा। बाल कलाकार सिमरन भारती ने जन्म तेरा बातों ही बीत गयो, एक राधा एक मीरा व दमा दम मस्त कलंदर प्रस्तुत किया।

परशुराम जयंती पर रेणुकाजी में हवन यज्ञ में आहूति डालते उपायुक्त आरके गौतम। संवाद- फोटो : NAHAN

परशुराम जयंती पर रेणुकाजी मंदिर परिसर में प्रसाद बांटते स्थानीय व्यापारी। संवाद- फोटो : NAHAN

नाहन में परशुराम जयंती पर शोभायात्रा निकालते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : NAHAN