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Sirmour News: जनवरी की बजाए अप्रैल महीने में करवाए जाएं पंचायत चुनाव
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माया राम शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति हिमाचल प्रदेश।
सचित्र-
प्रदेश अध्यक्ष बोले, ठंड में कर्मचारियों को झेलनी पड़ती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन/शिलाई(सिरमौर)। पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग से प्रस्तावित पंचायतीराज चुनाव को जनवरी महीने में न करवाकर अप्रैल माह में करवाने की मांग की है। प्रेस को जारी बयान में प्रदेश अध्यक्ष मायाराम शर्मा ने कहा कि हिमाचल में जनवरी महीने में ज्यादा ठंड रहती है, जिसकी वजह से चुनाव ड्यूटी में कार्यरत कर्मचारियों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में दिसंबर और जनवरी महीने में शीत लहर का प्रकोप रहता है। इस वजह से चुनावी प्रक्रिया पूरी करवाने में बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक पोलिंग पार्टी को तीन पंचायत के चुनाव पूरे करवाने होते हैं। जो जटिल प्रक्रिया है, क्योंकि परिणाम भी उसी दिन जारी करना पड़ता है, उसके बाद अगले पंचायत चुनाव के लिए निकलना पड़ता है। जबकि सर्दियों में दिन छोटे होते हैं, जिसकी वजह से भी चुनाव प्रक्रिया में बाधा बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि दिसंबर माह में चुनाव की प्रक्रिया की वजह से शीतकालीन पाठशालाओं में बच्चों की वार्षिक परीक्षा का आयोजन होता है वह भी बाधित होती है, क्योंकि चुनाव में अधिकतर अध्यापकों की ड्यूटी लगती है। इसकी वजह से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है और परीक्षाएं भी सही ढंग से आयोजित नहीं हो पाती हैं।
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उन्होंने और प्रदेश के सभी कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग से मांग की कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया जनवरी महीने में न करवाकर अप्रैल में करवाई जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और न ही चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को शीतलहर की वजह से परेशानी का सामना करना पड़े।
-- -संवाद
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प्रदेश अध्यक्ष बोले, ठंड में कर्मचारियों को झेलनी पड़ती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन/शिलाई(सिरमौर)। पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग से प्रस्तावित पंचायतीराज चुनाव को जनवरी महीने में न करवाकर अप्रैल माह में करवाने की मांग की है। प्रेस को जारी बयान में प्रदेश अध्यक्ष मायाराम शर्मा ने कहा कि हिमाचल में जनवरी महीने में ज्यादा ठंड रहती है, जिसकी वजह से चुनाव ड्यूटी में कार्यरत कर्मचारियों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में दिसंबर और जनवरी महीने में शीत लहर का प्रकोप रहता है। इस वजह से चुनावी प्रक्रिया पूरी करवाने में बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक पोलिंग पार्टी को तीन पंचायत के चुनाव पूरे करवाने होते हैं। जो जटिल प्रक्रिया है, क्योंकि परिणाम भी उसी दिन जारी करना पड़ता है, उसके बाद अगले पंचायत चुनाव के लिए निकलना पड़ता है। जबकि सर्दियों में दिन छोटे होते हैं, जिसकी वजह से भी चुनाव प्रक्रिया में बाधा बनी रहती है।
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उन्होंने कहा कि दिसंबर माह में चुनाव की प्रक्रिया की वजह से शीतकालीन पाठशालाओं में बच्चों की वार्षिक परीक्षा का आयोजन होता है वह भी बाधित होती है, क्योंकि चुनाव में अधिकतर अध्यापकों की ड्यूटी लगती है। इसकी वजह से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है और परीक्षाएं भी सही ढंग से आयोजित नहीं हो पाती हैं।
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उन्होंने और प्रदेश के सभी कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग से मांग की कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया जनवरी महीने में न करवाकर अप्रैल में करवाई जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और न ही चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को शीतलहर की वजह से परेशानी का सामना करना पड़े।