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Sirmour News: महिला से लिए सात लाख रुपये लौटाने के आदेश, 9 प्रतिशत ब्याज समेत होगी वसूली
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने एक महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए शिमला जिला के कुपवीं निवासी आरोपी मोहन लाल को सात लाख रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश उपासना शर्मा ने अदालत में आरोपी के लगातार गैरहाजिरी के चलते यह एकतरफा (एक्स-पार्टी) निर्णय सुनाया है।
यह मामला साल 2022 का है। संगड़ाह क्षेत्र की निवासी बेलो देवी ने अदालत में दायर वसूली के मुकदमे में बताया कि परिचित होने के कारण उन्होंने मोहन लाल पर विश्वास किया। आरोप है कि आरोपी ने हस्ताक्षरित चेकबुक अपने पास रख ली और बाद में चेकों का दुरुपयोग कर उसके खाते से लाखों रुपये निकाल लिए। महिला ने पुलिस अधीक्षक को भी इसकी शिकायत दर्ज करवाई थी। बाद में आरोपी ने पुलिस के समक्ष 7,00,000 लाख रुपये लौटाने की बात स्वीकार करते हुए हलफनामा भी दिया, लेकिन तय समय तक रकम वापस नहीं की।
सुनवाई के दौरान वादी ने बैंक खाते का विवरण, पुलिस शिकायत, हलफनामा तथा अन्य दस्तावेज अदालत में पेश किए। अदालत ने माना कि बैंक रिकॉर्ड और हलफनामे से यह साबित होता है कि आरोपी पर सात लाख रुपये की देनदारी थी। आरोपी की ओर से कोई प्रतिवाद या साक्ष्य पेश नहीं किए गए। अदालत ने निर्णय में वादी के पक्ष में डिक्री पारित करते हुए आदेश दिया कि आरोपी सात लाख रुपये के साथ मुकदमा दायर होने की तारीख से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और मुकदमे का खर्च भी अदा करेगा।-- -- --
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नाहन (सिरमौर)। अदालत ने एक महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए शिमला जिला के कुपवीं निवासी आरोपी मोहन लाल को सात लाख रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश उपासना शर्मा ने अदालत में आरोपी के लगातार गैरहाजिरी के चलते यह एकतरफा (एक्स-पार्टी) निर्णय सुनाया है।
यह मामला साल 2022 का है। संगड़ाह क्षेत्र की निवासी बेलो देवी ने अदालत में दायर वसूली के मुकदमे में बताया कि परिचित होने के कारण उन्होंने मोहन लाल पर विश्वास किया। आरोप है कि आरोपी ने हस्ताक्षरित चेकबुक अपने पास रख ली और बाद में चेकों का दुरुपयोग कर उसके खाते से लाखों रुपये निकाल लिए। महिला ने पुलिस अधीक्षक को भी इसकी शिकायत दर्ज करवाई थी। बाद में आरोपी ने पुलिस के समक्ष 7,00,000 लाख रुपये लौटाने की बात स्वीकार करते हुए हलफनामा भी दिया, लेकिन तय समय तक रकम वापस नहीं की।
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सुनवाई के दौरान वादी ने बैंक खाते का विवरण, पुलिस शिकायत, हलफनामा तथा अन्य दस्तावेज अदालत में पेश किए। अदालत ने माना कि बैंक रिकॉर्ड और हलफनामे से यह साबित होता है कि आरोपी पर सात लाख रुपये की देनदारी थी। आरोपी की ओर से कोई प्रतिवाद या साक्ष्य पेश नहीं किए गए। अदालत ने निर्णय में वादी के पक्ष में डिक्री पारित करते हुए आदेश दिया कि आरोपी सात लाख रुपये के साथ मुकदमा दायर होने की तारीख से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और मुकदमे का खर्च भी अदा करेगा।
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