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सुरेश ठाकुर अमर रहे के जयघोषों से गूंजा कत्याड़
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पति के अंतिम दर्शन के दौरान रोते-बिलखते परिजन व बेसुध पत्नी।
- फोटो : NAHAN
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नाहन (सिरमौर)। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर के पास सड़क हादसे में जान गंवाने वाले धारटीधार क्षेत्र के जवान सुरेश ठाकुर का पैतृक गांव कत्याड़ में पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान से साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में क्षेत्र के सैकड़ों लोग शामिल हुए। हवलदार सुरेश ठाकुर की चिता को उनके बड़े बेटे विवेक ठाकुर ने मुखाग्नि दी।
इससे पहले जवान की पार्थिव देह जिला मुख्यालय नाहन से पूरे सम्मान के साथ पैतृक गांव लाई गई। जैसे ही पार्थिव देह को अंतिम दर्शनों को रखा गया, महिलाओं और परिजनों की चीख-पुकारों से लोगों का दिल दहल गया। करीब पौने घंटे तक पार्थिव देह को अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया। इसके बाद उनको अंतिम संस्कार के लिए श्मशानघाट ले जाया गया। सेना के जवानों और पुलिस की टुकड़ी सहित जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
इस दौरान सुरेश ठाकुर अमर रहे, भारत माता की जय और वंदे मातरम के जयघोषों से क्षेत्र गूंज उठा। बता दें कि बीते मंगलवार उधमपुर से श्रीनगर जाते समय सेना के काफिले में शामिल एक वाहन दुर्घटना का शिकार हो गया था। हादसे में कत्याड के हवलदार सुरेश ठाकुर की मौत हो गई थी। इसके बाद उधमपुर में सेना यूनिट के अधिकारियों और जवानों ने उन्हें सैन्य सम्मान दिया। बुधवार रात जवान की पार्थिव देह जिला मुख्यालय नाहन लाई गई। यहां रात को मेडिकल कालेज में पूरे सम्मान के साथ रखा गया। वीरवार सुबह ही उनकी पार्थिव देह को सैन्य सम्मान के साथ पैतृक गांव लाया गया। इस दौरान सैकड़ों लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। अंतिम विदाई में नाहन के विधायक डॉ. राजीव बिंदल, डीसी डा. आरके परूथी, एएसपी बबीता राणा, एसडीएम विवेक शर्मा, सैनिक वेलफेयर बोर्ड के उपनिदेशक मेजर दीपक धवन सहित सेना के अधिकारी और जवानों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बता दें कि दिवंगत सुरेश ठाकुर 155 टेरिटोरियल आर्मी में बतौर हवलदार तैनात थे। उनकी अचानक मौत की सूचना मिलने के बाद पूरे धारटीधार क्षेत्र में शोक की लहर है।
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देखने दो, थोड़ी देर रुक जाओ
घर पर अंतिम दर्शनों के लिए रखी पार्थिव देह को उठाते ही पत्नी शीला देवी ने सेना अधिकारियों से कहा कि देखने दो, थोड़ी देर रुक जाओ। इसके बाद सेना अधिकारियों और प्रशासन ने उन्हें अंतिम दर्शनों के लिए थोड़ा और समय दिया। इस दौरान शीला देवी बेसुध भी हो गईं। उनके बेटे विवेक ठाकुर और आर्यन ठाकुर सहित उनके माता-पिता और भाई बंधु भी फूट-फूट कर रोये। दिवंगत सुरेश ठाकुर अगले साल ही सेना से सेवानिवृत होने थे। इससे पहले ही वे हादसे का शिकार हो गए।
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इससे पहले जवान की पार्थिव देह जिला मुख्यालय नाहन से पूरे सम्मान के साथ पैतृक गांव लाई गई। जैसे ही पार्थिव देह को अंतिम दर्शनों को रखा गया, महिलाओं और परिजनों की चीख-पुकारों से लोगों का दिल दहल गया। करीब पौने घंटे तक पार्थिव देह को अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया। इसके बाद उनको अंतिम संस्कार के लिए श्मशानघाट ले जाया गया। सेना के जवानों और पुलिस की टुकड़ी सहित जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
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इस दौरान सुरेश ठाकुर अमर रहे, भारत माता की जय और वंदे मातरम के जयघोषों से क्षेत्र गूंज उठा। बता दें कि बीते मंगलवार उधमपुर से श्रीनगर जाते समय सेना के काफिले में शामिल एक वाहन दुर्घटना का शिकार हो गया था। हादसे में कत्याड के हवलदार सुरेश ठाकुर की मौत हो गई थी। इसके बाद उधमपुर में सेना यूनिट के अधिकारियों और जवानों ने उन्हें सैन्य सम्मान दिया। बुधवार रात जवान की पार्थिव देह जिला मुख्यालय नाहन लाई गई। यहां रात को मेडिकल कालेज में पूरे सम्मान के साथ रखा गया। वीरवार सुबह ही उनकी पार्थिव देह को सैन्य सम्मान के साथ पैतृक गांव लाया गया। इस दौरान सैकड़ों लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। अंतिम विदाई में नाहन के विधायक डॉ. राजीव बिंदल, डीसी डा. आरके परूथी, एएसपी बबीता राणा, एसडीएम विवेक शर्मा, सैनिक वेलफेयर बोर्ड के उपनिदेशक मेजर दीपक धवन सहित सेना के अधिकारी और जवानों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बता दें कि दिवंगत सुरेश ठाकुर 155 टेरिटोरियल आर्मी में बतौर हवलदार तैनात थे। उनकी अचानक मौत की सूचना मिलने के बाद पूरे धारटीधार क्षेत्र में शोक की लहर है।
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देखने दो, थोड़ी देर रुक जाओ
घर पर अंतिम दर्शनों के लिए रखी पार्थिव देह को उठाते ही पत्नी शीला देवी ने सेना अधिकारियों से कहा कि देखने दो, थोड़ी देर रुक जाओ। इसके बाद सेना अधिकारियों और प्रशासन ने उन्हें अंतिम दर्शनों के लिए थोड़ा और समय दिया। इस दौरान शीला देवी बेसुध भी हो गईं। उनके बेटे विवेक ठाकुर और आर्यन ठाकुर सहित उनके माता-पिता और भाई बंधु भी फूट-फूट कर रोये। दिवंगत सुरेश ठाकुर अगले साल ही सेना से सेवानिवृत होने थे। इससे पहले ही वे हादसे का शिकार हो गए।