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डिमार्केशन न होने से खनन माफिया सक्रिय

Thu, 07 Apr 2016 10:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नाहन
ब्यूरो/अमर उजाला, नाहन Updated Thu, 07 Apr 2016 10:34 PM IST
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हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सीमा पर नदी क्षेत्र में अभी तक राज्य स्तरीय सीमांकन नहीं हो सका है। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने अपनी सीमा में डिमार्केशन करवाई है, लेकिन पड़ोसी राज्य के खननकारी इसको नहीं मानते। इस कारण राज्य सीमा में यमुना व टौंस नदी के 30 किलोमीटर क्षेत्र में उत्तराखंड से अवैध खनन करने वाले हिमाचल क्षेत्र में घुस आते हैं।

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पांवटा की राज्य सीमा अवैध खनन के लिए संवेदनशील क्षेत्र में है। यहां पर चार राज्यों के खनन माफिया अवैध खनन कर खूब कमाई कर रहे हैं। इसमें प्रदेश सरकार को मिलने वाली करोड़ों की रायल्टी हर वर्ष कम हो रही है। हिमाचल व उत्तराखंड राज्यों की सीमा नदी क्षेत्र से लगती है। इसमें भारी मात्रा में रेत बजरी समेत खनन संपदा है।
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इस पर उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब व हरियाणा के अवैध खनन माफिया की नजर रहती है। करीब एक दशक पहले से दोनों राज्यों की राज्य स्तरीय सीमा निर्धारण (डिमार्केशन) कर 30 किमी क्षेत्र में बाउंड्री करनेे की बात उठती रही है।
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उधर, जिला खनन अधिकारी सुरेश भारद्वाज ने कहा कि अपने क्षेत्र की डिमार्केशन करवा ली थी, लेकिन नदी क्षेत्र में जल स्तर बढ़ने के कारण पिल्लर स्थापित नहीं हो सकते। इससे कई बार अवैध खननकारी क्षेत्र की सीमा में घुस जाते हैं।

जिला में जब खनन माइन व क्रशर कार्य बेहतर स्थिति में था तो सरकार के खाते में हर वर्ष 12 से 15 करोड़ राल्यटी जाती थी। अब यही राल्यटी राशि 8 करोड़ पहुंच गई है। पर्यावरण मंजूरी शर्त के कारण अधिकतर माइन बंद है। कई स्टोन क्रशर भी बंद है। सिरमौर में कुल 15 स्टोन क्रशर में से मंजूरी मिलने पर 9 शुरू हो गए हैं। कुछ क्रशरों को जल्द मंजूरी मिलने वाली है।

जिला सिरमौर में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में एक वर्ष के भीतर 2200 से अधिक मामले पकड़े गए। इसमें, जिला खनन विभाग व पुलिस विभाग सबसे अग्रणी है। जिला खनन अधिकारी सुरेश भारद्वाज ने कहा कि एक वर्ष के भीतर विभाग ने 1288 मामले अवैध खनन के पकड़े हैं। इसमें से साढ़े 68 लाख जुर्माना राशि वसूली गई। वहीं आरओ पांवटा कल्याण सिंह ने कहा कि वन विभाग की टीम ने वर्ष भर में 34 अवैध खनन मामले में ढाई लाख राशि वसूली।


उधर, एएसपी सिरमौर विनोद कुमार धीमान ने कहा कि 1 मार्च, 2015 से 31 मार्च 2016 तक एक वर्ष के भीतर 867 अवैध खनन के मामले पकड़े गए। इसमें खनन अधिनियम के तहत करीब 50 लाख जुर्माना राशि वसूली गई। 

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