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Sirmour News: रेणुकाजी झील का अध्ययन करके लौटे झील विशेषज्ञ
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कॉमन के लिए
रेणुकाजी झील का अध्ययन करके लौटे झील विशेषज्ञ
अग्रिम भाग से एक फीट तक निकली जा सकती है गाद
प्राकृतिक सौंदर्य को बरकरार रखने के लिए झील का रखरखाव जरूरी
मशीनों की बजाय मानवीय तौर तरीकों से किए जाए उपाय
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। प्रदेश की सबसे बड़ी और एकमात्र मानवाकार प्राकृतिक रेणुका झील का अध्ययन करने पहुंचे लेक मैन ऑफ इंडिया (झील विशेषज्ञ) आनंद मलिगावार्ड ने कहा कि ऐतिहासिक रेणुका झील का स्वरूप प्राकृतिक है। इसका अंतिम छोर (मां के सिर वाला हिस्सा) ऊंचा उठा हुआ और आगे का हिस्सा गहरा है।
झील के प्राकृतिक स्वरूप को बरकरार रखने के वैज्ञानिक उपायों से ही इसका रखरखाव किए जाने की आवश्यकता है। इसके स्वरूप से किसी भी तरह की छेड़छाड़ करना भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है लेकिन झील के अग्रणी भाग (मां के चरणों) पर स्पष्ट छलक रही गाद को मानवीय तौर पर सामाजिक व धार्मिक संगठनों या अन्य संसाधनों से एक फीट तक निकाला जा सकता है। इसका झील पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
प्रदेश सरकार के आदेशों के उपरांत वन्य प्राणी विभाग के आग्रह पर रेणुका पहुंचे लेक मैन ऑफ इंडिया ने बताया कि रेणुका झील के तमाम पहलुओं का अध्ययन करके इसके प्राकृतिक व आध्यात्मिक तौर पर संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है। इसके तहत ही प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि झील के अंदर जगह-जगह गिरे पड़े पेड़ों, जड़ों व टहनियों को निकालने व इससे झील में सूखे पत्ते आदि को गिरने से रोकने के उपाय करने की भी आवश्यकता है।
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परशुराम तालाब से भी एक फीट तक कीचड़ को निकाला जा सकता है। यह तमाम कार्य मशीनों या किसी केमिकल आदि से नहीं अपितु मानवीय तौर पर किए जाएं। उन्होंने कहा कि रेणुका झील के प्राकृतिक स्वरूप को बरकरार रखने के लिए वैज्ञानिक व आध्यात्मिक दोनों स्तर पर एक साथ उपायों को किया जाना ही बेहतर है। झील के संरक्षण को लेकर क्या करना और क्या नहीं करना उसकी रिपोर्ट तैयार करके हिमाचल सरकार व वन्य प्राणी विभाग को एक सप्ताह में सौंप दी जाएगी।
-- बाक्स-- -
समिति के पदाधिकारियों ने भी की मुलाकात
वन्य प्राणी विभाग के सौजन्य से रेणुका पहुंचे लेक मैन आनंद मलिगावार्ड से मंगलवार को मां रेणुका सेवा समिति के पदाधिकारियों ने मुलाकात करके उन्हें रेणुका झील की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। समिति की ओर से कार सेवा के माध्यम से किए गए कार्यों की जानकारी प्रदान की।
समिति के अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर व तकनीकी सलाहकार कर्मचंद ने बताया कि लेक मैन को ऐतिहासिक व धार्मिक झील के संरक्षण को लेकर समिति की ओर से किए प्रयासों से अवगत करवाया गया है। उन्हें समिति के प्रयासों की सराहना करते है झील के अग्रिम भाग से एक फीट तक गाद (दलदल) निकालने की हामी भरी है।
....संवाद
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रेणुकाजी झील का अध्ययन करके लौटे झील विशेषज्ञ
अग्रिम भाग से एक फीट तक निकली जा सकती है गाद
प्राकृतिक सौंदर्य को बरकरार रखने के लिए झील का रखरखाव जरूरी
मशीनों की बजाय मानवीय तौर तरीकों से किए जाए उपाय
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। प्रदेश की सबसे बड़ी और एकमात्र मानवाकार प्राकृतिक रेणुका झील का अध्ययन करने पहुंचे लेक मैन ऑफ इंडिया (झील विशेषज्ञ) आनंद मलिगावार्ड ने कहा कि ऐतिहासिक रेणुका झील का स्वरूप प्राकृतिक है। इसका अंतिम छोर (मां के सिर वाला हिस्सा) ऊंचा उठा हुआ और आगे का हिस्सा गहरा है।
झील के प्राकृतिक स्वरूप को बरकरार रखने के वैज्ञानिक उपायों से ही इसका रखरखाव किए जाने की आवश्यकता है। इसके स्वरूप से किसी भी तरह की छेड़छाड़ करना भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है लेकिन झील के अग्रणी भाग (मां के चरणों) पर स्पष्ट छलक रही गाद को मानवीय तौर पर सामाजिक व धार्मिक संगठनों या अन्य संसाधनों से एक फीट तक निकाला जा सकता है। इसका झील पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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प्रदेश सरकार के आदेशों के उपरांत वन्य प्राणी विभाग के आग्रह पर रेणुका पहुंचे लेक मैन ऑफ इंडिया ने बताया कि रेणुका झील के तमाम पहलुओं का अध्ययन करके इसके प्राकृतिक व आध्यात्मिक तौर पर संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है। इसके तहत ही प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि झील के अंदर जगह-जगह गिरे पड़े पेड़ों, जड़ों व टहनियों को निकालने व इससे झील में सूखे पत्ते आदि को गिरने से रोकने के उपाय करने की भी आवश्यकता है।
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परशुराम तालाब से भी एक फीट तक कीचड़ को निकाला जा सकता है। यह तमाम कार्य मशीनों या किसी केमिकल आदि से नहीं अपितु मानवीय तौर पर किए जाएं। उन्होंने कहा कि रेणुका झील के प्राकृतिक स्वरूप को बरकरार रखने के लिए वैज्ञानिक व आध्यात्मिक दोनों स्तर पर एक साथ उपायों को किया जाना ही बेहतर है। झील के संरक्षण को लेकर क्या करना और क्या नहीं करना उसकी रिपोर्ट तैयार करके हिमाचल सरकार व वन्य प्राणी विभाग को एक सप्ताह में सौंप दी जाएगी।
समिति के पदाधिकारियों ने भी की मुलाकात
वन्य प्राणी विभाग के सौजन्य से रेणुका पहुंचे लेक मैन आनंद मलिगावार्ड से मंगलवार को मां रेणुका सेवा समिति के पदाधिकारियों ने मुलाकात करके उन्हें रेणुका झील की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। समिति की ओर से कार सेवा के माध्यम से किए गए कार्यों की जानकारी प्रदान की।
समिति के अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर व तकनीकी सलाहकार कर्मचंद ने बताया कि लेक मैन को ऐतिहासिक व धार्मिक झील के संरक्षण को लेकर समिति की ओर से किए प्रयासों से अवगत करवाया गया है। उन्हें समिति के प्रयासों की सराहना करते है झील के अग्रिम भाग से एक फीट तक गाद (दलदल) निकालने की हामी भरी है।
....संवाद