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मजदूरों का न्यूनतम वेतन 18 हजार किया जाए
ब्यूराो, नाहन (सिरमौर)।
Updated Thu, 19 Jan 2017 10:42 PM IST
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नाहन (सिरमौर)। सीटू के आह्वान पर वीरवार को मजदूर एवं किसान संगठनों ने जिला मुख्यालय नाहन में रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान में जिला भर से आए मजदूरों एवं किसानों ने नाहन बस स्टैंड में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं, केंद्र व प्रदेश सरकार की मजदूर व किसान विरोधी नीतियों पर जमकर हल्ला बोला।
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प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिला महासचिव राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि देश व प्रदेश में बनने वाली कोई भी सरकार मजदूरों व किसानों के हित में आज तक कोई बिल लेकर नहीं आई है। भारत सरकार व प्रदेश सरकार द्वारा लगातार किसान-मजदूर विरोधी नीतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। लगातार ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं जिससे पूंजीपतियों को लाभ हो रहा है।
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ठाकुर ने कहा कि हाल ही में भारत सरकार ने देश में 500 व 1000 की नोटबंदी की। बिना रणनीति तैयार कर जल्दबाजी में लिए इस फैसले ने मजदूरों व किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। लाखों उद्योगों में लोगों का रोजगार छूट गया। वहीं, किसानों के उत्पादों को खरीदने के लिए खरीदार नहीं मिले जिसके चलते किसानों को अपने उत्पाद बीच सड़क में फेंक कर प्रदर्शन करना पड़ा।
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उन्होंने कहा कि देश में किसानों को अपनी फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है। इस कारण अधिकतर किसानों की आर्थिक दशा बद से बदतर हो गई है। राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि किसानों व मजदूरों द्वारा आज देशभर में एक साथ आकर प्रदर्शन किया जा रहा है। यह एक चेतावनी है। यदि दोनों सरकारें अब भी नहीं सुधरी तो आगे इस प्रदर्शन को व्यापक रूप प्रदान किया जाएगा।
प्रदर्शन में मौजूद राजेंद्र ठाकुर, आशीष कुमार, धनीराम शर्मा, पुरुषोत्तम, कश्मीर सिंह, तेजपाल सिंह, हीरा सिंह, किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा, जिलाध्यक्ष रमेश वर्मा, महासचिव गुरविंद्र सिंह, बलदेव सिंह आदि ने इस दौरान मजदूरों का न्यूनतम वेतन 18000 रुपये, किसानों के उत्पाद लाभकारी मूल्यों पर खरीदने, मनरेगा के तहत सभी जॉब कार्ड को 200 दिन का रोजगार देने, खाद्य सुरक्षा को देश में संवैधानिक करने तथा फसल से संबंधित छोटे लोन को माफ करने की मांग की गई।