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Sirmour News: केसीसी ऋण न चुकाने पर किसान से 1.63 लाख रुपये की वसूली के आदेश
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सिविल अदालत का फैसला, किसान छह महीने के भीतर यूको बैंक के पक्ष में जमा करवाए बकाया राशि
संवाद न्यूज एजेंसी -3
नाहन (सिरमौर)। सिविल अदालत ने यूको बैंक की ओर से दायर वसूली वाद में बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रतिवादी को बैंक का बकाया 1,63,574 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के निर्देश दिए हैं। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो गिरवी रखी गई संपत्ति की बिक्री कर राशि की वसूली की जा सकेगी।
यह मामला वर्ष 2008 में यूको बैंक राजगढ़ शाखा का है। प्रतिवादी राजेंद्र सिंह ने कृषि कार्य के लिए यूको बैंक से 1 लाख रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण लिया था। ऋण के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए तथा एक व्यक्ति ने गारंटर के रूप में भी जिम्मेदारी ली। बैंक का आरोप था कि समय पर ऋण का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद कानूनी नोटिस और रिकॉल नोटिस जारी किए गए। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ और बाद में अदालत में वसूली का मुकदमा दायर किया गया।
सुनवाई के दौरान बैंक ने ऋण आवेदन, गारंटी पत्र, बंधक संबंधी दस्तावेज, कानूनी नोटिस और खाते का विवरण सहित विभिन्न साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। दूसरी ओर, प्रतिवादी अपनी ओर से कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। सिविल जज रितु सिन्हा ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बैंक का दावा स्वीकार करते हुए वसूली की डिक्री पारित की। अदालत ने आदेश दिया कि प्रतिवादी छह माह के भीतर बकाया राशि का भुगतान करें।-- -- -- -- -- -
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संवाद न्यूज एजेंसी -3
नाहन (सिरमौर)। सिविल अदालत ने यूको बैंक की ओर से दायर वसूली वाद में बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रतिवादी को बैंक का बकाया 1,63,574 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के निर्देश दिए हैं। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो गिरवी रखी गई संपत्ति की बिक्री कर राशि की वसूली की जा सकेगी।
यह मामला वर्ष 2008 में यूको बैंक राजगढ़ शाखा का है। प्रतिवादी राजेंद्र सिंह ने कृषि कार्य के लिए यूको बैंक से 1 लाख रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण लिया था। ऋण के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए तथा एक व्यक्ति ने गारंटर के रूप में भी जिम्मेदारी ली। बैंक का आरोप था कि समय पर ऋण का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद कानूनी नोटिस और रिकॉल नोटिस जारी किए गए। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ और बाद में अदालत में वसूली का मुकदमा दायर किया गया।
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सुनवाई के दौरान बैंक ने ऋण आवेदन, गारंटी पत्र, बंधक संबंधी दस्तावेज, कानूनी नोटिस और खाते का विवरण सहित विभिन्न साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। दूसरी ओर, प्रतिवादी अपनी ओर से कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। सिविल जज रितु सिन्हा ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बैंक का दावा स्वीकार करते हुए वसूली की डिक्री पारित की। अदालत ने आदेश दिया कि प्रतिवादी छह माह के भीतर बकाया राशि का भुगतान करें।
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