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Sirmour News: चेक बाउंस मामले में आरोपी को एक साल की सजा
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साल 2017 का मामला, घरेलू जरूरतों के लिए दोषी ने उधार लिए थे 3 लाख रुपये
न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। करीब नौ साले पहले तहसील शिलाई निवासी को दोस्ताना ऋण न चुकाना महंगा पड़ा। अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी सूरत सिंह को दोषी ठहराते हुए एक साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़ित पक्ष को 4 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि मुआवजा न देने की स्थिति में दोषी को दो माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
तहसील शिलाई निवासी शिकायतकर्ता बाबू राम ने अदालत को बताया कि सूरत सिंह ने अप्रैल 2017 में घरेलू जरूरतों के लिए 3 लाख रुपये उधार लिए थे। उसने एक साल में उधार राशि चुकाने का वादा किया था लेकिन आरोपी निर्धारित तिथि तक देनदारी का भुगतान करने में विफल रहा। उसने 22 अप्रैल 2024 को उक्त राशि का एक चेक जारी किया लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने न तो रकम लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फैसले में कहा कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा।
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न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। करीब नौ साले पहले तहसील शिलाई निवासी को दोस्ताना ऋण न चुकाना महंगा पड़ा। अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी सूरत सिंह को दोषी ठहराते हुए एक साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़ित पक्ष को 4 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि मुआवजा न देने की स्थिति में दोषी को दो माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
तहसील शिलाई निवासी शिकायतकर्ता बाबू राम ने अदालत को बताया कि सूरत सिंह ने अप्रैल 2017 में घरेलू जरूरतों के लिए 3 लाख रुपये उधार लिए थे। उसने एक साल में उधार राशि चुकाने का वादा किया था लेकिन आरोपी निर्धारित तिथि तक देनदारी का भुगतान करने में विफल रहा। उसने 22 अप्रैल 2024 को उक्त राशि का एक चेक जारी किया लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने न तो रकम लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फैसले में कहा कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा।
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