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Sirmour News: टमटम मशीनों से पुल की तह तक निकाली जा रही रेत और बजरी
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यमुना नदी पर बने नावघाट- विकासनगर पुल के करीब बेखौफ टमटम मशीनों से खनन करते लोग। संवाद
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सचित्र--
टमटम मशीनों से पुल की तह तक निकाली जा रही रेत और बजरी
नावघाट-भीमावाला पुल के पास दिन दिहाड़े हो रहा खनन कार्य
सख्तियों के दावों के बीच खनन माफिया पर नहीं कसी जा रहे नकेल
आदेश शर्मा
पुरुवाला(सिरमौर)। हिमाचल और उत्तराखंड दो राज्यों को जोड़ने के लिए यमुना नदी पर बने नावघाट-भीमावाला (विकासनगर) पुल के पास दिन दिहाड़े बेखौफ खनन जोरों पर चल रहा है। सरकार और प्रशासन की तमाम सख्तियों के बावजूद प्रदेश में खनन माफिया पर नकेल नहीं लग पा रही है। यहां पर रेत, बजरी, पत्थर आदि उठाने के लिए आधा दर्जन से अधिक टमटम मशीनों के द्वारा मनमाने तरीके से खनन किया जा रहा है।
इससे न सिर्फ नदियों का सीना छलनी किया जा रहा है, बल्कि इससे पांवटा, शिलाई और उत्तराखंड की दो दर्जन से भी अधिक पंचायतों को जोड़ने वाले पुल पर भी खतरा बढ़ गया है। हैरानी की बात तो यह है कि यह गैरकानूनी काम सरकार, पुलिस और वन विभाग के अफसरों की नाक के नीचे चल रहा हैं।
बता दें कि यमुना नदी पर तैयार नावघाट-विकासनगर पुल दो राज्यों हिमाचल और उत्तराखंड को जोड़ने का मध्य मार्ग है। इसके अलावा आसपास कोई अन्य विकल्प भी नहीं है।
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दून क्षेत्र के लोग राकेश शर्मा, रोशन लाल, रामपाल, संजीव कुमार, रंजीत सिंह, कृष्णा, संदीप, कमलेश आदि का कहना है कि खनन माफिया पर अंकुश नहीं लगाया तो यह पुल कभी भी गिर सकता है।
उन्होंने कहा कि गिरिपार दून क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है कि जमीन मालिकों के साथ सही पैरवी नहीं हो पाने से सरकार इस पुल को चालू करवाने में पहले ही असफल रही और अब पुल के नीचे खनन होने से कहीं उद्घाटन से पहले ही पुल गिर न जाए। इतना ही नहीं बल्कि खनन से पुल के साथ लगता जंगलायत विभाग का सैकड़ों हेक्टेयर में फैला खैर, शीशम का जंगल भी माफिया के राडार पर है।
दोनों राज्यों के लोगों की इस पुल के चालू होने की उम्मीद बंधी थी लेकिन इस लापरवाही और माफिया की टेढ़ी नजर अब इस पर पड़ चुकी है। समय रहते संबंधित विभाग नहीं जागा तो पुल और जंगल को खतरा और बढ़ सकता है। खनन माफिया द्वारा सरेआम बेखौफ होकर पुल के नीचे तक खनिज की खुदाई करने पहुंच गए।
वन मंडलाधिकारी ऐश्वर्य राज ने कहा कि नावघाट पुल के साथ वन विभाग का बीट लगता है, जिसे हिमाचल सरकार ने लीज पर दिया है। इसके अलावा वन भूमि, जंगल आदि पर कोई खनन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
जिला खनन अधिकारी कुलभूषण शर्मा ने कहा कि यमुना नदी पर अवैध खनन माफिया के खिलाफ कई बार कार्रवाई हो चुकी है। भारी जुर्माना भी वसूला है। उन्होंने कहा कि नाव घाट पुल का हिस्सा उत्तराखंड में आता है और वहां उसी ओर अवैध खनन भी होता रहता है और जो एरिया हमारे राज्य पड़ता है, वह पहले ही लीज पर है, फिर भी खनन विभाग ने कड़ी नजर रखने को अपनी टीम को मौके पर गश्त करने को कह दिया है।
-- -संवाद
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टमटम मशीनों से पुल की तह तक निकाली जा रही रेत और बजरी
नावघाट-भीमावाला पुल के पास दिन दिहाड़े हो रहा खनन कार्य
सख्तियों के दावों के बीच खनन माफिया पर नहीं कसी जा रहे नकेल
आदेश शर्मा
पुरुवाला(सिरमौर)। हिमाचल और उत्तराखंड दो राज्यों को जोड़ने के लिए यमुना नदी पर बने नावघाट-भीमावाला (विकासनगर) पुल के पास दिन दिहाड़े बेखौफ खनन जोरों पर चल रहा है। सरकार और प्रशासन की तमाम सख्तियों के बावजूद प्रदेश में खनन माफिया पर नकेल नहीं लग पा रही है। यहां पर रेत, बजरी, पत्थर आदि उठाने के लिए आधा दर्जन से अधिक टमटम मशीनों के द्वारा मनमाने तरीके से खनन किया जा रहा है।
इससे न सिर्फ नदियों का सीना छलनी किया जा रहा है, बल्कि इससे पांवटा, शिलाई और उत्तराखंड की दो दर्जन से भी अधिक पंचायतों को जोड़ने वाले पुल पर भी खतरा बढ़ गया है। हैरानी की बात तो यह है कि यह गैरकानूनी काम सरकार, पुलिस और वन विभाग के अफसरों की नाक के नीचे चल रहा हैं।
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बता दें कि यमुना नदी पर तैयार नावघाट-विकासनगर पुल दो राज्यों हिमाचल और उत्तराखंड को जोड़ने का मध्य मार्ग है। इसके अलावा आसपास कोई अन्य विकल्प भी नहीं है।
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दून क्षेत्र के लोग राकेश शर्मा, रोशन लाल, रामपाल, संजीव कुमार, रंजीत सिंह, कृष्णा, संदीप, कमलेश आदि का कहना है कि खनन माफिया पर अंकुश नहीं लगाया तो यह पुल कभी भी गिर सकता है।
उन्होंने कहा कि गिरिपार दून क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है कि जमीन मालिकों के साथ सही पैरवी नहीं हो पाने से सरकार इस पुल को चालू करवाने में पहले ही असफल रही और अब पुल के नीचे खनन होने से कहीं उद्घाटन से पहले ही पुल गिर न जाए। इतना ही नहीं बल्कि खनन से पुल के साथ लगता जंगलायत विभाग का सैकड़ों हेक्टेयर में फैला खैर, शीशम का जंगल भी माफिया के राडार पर है।
दोनों राज्यों के लोगों की इस पुल के चालू होने की उम्मीद बंधी थी लेकिन इस लापरवाही और माफिया की टेढ़ी नजर अब इस पर पड़ चुकी है। समय रहते संबंधित विभाग नहीं जागा तो पुल और जंगल को खतरा और बढ़ सकता है। खनन माफिया द्वारा सरेआम बेखौफ होकर पुल के नीचे तक खनिज की खुदाई करने पहुंच गए।
वन मंडलाधिकारी ऐश्वर्य राज ने कहा कि नावघाट पुल के साथ वन विभाग का बीट लगता है, जिसे हिमाचल सरकार ने लीज पर दिया है। इसके अलावा वन भूमि, जंगल आदि पर कोई खनन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
जिला खनन अधिकारी कुलभूषण शर्मा ने कहा कि यमुना नदी पर अवैध खनन माफिया के खिलाफ कई बार कार्रवाई हो चुकी है। भारी जुर्माना भी वसूला है। उन्होंने कहा कि नाव घाट पुल का हिस्सा उत्तराखंड में आता है और वहां उसी ओर अवैध खनन भी होता रहता है और जो एरिया हमारे राज्य पड़ता है, वह पहले ही लीज पर है, फिर भी खनन विभाग ने कड़ी नजर रखने को अपनी टीम को मौके पर गश्त करने को कह दिया है।