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अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले के लिए प्रशासन ने जारी किए दिशा-निर्देश
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नाहन (सिरमौर)। जिला प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय मेला श्री रेणुकाजी के आयोजन को लेकर एसओपी जारी कर दी है। जिला दंडाधिकारी सिरमौर डॉ. आरके परूथी ने कहा कि रेणुका मेला 24 से 30 नवंबर तक मनाया जाना प्रस्तावित है लेकिन कोरोना महामारी से उत्पन्न स्थिति के कारण इस मर्तबा मेले में महज परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मेले के दौरान कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए श्रद्धालुओं को प्रशासन द्वारा जारी एसओपी का पालन करना अनिवार्य होगा। मेले में मूर्ति छूना वर्जित रहेगा। शोभायात्रा अथवा मेले में आने वाले सभी देवालुओं और आमजनों को हर समय मास्क लगाना या चेहरे को ढकना अनिवार्य होगा।
इसके साथ-साथ सामाजिक दूरी बनाए रखना जरूरी है। सभी देवालुओं को अनिवार्य रूप से हाथ धोना अथवा सैनिटाइज करना, देवताओं के दर्शन के लिए कतार में चिह्नित स्थानों पर खड़ा होना, सुबह और शाम सभी मंदिरों को सैनिटाइज करना, उपयोग किए गए मास्क, दस्ताने इत्यादि के निस्तारण हेतु अलग से कूड़ेदान की व्यवस्था करनी होगी। शोभायात्रा और देवताओं के साथ आने जाने वाले सभी देवालुओं और बजंतरियों के लिए कोरोना (कोविड-19) जांच करवाना अनिवार्य होगा। सभी श्रद्धालु और देवालु आरोग्य सेतु एप का उपयोग करेंगे। सभी देवलुओं, कारगारों, बजंतरी जो देवताओं के साथ मेले में भाग लेने के लिए आएंगे, वह अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगे।
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उन्होंने बताया कि 65 वर्ष की आयु के व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों को मेले में न आने का परामर्श दिया गया है। इन आदेशों की अवहेलना पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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मेला अवधि के दौरान हथियार लेकर चलने पर प्रतिबंध: डीएम
नाहन (सिरमौर)। जिला दंडाधिकारी डॉ. आरके परूथी ने सीआरपीसी की धारा 144 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए अंतरराष्ट्रीय रेणुकाजी मेले के दौरान कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी भी व्यक्ति द्वारा आग्नेय शस्त्र, विस्फोटक सामग्री और अन्य धारदार हथियार लेकर चलने पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया है। आदेशों के अनुसार किसी भी श्रद्धालु द्वारा मेला अवधि के दौरान मंदिर में नारियल चढ़ाने पर भी प्रतिबंध रहेगा।
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उन्होंने बताया कि मेले के दौरान कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए श्रद्धालुओं को प्रशासन द्वारा जारी एसओपी का पालन करना अनिवार्य होगा। मेले में मूर्ति छूना वर्जित रहेगा। शोभायात्रा अथवा मेले में आने वाले सभी देवालुओं और आमजनों को हर समय मास्क लगाना या चेहरे को ढकना अनिवार्य होगा।
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इसके साथ-साथ सामाजिक दूरी बनाए रखना जरूरी है। सभी देवालुओं को अनिवार्य रूप से हाथ धोना अथवा सैनिटाइज करना, देवताओं के दर्शन के लिए कतार में चिह्नित स्थानों पर खड़ा होना, सुबह और शाम सभी मंदिरों को सैनिटाइज करना, उपयोग किए गए मास्क, दस्ताने इत्यादि के निस्तारण हेतु अलग से कूड़ेदान की व्यवस्था करनी होगी। शोभायात्रा और देवताओं के साथ आने जाने वाले सभी देवालुओं और बजंतरियों के लिए कोरोना (कोविड-19) जांच करवाना अनिवार्य होगा। सभी श्रद्धालु और देवालु आरोग्य सेतु एप का उपयोग करेंगे। सभी देवलुओं, कारगारों, बजंतरी जो देवताओं के साथ मेले में भाग लेने के लिए आएंगे, वह अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगे।
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उन्होंने बताया कि 65 वर्ष की आयु के व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों को मेले में न आने का परामर्श दिया गया है। इन आदेशों की अवहेलना पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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मेला अवधि के दौरान हथियार लेकर चलने पर प्रतिबंध: डीएम
नाहन (सिरमौर)। जिला दंडाधिकारी डॉ. आरके परूथी ने सीआरपीसी की धारा 144 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए अंतरराष्ट्रीय रेणुकाजी मेले के दौरान कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी भी व्यक्ति द्वारा आग्नेय शस्त्र, विस्फोटक सामग्री और अन्य धारदार हथियार लेकर चलने पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया है। आदेशों के अनुसार किसी भी श्रद्धालु द्वारा मेला अवधि के दौरान मंदिर में नारियल चढ़ाने पर भी प्रतिबंध रहेगा।
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