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मासिक धर्म सामान्य प्रक्रिया इससे डरने की नहीं है जरूरत: डा. सूरभि सूद

Sat, 04 May 2024 11:40 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 04 May 2024 11:40 PM IST
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health checkup camp organised in new era academy school
न्यू ईरा अकादमी हाई स्कूल नाहन में बच्चों को किशोरावस्था पर जागरूक करती मनोचिकित्सक डा. सुरभि स
सचित्र---
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मासिक धर्म सामान्य प्रक्रिया, इससे डरने की नहीं है जरूरत : डाॅ. सुरभि सूद
न्यू ईरा अकादमी स्कूल नाहन में किशोरावस्था में बदलावों पर किया जागरूक
किशोर-किशोरियों को समझाया 10 से 19 साल की उम्र क्यों है महत्वपूर्ण
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। न्यू ईरा अकादमी हाई स्कूल नाहन में शनिवार को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें स्वास्थ्य विभाग से आई मनोचिकित्सक डाॅ. सुरभि सूद ने छात्र-छात्राओं को शारीरिक व मानसिक समस्याओं को लेकर अपनी झिझक को तोड़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने शारीरिक बदलावों से परिचित करवाते हुए किशोरावस्था में होने वाली समस्याओं से अवगत कराया। साथ ही उनके निराकरण की भी जानकारी दी जिससे किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके।
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डाॅ. सुरभि सूद ने मासिक धर्म को लेकर कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है, इसमें डरने की जरूरत नहीं है। बच्चियों को इस दौरान संक्रमण से बचने के लिए कपड़े के बजाय सेनेटरी नैपकिन के इस्तेमाल की सलाह दी।
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इसके अलावा किशोरावस्था के दौरान किशोर-किशोरियों की मानसिक स्थिति पर चर्चा करते हुए पढ़ाई के दौरान होने वाले चिड़चिड़ापन, समस्याओं से परिवार के लोगों अथवा गुरुजनों को अवगत कराने के बारे में बताया जिससे उनकी समस्या को दूर किया जा सके। इसके लिए उन्हें अस्पतालों में डॉक्टर से संपर्क करने की भी सलाह दिया। डाॅ. सुरभि सूद ने कहा कि किशोरावस्था जीवन की सबसे संवेदनशील अवस्था होती है। इस अवस्था में बच्चों को सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है क्योंकि इस अवस्था में ही बच्चा बिगड़ता भी है और सुधरता भी है। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में ही बच्चों में शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं और इस अवस्था में बच्चों को मनोवैज्ञानिक सलाह की जरूरत होती है। इस अवस्था में बहुत से बच्चे गलत संगत में जाकर नशे के आदि हो जाते हैं जो शरीर के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि 10 से 19 वर्ष की आयु को किशोरावस्था कहते हैं और इस आयु में ज्यादातर किशोर किशोरियां गलत आदत के शिकार होते हैं। प्रधानाचार्य डाॅ. शाहिना आलम ने कहा कि राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत किशोरों को पोषण, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, संचारित बीमारियां, नशीले पदार्थों की रोकथाम, लिंग आधारित हिंसा के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इस मौके पर अन्य शिक्षक भी मौजूद रहे।
----संवाद
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