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Sirmour News: हाटी किसान संघ को 26 फरवरी को सौंपा जाएगा हाटी सोंठ का पंजीकरण प्रमाण पत्र

Fri, 06 Feb 2026 11:58 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 06 Feb 2026 11:58 PM IST
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hatti sonth
संवाद न्यूज एजेंसी
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शिलाई (सिरमौर)। सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की पारंपरिक एवं औषधीय गुणों से भरपूर हाटी सोंठ को भारत सरकार की पीपीवीएफआरए से पंजीकरण प्राप्त होने के बाद जीआई टैगिंग के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

26 फरवरी को हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र, सिरमौर (धौलाकुआं) में आयोजित होने वाली वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक के दौरान हाटी किसान संघ को हाटी सोंठ का पंजीकरण प्रमाण पत्र सौंपा जाएगा। यह प्रमाण पत्र हाल ही में केंद्र सरकार के मंत्रालय से कृषि विज्ञान केंद्र को प्राप्त हुआ है।
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कम्युनिटी बेस पर किए गए इस पंजीकरण के अंतर्गत केंद्र सरकार किसानों को बेहतर कृषि उत्पाद विकसित करने के लिए प्रोत्साहन राशि भी प्रदान करती है।

इस पंजीकरण से हाटी सोंठ को राष्ट्रीय पहचान मिली है और आने वाले समय में किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिलने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

एशिया भर में प्रसिद्ध जिला सिरमौर का अदरक कुछ वर्षों तक बीमारी की चपेट में रहने के बाद अब पुन: बेहतर उत्पादन की ओर अग्रसर है। हाटी किसान संघ की ओर से इस विशिष्ट सोंठ के पंजीकरण के लिए कई वर्षों तक निरंतर प्रयास किए गए। इस दौरान सोंठ के सैंपल दिल्ली और केरल की विभिन्न प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए भेजे गए।
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केंद्र सरकार के भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान, कालीकट (केरल) से औषधीय गुणों से भरपूर हाटी सोंठ के सैंपल को मंजूरी मिलने के बाद इसे वर्ष 2025 के गजट में प्रकाशित किया गया। वर्तमान में हाटी सोंठ की जीआई टैगिंग के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर, कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर, धौलाकुआं और हाटी किसान संघ के अध्यक्ष कुंदन सिंह शास्त्री की अहम भूमिका रही है।

गिरिपार के शिलाई क्षेत्र के बेला, बशवा, मोराड, मशवाड़, शरली, कांडो, चयोग, माशू और किलोड़ क्षेत्रों में तैयार अदरक से बड़ी मात्रा में हाटी सोंठ बनाई जाती है। जिला सिरमौर की सोंठ अपनी विशिष्ट खुशबू और औषधीय गुणों के कारण देशभर में अलग पहचान रखती है।

---संवाद
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