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Sirmour News: नकदी फसलों के गिरते दामों से परेशान किसानों को लहसुन से आस
Mon, 19 Oct 2026 04:25 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
Updated Mon, 19 Oct 2026 04:25 AM IST
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टमाटर, शिमला मिर्च और अदरक के दाम गिरने से किसानों की बिगड़ी आर्थिकी
लहसुन के बेहतर भाव मिलने की उम्मीद, बीज की गुणवत्ता करे लेकर भी उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सराहां (सिरमौर)। पच्छाद क्षेत्र में नकदी फसलों के लगातार गिरते दामों से परेशान किसानों को अब लहसुन की फसल से आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लहसुन की खेती की जाती है और इन दिनों किसान इसकी बिजाई में जुटे हैं। टमाटर, शिमला मिर्च और अदरक के अपेक्षित दाम नहीं मिलने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अब किसानों को लहसुन की फसल से मुनाफे की उम्मीद है। इससे पहले भी लहसुन की खेती क्षेत्र के किसानों की आर्थिकी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती रही है।
इस वर्ष नकदी फसलों के दाम कम रहने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। कई किसानों के लिए बीज और दवाइयों पर किया गया खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। वहीं, ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। ऐसे में किसानों ने अब लहसुन की खेती से उम्मीदें लगा रखी हैं, ताकि पिछली फसलों में हुए नुकसान की भरपाई की जा सके।
किसान नागेंद्र सिंह, अमर सिंह, देशराज ठाकुर, अनूप शर्मा, बलवंत सिंह, देवेंद्र शर्मा और भूपेंद्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष लगभग सभी नकदी फसलों के दाम कम रहने से किसानों को नुकसान हुआ है। किसानों के अनुसार, बेंगलुरु से टमाटर और असम से अदरक की अधिक आवक के कारण बाजार में दाम गिरने का असर स्थानीय उत्पादकों पर पड़ा है। उत्पादन पर खर्च करने के बावजूद उचित मूल्य नहीं मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।
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किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसलों के दाम उस अनुपात में नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में खेती से जुड़े खर्च निकालना भी चुनौती बनता जा रहा है। विशेष रूप से ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों के लिए कम दामों के कारण नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो गया है।
किसानों ने फसलों में बढ़ती बीमारियों पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले फसलों में बीमारियों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम रहता था, लेकिन अब कई बार बिजाई के बाद ही फसलों में बीमारी दिखाई देने लगती है। इससे उत्पादन और खेती की लागत, दोनों प्रभावित होते हैं।
किसानों ने सरकार और कृषि विभाग से बीज की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि अधिकतर किसान बाजार से बीज खरीदकर खेती करते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा बीज गुणवत्तापूर्ण और रोगमुक्त हो।
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लहसुन के बेहतर भाव मिलने की उम्मीद, बीज की गुणवत्ता करे लेकर भी उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सराहां (सिरमौर)। पच्छाद क्षेत्र में नकदी फसलों के लगातार गिरते दामों से परेशान किसानों को अब लहसुन की फसल से आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लहसुन की खेती की जाती है और इन दिनों किसान इसकी बिजाई में जुटे हैं। टमाटर, शिमला मिर्च और अदरक के अपेक्षित दाम नहीं मिलने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अब किसानों को लहसुन की फसल से मुनाफे की उम्मीद है। इससे पहले भी लहसुन की खेती क्षेत्र के किसानों की आर्थिकी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती रही है।
इस वर्ष नकदी फसलों के दाम कम रहने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। कई किसानों के लिए बीज और दवाइयों पर किया गया खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। वहीं, ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। ऐसे में किसानों ने अब लहसुन की खेती से उम्मीदें लगा रखी हैं, ताकि पिछली फसलों में हुए नुकसान की भरपाई की जा सके।
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किसान नागेंद्र सिंह, अमर सिंह, देशराज ठाकुर, अनूप शर्मा, बलवंत सिंह, देवेंद्र शर्मा और भूपेंद्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष लगभग सभी नकदी फसलों के दाम कम रहने से किसानों को नुकसान हुआ है। किसानों के अनुसार, बेंगलुरु से टमाटर और असम से अदरक की अधिक आवक के कारण बाजार में दाम गिरने का असर स्थानीय उत्पादकों पर पड़ा है। उत्पादन पर खर्च करने के बावजूद उचित मूल्य नहीं मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।
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किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसलों के दाम उस अनुपात में नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में खेती से जुड़े खर्च निकालना भी चुनौती बनता जा रहा है। विशेष रूप से ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों के लिए कम दामों के कारण नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो गया है।
किसानों ने फसलों में बढ़ती बीमारियों पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले फसलों में बीमारियों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम रहता था, लेकिन अब कई बार बिजाई के बाद ही फसलों में बीमारी दिखाई देने लगती है। इससे उत्पादन और खेती की लागत, दोनों प्रभावित होते हैं।
किसानों ने सरकार और कृषि विभाग से बीज की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि अधिकतर किसान बाजार से बीज खरीदकर खेती करते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा बीज गुणवत्तापूर्ण और रोगमुक्त हो।