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Sirmour News: इटरनल विश्वविद्यालय में 245 छात्र-छात्राओं को मिली उपाधियां
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इटरनल विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करती छात्रा। स्रोत विश्वविद्याल
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-शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान या रोजगार पाना नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और नैतिक मूल्यों को जीवन में उतारना है : डॉ. दविंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। जिले में स्थित प्रतिष्ठित इटरनल विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षांत समारोह शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर के भाई गुरदास हॉल में गरीमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस शैक्षणिक उत्सव में उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों से आए गण्यमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समारोह की शुरुआत पवित्र गुरबाणी एवं शबद कीर्तन के साथ हुई, जिसके बाद पारंपरिक अकादमिक शोभायात्रा निकाली गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. दविंद्र सिंह ने की। इस अवसर पर देश के जाने-माने अर्थशास्त्री व ईग्रो फाउंडेशन के सीईओ एवं संस्थापक डॉ. चरण सिंह मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुंदरी कॉलेज फॉर वीमेन की प्राचार्या डॉ. हरप्रीत कौर ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की।
समारोह में कुल 245 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इसमें स्नातक के 175, स्नातकोत्तर के 54 तथा विद्या वाचस्पति (पीएचडी) 16 शोधार्थी शामिल रहे। इसके अलावा विभिन्न विभागों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक, रजत पदक और मेरिट प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। उपाधि मिलते ही पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम में कुलपति डॉ. नीलम कौर ने विश्वविद्यालय की वार्षिक शैक्षणिक व अनुसंधान रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों पर विशेष ध्यान दे रहा है। अपने अध्यक्षीय भाषण में कुलाधिपति डॉ. दविंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान या रोजगार पाना नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और नैतिक मूल्यों को जीवन में उतारना है। आज का युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसे अपनी प्रतिभा और संस्कारों से समाज का उत्थान करना चाहिए।
मुख्यातिथि डॉ. चरण सिंह ने छात्रों को तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज को सकारात्मक दिशा देने का सबसे बड़ा माध्यम है। वहीं, विशिष्ट अतिथि डॉ. हरप्रीत कौर ने युवाओं को निरंतर सीखते रहने और अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति व मानवीय संवेदनाओं से जुड़े रहने का संदेश दिया।
संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। जिले में स्थित प्रतिष्ठित इटरनल विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षांत समारोह शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर के भाई गुरदास हॉल में गरीमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस शैक्षणिक उत्सव में उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों से आए गण्यमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समारोह की शुरुआत पवित्र गुरबाणी एवं शबद कीर्तन के साथ हुई, जिसके बाद पारंपरिक अकादमिक शोभायात्रा निकाली गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. दविंद्र सिंह ने की। इस अवसर पर देश के जाने-माने अर्थशास्त्री व ईग्रो फाउंडेशन के सीईओ एवं संस्थापक डॉ. चरण सिंह मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुंदरी कॉलेज फॉर वीमेन की प्राचार्या डॉ. हरप्रीत कौर ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की।
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समारोह में कुल 245 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इसमें स्नातक के 175, स्नातकोत्तर के 54 तथा विद्या वाचस्पति (पीएचडी) 16 शोधार्थी शामिल रहे। इसके अलावा विभिन्न विभागों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक, रजत पदक और मेरिट प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। उपाधि मिलते ही पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम में कुलपति डॉ. नीलम कौर ने विश्वविद्यालय की वार्षिक शैक्षणिक व अनुसंधान रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों पर विशेष ध्यान दे रहा है। अपने अध्यक्षीय भाषण में कुलाधिपति डॉ. दविंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान या रोजगार पाना नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और नैतिक मूल्यों को जीवन में उतारना है। आज का युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसे अपनी प्रतिभा और संस्कारों से समाज का उत्थान करना चाहिए।
मुख्यातिथि डॉ. चरण सिंह ने छात्रों को तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज को सकारात्मक दिशा देने का सबसे बड़ा माध्यम है। वहीं, विशिष्ट अतिथि डॉ. हरप्रीत कौर ने युवाओं को निरंतर सीखते रहने और अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति व मानवीय संवेदनाओं से जुड़े रहने का संदेश दिया।
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