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बहनों ने मांगी भाइयों की लंबी उम्र की दुआ
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नाहन में भैया दूज पर्व पर अपनी भाई का मुंह मीठा करती एक बहन।
- फोटो : NAHAN
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नाहन (सिरमौर)। जिला मुख्यालय नाहन सहित जिलाभर में सोमवार को भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित भैया दूज का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस मुबारक मौके पर बहनों ने भाई को तिलक कर भगवान से उनकी लंबी उम्र, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। वहीं, भाइयों ने भी बहन को रक्षा का वचन देते हुए उन्हें शगुन के रूप में उपहार दिए। इस पर्व को लेकर कुछ लोगों ने शुभ मुहूर्त का इंतजार किया। जबकि बहुत से लोगों ने शुभ-अशुभ मुहूर्त को दरकिनार कर सुबह से ही इस पर्व का आनंद लिया। विवाहित महिलाएं इस पावन पर्व पर मायके आईं और भाइयों को तिलक किया।
उधर, इस मौके पर बसों में भी भीड़ रही। विशेषकर महिलाएं मुफ्त बस सेवा को लेकर काफी उत्सुक दिखाई दीं। जिला में रात भर से बारिश हो रही थी बावजूद इसके बस अड्डे पर लोग सुबह से ही जुटने शुरू हो गए थे जिनमें अधिकांश संख्या महिलाओं की रही लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जहां इक्का-दुक्का बसें ही चलती हैं, वहां महिलाओं को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भैया दूज पर्व पर घरों पर मेहमानों का आना-जाना लगा रहा। मेहमानों के स्वागत के लिए पकवान बनाए गए। बच्चों ने भी घर में खूब आनंद उठाया। इस खास पर्व पर सुबह से ही तिलक लगवाने के लिए भाई-बहनों का एक-दूसरे के घर आने-जाने का सिलसिला जारी रहा। ज्यादातर सरकारी कार्यालयों से कर्मचारी भी अवकाश पर रहे।
जिला के धारटीधार, सैनधार और गिरिपार क्षेत्र में भैया दूज पर्व पुरानी परंपराओं को निर्वाह करते हुए मनाया गया। भैया दूज के अवसर पर धारटीधार और सैनधार क्षेत्र के सभी दामाद अपने सास-ससुर के लिए दिवाली की भेंट लेकर अपने ससुराल पहुंचे जहां दामादों का सास-ससुर ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
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गौरतलब है कि भैयादूज के दिन का ससुराल वालों और उनके दामादों के लिए विशेष महत्व होता है। इस दिन सभी दामाद चावल और अखरोट की भेंट लेकर अपने-अपने ससुराल पहुंचते हैं। शाम को भोजन करने से पूर्व दामाद अपनी परंपरा का निर्वाह करता है। इसके बाद ही खील-बताशे और मूड़ी का आनंद लिया जाता है।
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उधर, इस मौके पर बसों में भी भीड़ रही। विशेषकर महिलाएं मुफ्त बस सेवा को लेकर काफी उत्सुक दिखाई दीं। जिला में रात भर से बारिश हो रही थी बावजूद इसके बस अड्डे पर लोग सुबह से ही जुटने शुरू हो गए थे जिनमें अधिकांश संख्या महिलाओं की रही लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जहां इक्का-दुक्का बसें ही चलती हैं, वहां महिलाओं को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भैया दूज पर्व पर घरों पर मेहमानों का आना-जाना लगा रहा। मेहमानों के स्वागत के लिए पकवान बनाए गए। बच्चों ने भी घर में खूब आनंद उठाया। इस खास पर्व पर सुबह से ही तिलक लगवाने के लिए भाई-बहनों का एक-दूसरे के घर आने-जाने का सिलसिला जारी रहा। ज्यादातर सरकारी कार्यालयों से कर्मचारी भी अवकाश पर रहे।
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जिला के धारटीधार, सैनधार और गिरिपार क्षेत्र में भैया दूज पर्व पुरानी परंपराओं को निर्वाह करते हुए मनाया गया। भैया दूज के अवसर पर धारटीधार और सैनधार क्षेत्र के सभी दामाद अपने सास-ससुर के लिए दिवाली की भेंट लेकर अपने ससुराल पहुंचे जहां दामादों का सास-ससुर ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
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गौरतलब है कि भैयादूज के दिन का ससुराल वालों और उनके दामादों के लिए विशेष महत्व होता है। इस दिन सभी दामाद चावल और अखरोट की भेंट लेकर अपने-अपने ससुराल पहुंचते हैं। शाम को भोजन करने से पूर्व दामाद अपनी परंपरा का निर्वाह करता है। इसके बाद ही खील-बताशे और मूड़ी का आनंद लिया जाता है।