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आयुर्वेदिक डॉक्टर के हवाले कफोटा पीएचसी
ब्यूरो/अमर उजाला,शिलाई (सिरमौर)
Updated Wed, 04 May 2016 07:07 PM IST
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कुल्लू अस्पताल में उपचाराधीन बच्ची।
- फोटो : अमर उजाला
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शिलाई (सिरमौर)। स्वास्थ्य के क्षेत्र में अव्वल होने के सरकारी दावे धरातल पर हवाई साबित हो रहे हैं। हालात यह है कि कई अस्पतालों में मरीजों की नब्ज टटोलने के लिए चिकित्सक तक उपलब्ध नहीं है।
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गिरिपार क्षेत्र के कफोटा पीएचसी को ही लें तो यहां मरीजों की सेहत आयुर्वेदिक चिकित्सक के सहारे छोड़ी गई है। अस्पताल में मात्र एक आयुर्वेदिक चिकित्सक है। मरीजों की संख्या अधिक होने की वजह से अस्पताल में महज एक चिकित्सक नाकाफी है। चिकित्सकों की कमी अस्पताल में आने वाले मरीजों का मर्ज दूर होने की बजाय और बढ़ रहा है।
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गिरिपार क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के हाल बेहाल हैं। कफोटा पीएचसी में एमबीबीएस चिकित्सक नहीं होने के कारण कई पंचायतों की जनता को उपचार करवाने के लिए विकास नगर, देहरादून या पांवटा जाना पड़ रहा है। चिकित्सक के रिक्त पद के चलते स्वास्थ्य विभाग ने इस पीएचसी का जिम्मा एक आयुर्वेदिक चिकित्सक को सौंप रखा है। पीएचसी का विस्तृत दायरा होने के कारण ओपीडी की संख्या बहुत ज्यादा है। पिछले पांच वर्षों से यहां चिकित्सक का पद रिक्त पड़ा हुआ है। चिकित्सक के अतिरिक्त क्लर्क का पद भी दो वर्षों से खाली है। स्टाफ की कमी होने के कारण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्र की जनता ने रिक्त पदों पर नियुक्तियों के साथ-साथ दंत चिकित्सक व स्टाफ नर्स के पद भी सृजित करने की मांग की है। दुगाना के पूर्व प्रधान संत राम, इंदु पुंडीर, कंवर सिंह नंबरदार, गुमान सिंह चौहान, सुरेश ठाकुर, लाला कल्याण सिंह, रत्ती राम शर्मा, खजान शर्मा ने बताया कि कफोटा कस्बा कई गांवों का केंद्र बिंदु है जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं लेकिन स्टाफ की कमी के चलते लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।
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उधर, बीएमओ डॉ. केके पराशर ने बताया कि अस्पताल में चल रहे रिक्त पदों के बारे में आला अधिकारियों को समय-समय पर सूचित किया जाता रहा है। जल्द ही समस्या के समाधान की उम्मीद है।