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पांवटा में बच्चों से बाल मजदूरी, काम का वेतन भी नहीं
Updated Sat, 04 Aug 2018 10:25 PM IST
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दुकानों में बच्चों से करवाई जा रही मजदूरी
बच्चों को मेहनताना भी नहीं दे रहे दुकानदार
पांवटा में चाइल्ड लाइन ने चलाया रेकी अभियान
दुकानदार बोले-मजदूरी नहीं, काम सीखने आए हैं
अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब (सिरमौर)। चाइल्ड लाइन सिरमौर ने पांवटा बाजार में रात के समय रेकी अभियान चलाया। इस मौके पर दुकानों में एक दर्जन के करीब बच्चे बाल मजदूरी करते पाए गए। बच्चों से पूछताछ के दौरान हैरान कर देने वाली बात सामने आई कि काम के बदले बच्चों को कोई मजदूरी भी नहीं दी जाती है। इसके बारे में दुकानदारों से पूछताछ की गई तो बाल मजदूरी करने वाले बच्चों को काम सीखने के उद्देश्य से दुकान पर रखने की बात कही गई। बच्चों ने भी स्वीकारा कि दुकानदार उन्हें मजदूरी नहीं देते। सामने यह भी आया कि बाल मजदूरी निर्धारित समय से अधिक ली जा रही है। मजदूरी का कोई समय निर्धारित नहीं किया है गया, जो बाल श्रम अधिनियम की अवहेलना है। चाइल्ड लाइन सिरमौर की समन्वयक सुमित्रा शर्मा, काउंसलर विनीता और टीम सदस्य राजेंद्र तथा राजन ने पांवटा पुलिस थाना में डीडी एंट्री कराने के बाद होमगार्ड जवान नरेश और सलीम को साथ लेकर बाजार की रेकी की। इस दौरान टीम ने शुक्रवार की रात आठ बजे तक भी बच्चों को काम करते हुए पाया गया। इस दौरान सामने आया कि अधिकतर दुकानों पर काम करने वाले बच्चों को कोई मजदूरी नहीं दी जा रही है। साथ ही कई दुकानदार बाल श्रम अधिनियम की भी अवहेलना कर रहे हैं। अधिनियम के अनुसार 14 साल से कम बच्चों से बाल मजदूरी नहीं करवाई जा सकती है। इस मौके पर चाइल्ड लाइन ने सभी दुकानदारों को चाइल्ड लेबर एक्ट के बारे में जानकारी दी। किशोर मजदूरों को मिलने वाले अधिकारों के बारे में भी दुकानदारों को जागरूक किया। काउसंलर विनीता ने बताया कि रेकी के दौरान दस दुकानों और ढाबों में बच्चों को काम करते पाया गया है। गृह रक्षा के जवानों को ऐसी दुकानों में बच्चों के फॉलोअप की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही इस मसले पर श्रम विभाग को भी अवगत करवा दिया है।
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बच्चों को मेहनताना भी नहीं दे रहे दुकानदार
पांवटा में चाइल्ड लाइन ने चलाया रेकी अभियान
दुकानदार बोले-मजदूरी नहीं, काम सीखने आए हैं
अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब (सिरमौर)। चाइल्ड लाइन सिरमौर ने पांवटा बाजार में रात के समय रेकी अभियान चलाया। इस मौके पर दुकानों में एक दर्जन के करीब बच्चे बाल मजदूरी करते पाए गए। बच्चों से पूछताछ के दौरान हैरान कर देने वाली बात सामने आई कि काम के बदले बच्चों को कोई मजदूरी भी नहीं दी जाती है। इसके बारे में दुकानदारों से पूछताछ की गई तो बाल मजदूरी करने वाले बच्चों को काम सीखने के उद्देश्य से दुकान पर रखने की बात कही गई। बच्चों ने भी स्वीकारा कि दुकानदार उन्हें मजदूरी नहीं देते। सामने यह भी आया कि बाल मजदूरी निर्धारित समय से अधिक ली जा रही है। मजदूरी का कोई समय निर्धारित नहीं किया है गया, जो बाल श्रम अधिनियम की अवहेलना है। चाइल्ड लाइन सिरमौर की समन्वयक सुमित्रा शर्मा, काउंसलर विनीता और टीम सदस्य राजेंद्र तथा राजन ने पांवटा पुलिस थाना में डीडी एंट्री कराने के बाद होमगार्ड जवान नरेश और सलीम को साथ लेकर बाजार की रेकी की। इस दौरान टीम ने शुक्रवार की रात आठ बजे तक भी बच्चों को काम करते हुए पाया गया। इस दौरान सामने आया कि अधिकतर दुकानों पर काम करने वाले बच्चों को कोई मजदूरी नहीं दी जा रही है। साथ ही कई दुकानदार बाल श्रम अधिनियम की भी अवहेलना कर रहे हैं। अधिनियम के अनुसार 14 साल से कम बच्चों से बाल मजदूरी नहीं करवाई जा सकती है। इस मौके पर चाइल्ड लाइन ने सभी दुकानदारों को चाइल्ड लेबर एक्ट के बारे में जानकारी दी। किशोर मजदूरों को मिलने वाले अधिकारों के बारे में भी दुकानदारों को जागरूक किया। काउसंलर विनीता ने बताया कि रेकी के दौरान दस दुकानों और ढाबों में बच्चों को काम करते पाया गया है। गृह रक्षा के जवानों को ऐसी दुकानों में बच्चों के फॉलोअप की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही इस मसले पर श्रम विभाग को भी अवगत करवा दिया है।